‘पंजाब दा करोड़पति’ मुकाबले के लिए बनेगा हाईटेक डिजिटल सिस्टम, एप से होगा रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन परीक्षा

‘पंजाब दा करोड़पति’ मुकाबले के लिए बनेगा हाईटेक डिजिटल सिस्टम, एप से होगा रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन परीक्षा

प्रश्न बैंक से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन तक पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल, जिला और राज्य स्तर पर होंगे मुकाबले; शिकायतों के समाधान के लिए भी बनेगा अलग मॉड्यूल

चंडीगढ़। पंजाब सरकार की ओर से प्रस्तावित ‘पंजाब दा करोड़पति’ क्विज मुकाबले को लेकर प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रतियोगिता को व्यवस्थित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए विशेष मोबाइल एप और वेब पोर्टल विकसित किए जाएंगे। प्रतियोगियों के पंजीकरण, दस्तावेजों की जांच, प्रश्न बैंक तैयार करने, ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने और परिणाम घोषित करने तक की व्यवस्था डिजिटल माध्यम से की जाएगी।

इस पूरी तकनीकी परियोजना के विकास और संचालन की जिम्मेदारी गुड गवर्नेंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को सौंपी गई है। इस संबंध में उच्च शिक्षा एवं भाषाएं विभाग के प्रशासनिक सचिव ने गुड गवर्नेंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रशासनिक सचिव को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रतियोगिता के प्रत्येक चरण को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संचालित करना और इसमें मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश कम करना है।

प्रतियोगिता के लिए तैयार किए जाने वाले डिजिटल सिस्टम में प्रश्न तैयार करने से लेकर उनके सत्यापन और अंतिम मंजूरी तक की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी। इसके अलावा आवेदकों के दस्तावेजों की जांच, प्रतिभागियों का चयन, ऑनलाइन राउंड में अंक निर्धारण और जिला तथा राज्य स्तर पर होने वाले फिजिकल मुकाबलों का संचालन भी इसी व्यवस्था के माध्यम से किया जाएगा।

प्रश्न तैयार करने से मंजूरी तक सुरक्षित रहेगा पूरा रिकॉर्ड

‘पंजाब दा करोड़पति’ प्रतियोगिता के लिए सबसे पहले एक सुरक्षित प्रश्न बैंक प्रबंधन पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस पोर्टल पर नामित विशेषज्ञों को प्रश्न तैयार करने और दर्ज करने की सुविधा मिलेगी। इसके लिए प्रश्न तैयार करने वाले विशेषज्ञों और उनका सत्यापन करने वाले अधिकारियों को अलग-अलग अधिकृत पहुंच प्रदान की जाएगी।

प्रश्न बैंक में दर्ज होने वाले सभी सवालों की जांच, सत्यापन और मंजूरी की प्रक्रिया भी ऑनलाइन पूरी होगी। पोर्टल पर प्रश्नों को उनके विषय, श्रेणी और कठिनाई के स्तर के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा। इससे प्रतियोगिता के अलग-अलग चरणों में उपयुक्त स्तर के प्रश्नों का चयन करना आसान होगा।

प्रश्न बैंक की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसकी पहुंच केवल अधिकृत अधिकारियों और संबंधित विशेषज्ञों तक सीमित रखी जाएगी। कौन-सा सवाल किसने तैयार किया, किस अधिकारी ने उसका सत्यापन किया और उसे कब मंजूरी दी गई, इसका पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा।

इस व्यवस्था से प्रश्नों की गोपनीयता बनाए रखने के साथ-साथ किसी भी तरह की अनधिकृत पहुंच और संभावित गड़बड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। प्रश्न बैंक का प्रबंधन एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगा, जिससे प्रतियोगिता की विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनाए रखी जा सके।

मोबाइल एप और पोर्टल से होगा प्रतियोगियों का पंजीकरण

प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक लोगों के लिए अलग मोबाइल एप और वेब पोर्टल तैयार किया जाएगा। इसके माध्यम से प्रतिभागी अपनी निर्धारित श्रेणी के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने के साथ जरूरी दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे।

