चंडीगढ़ में भाजपा के ‘जख्म 84 दे’ सम्मेलन में राजीव गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस पर हमला, कहा- चार दशक बाद भी पीड़ित परिवार न्याय के इंतजार में
चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने के साथ ही 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस की ओर से संगरूर में चुनावी अभियान की शुरुआत किए जाने के बीच भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए उसके नेतृत्व से जवाब मांगा है। बुधवार को चंडीगढ़ में भाजपा ने ‘जख्म 84 दे’ नाम से विशेष सम्मेलन आयोजित किया। इसमें पार्टी नेताओं ने 1984 की हिंसा, पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में हुई देरी और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के विवादित बयान को लेकर कांग्रेस पर तीखे सवाल उठाए।
सम्मेलन में पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अपने पिता और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, जो उन्होंने 19 नवंबर 1984 को दिया था। प्रसाद ने सवाल किया कि आखिर राहुल गांधी और उनके परिवार ने अब तक 1984 की हिंसा को लेकर देश से स्पष्ट और ईमानदार माफी क्यों नहीं मांगी? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस मामले में केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पंजाब की आत्मा पर दो ऐसे गहरे घाव हैं, जिनका दर्द आज भी महसूस किया जाता है। इनमें पहला 1984 के सिख विरोधी दंगे और दूसरा राज्य में नशे की गंभीर समस्या है। उनके अनुसार, इन दोनों मुद्दों पर राजनीति करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए निष्पक्ष जांच, दोषियों को सजा और प्रभावित परिवारों को न्याय मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि 1984 की हिंसा में जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए चार दशक बाद भी न्याय का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।
राजीव गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस से जवाब मांगा
भाजपा सांसद ने अपने संबोधन में राजीव गांधी के 19 नवंबर 1984 के उस बयान का विशेष उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। प्रसाद ने आरोप लगाया कि देश में हजारों निर्दोष सिखों की हत्या के बाद दिया गया यह बयान हिंसा को उचित ठहराने वाला संदेश देता था। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसी संवेदनशील घटना पर जिम्मेदार और स्पष्ट प्रतिक्रिया की अपेक्षा की जाती है।
उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि क्या वह अपने पिता के इस बयान से सहमत हैं या कांग्रेस आज भी इससे दूरी बनाने को तैयार नहीं है? प्रसाद के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 1984 की हिंसा के दौरान हुई घटनाओं और उसके बाद अपनाए गए राजनीतिक रवैये को लेकर उसकी वर्तमान सोच क्या है।
उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों के लिए यह केवल इतिहास का कोई पुराना अध्याय नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन से जुड़ा ऐसा दर्द है, जो आज भी उनके सामाजिक और पारिवारिक जीवन को प्रभावित करता है। इसलिए इस विषय पर राजनीतिक दलों की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।
चार दशक तक आरोपित नेताओं को संरक्षण देने का आरोप
रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने के बजाय लंबे समय तक अपने नेताओं को राजनीतिक संरक्षण दिया। उन्होंने सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ जैसे नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने इस मामले में कठोर और निर्णायक कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।
उन्होंने कांग्रेस की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए उसे ‘लटकाना, भटकाना और झटकाना’ करार दिया। प्रसाद ने कहा कि दंगों के बाद जांच के लिए कई आयोग और समितियां गठित की गईं, लेकिन पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। उनके अनुसार, आयोगों के गठन और जांच की घोषणाओं के बावजूद दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में लगातार देरी होती रही।
प्रसाद ने कहा कि तत्कालीन सरकारों के पास कार्रवाई करने के पर्याप्त अवसर थे, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण पीड़ितों को वर्षों तक अदालतों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस वास्तव में न्याय के पक्ष में थी तो इतने लंबे समय तक इस मामले में निर्णायक परिणाम क्यों नहीं सामने आए?
