पंजाब के जल संकट पर पिछली सरकारों को घेरा, मान सरकार के कार्यकाल में नहरी पानी का इस्तेमाल 22 से बढ़कर 88 प्रतिशत हुआ: बलतेज पन्नू

पंजाब के जल संकट पर पिछली सरकारों को घेरा, मान सरकार के कार्यकाल में नहरी पानी का इस्तेमाल 22 से बढ़कर 88 प्रतिशत हुआ: बलतेज पन्नू

आप नेता ने कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों पर लगाया जल संसाधनों की अनदेखी का आरोप; विधानसभा में पारित जल प्रस्तावों को बताया पंजाब के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम

पंजाब में घटते भूजल स्तर और राज्य के जल संसाधनों के प्रबंधन को लेकर आम आदमी पार्टी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधा है। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों ने लंबे समय तक भूजल संकट की गंभीरता को नजरअंदाज किया। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे कि पंजाब का भूजल तेजी से नीचे जा रहा है, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। उन्होंने कहा कि पानी के संरक्षण और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को प्राथमिकता देने के बजाय पिछली सरकारों के कार्यकाल में राज्य की नहरों, नदियों और बांधों से जुड़े मुद्दे उपेक्षित रहे।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पन्नू ने कहा कि पंजाब के पानी को बचाने के नाम पर बड़े-बड़े दावे करने वाले राजनीतिक दलों का वास्तविक रिकॉर्ड उनके दावों से अलग रहा है। उनके अनुसार, जिन लोगों ने खुद को पानी का रक्षक बताकर प्रचार किया, उन्होंने सत्ता में रहते हुए राज्य के जल संसाधनों के हितों की रक्षा नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों की नीतियों और फैसलों का नुकसान पंजाब की आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ सकता है।

एसवाईएल के मुद्दे पर कांग्रेस और अकाली दल पर निशाना

बलतेज पन्नू ने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस और अकाली दल की पिछली सरकारों के फैसलों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एसवाईएल का प्रस्ताव रखा था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें सोने का सिक्का और चांदी की थैली भेंट की थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बादल सरकार के कार्यकाल में भी एसवाईएल से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। पन्नू के मुताबिक, उस समय हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवी लाल ने हरियाणा विधानसभा में बादल साहब का आभार जताया था। उन्होंने नहरों की ऊंचाई बढ़ाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि ऐसा पानी को बादल परिवार के निजी फार्महाउस तक पहुंचाने के लिए किया गया था।

पन्नू ने कहा कि पंजाब के पानी से जुड़े फैसलों को राजनीतिक लाभ या निजी हितों के बजाय राज्य और यहां के किसानों के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए था। उनके अनुसार, पिछली सरकारों ने इस महत्वपूर्ण विषय पर गंभीरता नहीं दिखाई और इसका परिणाम आज राज्य को भूजल संकट के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

मान सरकार के कार्यकाल में नहरी पानी के इस्तेमाल में बढ़ोतरी का दावा

आप नेता ने वर्ष 2022 में भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद नहरी पानी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सत्ता संभालते ही नहरी पानी को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए। उस समय पंजाब में खेती के लिए नहरी पानी का इस्तेमाल लगभग 21 से 22 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर करीब 88 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

पन्नू के अनुसार, नहरी जल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जमीन के नीचे दबी दरारों और पानी के प्रवाह में आने वाली बाधाओं की पहचान की गई। इसके साथ ही लगभग 14 हजार किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई, ताकि नहरी पानी खेतों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए खनिज तत्वों से भरपूर नहरी पानी उपलब्ध हो रहा है।

उन्होंने कहा कि खेती में नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ने से ट्यूबवेल और बोरवेल के जरिए भूजल निकालने पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। पहले कई गांवों में पानी का स्तर नीचे जाने के कारण बोरवेल में बार-बार अतिरिक्त पाइप डालने की जरूरत पड़ती थी। पन्नू का दावा है कि नहरी पानी की आपूर्ति बढ़ने से इस समस्या में कमी आई है और कुछ क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि पंजाब के सामने पानी का संकट केवल मौजूदा पीढ़ी की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भविष्य की खेती, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी है। इसलिए नहरी नेटवर्क को मजबूत करना और भूजल पर निर्भरता घटाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

विधानसभा में जल प्रस्तावों पर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल

बलतेज पन्नू ने पंजाब विधानसभा के हालिया सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्र के अंतिम दिन राज्य के जल संसाधनों और पानी से जुड़े अधिकारों के संबंध में महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए गए थे। उनके अनुसार, इन प्रस्तावों का उद्देश्य पंजाब के हितों की रक्षा करना और पानी के बंटवारे से जुड़े पुराने विवादों के समाधान की दिशा में कदम उठाना था।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा करने के बजाय विधानसभा में हंगामा किया और सदन से बाहर चली गई। पन्नू ने कहा कि कांग्रेस वोट चोरी के मुद्दे पर तो अपनी स्थिति स्पष्ट करती है, लेकिन जब पंजाब के पानी और राज्य के अधिकारों की बात आती है तो उसके नेता सदन में मौजूद नहीं रहते।

उन्होंने सवाल किया कि विधानसभा सत्र समाप्त होने के कई दिन बाद भी कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और अन्य राजनीतिक दलों ने इन प्रस्तावों पर अपनी स्पष्ट राय क्यों नहीं रखी। पन्नू ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी पहले से ही पंजाब के अधिकारों के खिलाफ रही है और इसीलिए पानी से जुड़े प्रस्तावों पर उसकी ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

आप नेता ने कहा कि पंजाब के जल संसाधनों का सवाल किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। यह राज्य के किसानों, ग्रामीण आबादी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। ऐसे में सभी दलों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

यमुना के पानी में पंजाब का हिस्सा देने की मांग

पन्नू ने विधानसभा में पारित प्रस्तावों की प्रमुख मांगों को भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि प्रस्तावों में केंद्र सरकार से वर्ष 1994 के समझौते की समीक्षा करने और यमुना के पानी में पंजाब को उसका उचित एवं ऐतिहासिक हिस्सा देने की मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि पानी के बंटवारे से जुड़े विवाद का समाधान बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। यदि जरूरत पड़े तो इस मामले को जल अधिकरण या सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए, ताकि पंजाब के अधिकारों को स्पष्ट रूप से सुरक्षित किया जा सके।

उनके अनुसार, पंजाब के हितों से जुड़े ऐसे मामलों में केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष भूमिका निभाए और राज्य के पक्ष को गंभीरता से सुने। पानी के बंटवारे का फैसला केवल प्रशासनिक या राजनीतिक सुविधा के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों, उपलब्ध संसाधनों और संबंधित राज्यों के अधिकारों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

तीन हेडवर्क्स का प्रबंधन पंजाब के अधीन रखने की मांग

विधानसभा के प्रस्तावों में एक अन्य महत्वपूर्ण मांग रोपड़, हरिके और फिरोजपुर हेडवर्क्स से संबंधित है। पन्नू ने कहा कि नदी किनारे स्थित राज्य होने के नाते पंजाब की सीमा में आने वाले इन तीनों हेडवर्क्स का प्रबंधन और रखरखाव पूरी तरह पंजाब सरकार के अधीन होना चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि राज्य के भीतर स्थित जल ढांचों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी पंजाब के पास रहने से जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। इन हेडवर्क्स का संबंध सिंचाई, जल आपूर्ति और राज्य की व्यापक जल व्यवस्था से है, इसलिए इनके प्रबंधन में पंजाब की भूमिका निर्णायक होनी चाहिए।

पन्नू ने कहा कि पंजाब के पानी से जुड़े फैसलों में राज्य की भागीदारी और अधिकारों को सुनिश्चित करना जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि नहरी पानी का इस्तेमाल बढ़े, भूजल पर दबाव कम हो और राज्य के जल संसाधनों से संबंधित अधिकार सुरक्षित रहें।

प्रवासी पंजाबियों से भी समर्थन की उम्मीद

आप नेता ने कहा कि पंजाब में रहने वाले लोगों के साथ-साथ देश और विदेश में बसे पंजाबी समुदाय को भी पानी के मुद्दे की गंभीरता का एहसास है। उनके अनुसार, प्रवासी पंजाबी अपने राज्य की खेती, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं और वे नहीं चाहते कि पंजाब के हितों की अनदेखी हो।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में पारित प्रस्ताव राज्य के जल अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। पंजाब के लोगों को यह समझना होगा कि भूजल का लगातार दोहन और नहरी पानी का सीमित इस्तेमाल भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके लिए सरकार, किसानों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।

पन्नू ने दोहराया कि पंजाब के पानी की रक्षा करना केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि राज्य की कृषि और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि वे विधानसभा में उठाए गए जल संबंधी प्रस्तावों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें और पंजाब के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग करें।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पन्नू ने मान सरकार के कार्यकाल में नहरी पानी के इस्तेमाल में हुई बढ़ोतरी को अपनी सरकार की उपलब्धि बताया। साथ ही उन्होंने पिछली सरकारों पर जल संकट की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब पंजाब के पानी और उसके अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उनके मुताबिक, राज्य के जल संसाधनों का संरक्षण और उनका न्यायसंगत उपयोग ही पंजाब के भविष्य को सुरक्षित करने का रास्ता है।