पंजीकरण के बाद संबंधित विभागीय अधिकारी आवेदकों की ओर से जमा करवाए गए दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। यदि किसी आवेदन में दस्तावेज अधूरे पाए जाते हैं या किसी प्रकार की कमी सामने आती है तो आवेदक को इसकी जानकारी दी जाएगी। इसके बाद उसे जरूरी सुधार करने और दोबारा दस्तावेज जमा करवाने का अवसर मिलेगा।

आवेदन को मंजूर या अस्वीकार करने की स्थिति में संबंधित कारण भी पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इससे आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और प्रतियोगियों को अपने आवेदन की स्थिति जानने में सुविधा होगी।

डिजिटल सिस्टम में डुप्लीकेट पंजीकरण रोकने के लिए भी विशेष व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही जिला स्तर पर सभी आवेदकों का रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि प्रतियोगिता में भाग लेने वालों की संख्या और उनकी श्रेणीवार जानकारी उपलब्ध रहे। निर्धारित दस्तावेज सत्यापन पूरा होने के बाद ही किसी आवेदन को वैध पंजीकरण माना जाएगा।

ऑनलाइन मुकाबले में अपने आप मिलेंगे अंक

प्रतियोगिता के ऑनलाइन चरणों का तकनीकी संचालन भी गुड गवर्नेंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग करेगा। इसके तहत प्रतिभागियों को निर्धारित समय में प्रश्न उपलब्ध करवाने, सवालों का रैंडम चयन करने और उनके जवाब रिकॉर्ड करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

ऑनलाइन राउंड के दौरान प्रत्येक प्रतिभागी को निर्धारित समय सीमा के भीतर सवालों के जवाब देने होंगे। जवाब दर्ज होते ही सिस्टम के माध्यम से स्वत: अंक निर्धारित किए जाएंगे। इसके बाद प्रदर्शन और प्राप्त अंकों के आधार पर अगले चरण में पहुंचने वाले प्रतियोगियों की सूची तैयार की जा सकेगी।

प्रश्नों का रैंडम चयन होने से अलग-अलग प्रतिभागियों को सवालों का चयन निर्धारित प्रणाली के अनुसार मिलेगा। इससे प्रतियोगिता के ऑनलाइन चरण में निष्पक्षता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

इसके अलावा सिस्टम में प्रतियोगियों के जवाब, उनके द्वारा लिए गए समय और प्राप्त अंकों का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा जाएगा। इससे जरूरत पड़ने पर किसी प्रतिभागी के प्रदर्शन से संबंधित जानकारी की जांच की जा सकेगी।

जिला और राज्य स्तर पर होंगे फिजिकल राउंड

प्रतियोगिता केवल ऑनलाइन परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। इसके जिला और राज्य स्तर पर फिजिकल राउंड भी आयोजित किए जाएंगे। इन मुकाबलों के संचालन के लिए भी विशेष तकनीकी व्यवस्था विकसित की जाएगी।

फिजिकल राउंड के दौरान मंच पर सवाल प्रदर्शित करने के लिए बड़ी स्क्रीन, समय की गणना के लिए डिजिटल टाइमर, जवाब देने के लिए बजर और अंकों के निर्धारण के लिए स्कोरिंग सिस्टम उपलब्ध करवाया जाएगा। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों के प्रदर्शन और प्राप्त अंकों को स्क्रीन पर प्रदर्शित करने की सुविधा भी होगी।

इन मुकाबलों में तकनीकी गड़बड़ी या इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित होने जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए वैकल्पिक इंतजाम भी किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी तकनीकी समस्या के कारण प्रतियोगिता की प्रक्रिया प्रभावित न हो और प्रतिभागियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रकार के मुकाबलों के लिए एकीकृत तकनीकी व्यवस्था तैयार करने की योजना है, ताकि प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों में आंकड़ों और परिणामों का रिकॉर्ड एक ही सिस्टम में उपलब्ध रहे।