एसआईटी गठन और न्यायिक कार्रवाई का किया उल्लेख
भाजपा सांसद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने 1984 के मामलों की दोबारा जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस ढींगरा की सिफारिशों को लागू करने के बाद जांच और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिली। इसी प्रक्रिया के बाद सज्जन कुमार जैसे आरोपितों को अदालत से सजा मिल सकी।
उन्होंने कहा कि न्याय मिलने की प्रक्रिया में जांच एजेंसियों के साथ-साथ अदालतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। भाजपा का दावा है कि केंद्र सरकार ने पुराने मामलों को फिर से गंभीरता से लेने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में कदम उठाए।
इस दौरान प्रसाद ने वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका के संघर्ष की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि फूलका ने लंबे समय तक अदालतों में पीड़ित परिवारों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया में जीवित रखा। प्रसाद के अनुसार, पीड़ितों के लिए न्याय की लड़ाई केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई लोगों ने व्यक्तिगत स्तर पर भी वर्षों तक संघर्ष किया है।
राहुल गांधी के पंजाब दौरे की टाइमिंग पर उठाए सवाल
भाजपा ने कांग्रेस के चुनावी कार्यक्रमों और उनकी तारीखों को लेकर भी सवाल खड़े किए। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस ने एक नवंबर को दिल्ली में रैली आयोजित की और चार नवंबर को पंजाब में राजनीतिक कार्यक्रम किया। ऐसे समय में जब 1984 की हिंसा के पीड़ित परिवार आज भी न्याय की मांग कर रहे हैं, कांग्रेस नेतृत्व को अपने अतीत और उससे जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संगरूर में इंसाफ की बात कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस को पहले यह बताना चाहिए कि 1984 में जिन लोगों ने अपने परिवार खोए, उन्हें न्याय दिलाने के लिए उसकी सरकारों ने क्या किया? उनके अनुसार, चुनावी मंच से न्याय और जवाबदेही की बातें करना आसान है, लेकिन अपने राजनीतिक इतिहास से जुड़े सवालों का सामना करना भी उतना ही आवश्यक है।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने बुधवार को संगरूर में ‘हिसाब मांगो’ रैली के माध्यम से पंजाब में कांग्रेस के 2027 विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत की। कांग्रेस इस कार्यक्रम को राज्य में सत्ता वापसी की रणनीति के पहले बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के तौर पर देख रही है। वहीं भाजपा ने इसी राजनीतिक माहौल में 1984 के दंगों का मुद्दा उठाकर कांग्रेस के सामने पुरानी घटनाओं और पीड़ितों को न्याय मिलने में हुई देरी का सवाल खड़ा किया है।
अरदास के साथ शुरू हुआ सम्मेलन
चंडीगढ़ में आयोजित ‘जख्म 84 दे’ सम्मेलन की शुरुआत 1984 में हिंसा के दौरान मारे गए लोगों की आत्मिक शांति और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से अरदास के साथ हुई। इसके बाद रविशंकर प्रसाद, पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पंजाब प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने नवंबर 1984 की घटनाओं पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
प्रदर्शनी में उस दौर की हिंसा और उसके कारण प्रभावित हुए परिवारों की तस्वीरें लगाई गई थीं। इसमें त्रिलोकपुरी में जलते मकानों, कनॉट प्लेस में आग की चपेट में आई दुकानों और हिंसा के कारण उजड़े परिवारों की तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया। इन तस्वीरों के माध्यम से सम्मेलन में पहुंचे लोगों को उस दौर की भयावह परिस्थितियों और पीड़ितों के संघर्ष से अवगत कराने का प्रयास किया गया।
भाजपा नेताओं ने कहा कि 1984 की घटनाओं को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह हजारों परिवारों के जीवन से जुड़ा गंभीर मानवीय और न्यायिक विषय है। पार्टी ने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग को लगातार उठाया जाता रहेगा।
’42 साल बाद भी समुदाय के जख्म ताजा’
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि 42 साल बीत जाने के बाद भी राजीव गांधी का बयान सिख समुदाय के जख्मों को ताजा कर देता है। उन्होंने कहा कि 1984 में जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके दर्द और संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता। भाजपा इस घटना को न भूली है और न ही इसे भुलाने देगी।
ढिल्लों ने कांग्रेस के चुनावी अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी संगरूर में इंसाफ की बात कर रहे हैं, लेकिन पंजाब के लोग यह भी जानते हैं कि 1984 में जिनकी सरकार के दौरान इतनी बड़ी त्रासदी हुई, उनसे जवाब मांगना क्यों जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले यह बताना चाहिए कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए उसने अपने शासनकाल में क्या ठोस कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को केवल चुनाव तक सीमित नहीं रखेगी। जब तक 1984 की हिंसा के अंतिम दोषी को सजा नहीं मिल जाती, तब तक पार्टी पीड़ितों के न्याय की मांग उठाती रहेगी।
पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता दोहराई
सम्मेलन में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी 1984 के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्याय की लड़ाई अभी पूरी नहीं हुई है और जिन परिवारों को लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा, उनकी आवाज को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर उठाना जरूरी है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला तेज हो रहा है। ऐसे में कांग्रेस की ओर से इंसाफ और जवाबदेही का मुद्दा उठाए जाने पर भाजपा ने 1984 की घटनाओं को सामने रखकर पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस को पंजाब की जनता से समर्थन मांगने से पहले अपने अतीत से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।
इस तरह संगरूर में कांग्रेस के चुनावी अभियान की शुरुआत के साथ ही पंजाब की राजनीति में 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा फिर प्रमुखता से उभर आया है। एक ओर कांग्रेस 2027 के चुनाव को लेकर सरकार से हिसाब मांगने की तैयारी में है, वहीं भाजपा ने उसके सामने 1984 की हिंसा और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में हुई देरी का सवाल खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पंजाब की चुनावी राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।