शिकायत के लिए मिलेगा अलग रेफरेंस नंबर

प्रतियोगिता में भाग लेने वाले लोगों की समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए मोबाइल एप और वेब पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत निवारण मॉड्यूल भी विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से प्रतिभागी पंजीकरण, दस्तावेज सत्यापन, परीक्षा, अंक निर्धारण या प्रतियोगिता के किसी अन्य चरण से जुड़ी शिकायत दर्ज कर सकेंगे।

पोर्टल पर दर्ज होने वाली प्रत्येक शिकायत को एक अलग रेफरेंस नंबर दिया जाएगा। इसके बाद शिकायत संबंधित अधिकारी तक पहुंचेगी और उसके समाधान की प्रक्रिया ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।

इस मॉड्यूल में शिकायत की स्थिति देखने, समाधान के लिए निर्धारित समयसीमा जानने और जरूरत पड़ने पर अपील करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इससे प्रतिभागियों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

शिकायतों के निपटारे की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज रहेगी। इससे अधिकारियों को यह पता लगाने में भी आसानी होगी कि किस स्तर पर कितनी शिकायतें लंबित हैं और कितनी शिकायतों का समाधान किया जा चुका है।

अधिकारियों के लिए बनेगा विशेष मॉनिटरिंग डैशबोर्ड

प्रतियोगिता की निगरानी और प्रशासनिक समीक्षा के लिए उच्च शिक्षा एवं भाषाएं विभाग के अधिकारियों को एक अलग मॉनिटरिंग डैशबोर्ड उपलब्ध करवाया जाएगा। इस डैशबोर्ड के माध्यम से प्रतियोगिता से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़ों और गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।

इसमें जिला, शैक्षणिक संस्थान और प्रतिभागियों की श्रेणी के अनुसार पंजीकरण की जानकारी उपलब्ध होगी। इसके अलावा कितने आवेदकों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा हुआ, कितने आवेदन लंबित हैं और कितने प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता के अलग-अलग चरणों में हिस्सा लिया, इसका भी विवरण देखा जा सकेगा।

डैशबोर्ड पर ऑनलाइन और ऑफलाइन राउंड के परिणाम, प्रतिभागियों का प्रदर्शन और शिकायतों के निपटारे से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। इससे विभागीय अधिकारियों को प्रतियोगिता की प्रगति की नियमित समीक्षा करने और किसी भी स्तर पर सामने आने वाली समस्या पर समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक प्रतियोगिता के संचालन की स्थिति एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने से निगरानी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।

तकनीकी परियोजना का खर्च आईटी विभाग उठाएगा

इस पूरी डिजिटल व्यवस्था को विकसित करने के लिए बजट का मुद्दा भी सामने आया है। उच्च शिक्षा एवं भाषाएं विभाग के पास मोबाइल एप और वेब पोर्टल तैयार करने के लिए अलग से बजट का प्रावधान नहीं है। ऐसे में इस तकनीकी परियोजना पर होने वाले खर्च को गुड गवर्नेंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के बजट से वहन करने का विकल्प रखा गया है।

इसके लिए दोनों विभागों के बीच समन्वय के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आईटी विभाग को एप और पोर्टल के विकास के साथ उनके तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी भी दी गई है।

प्रतियोगिता से संबंधित नियमावली अलग से उपलब्ध करवाई जाएगी। इसी नियमावली के आधार पर अंक निर्धारण, अगले चरण में पहुंचने के मानदंड, प्रतिभागियों की पात्रता और अन्य प्रक्रियाएं तय होंगी। यानी डिजिटल सिस्टम तैयार होने के साथ-साथ प्रतियोगिता के संचालन से जुड़े नियमों को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।

पारदर्शी और व्यवस्थित प्रतियोगिता कराने की तैयारी

पंजाब सरकार की इस पहल के तहत ‘पंजाब दा करोड़पति’ को एक व्यवस्थित डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से संचालित करने की तैयारी है। पंजीकरण से लेकर अंतिम परिणाम तक सभी चरणों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से प्रशासनिक निगरानी आसान होगी। वहीं प्रतिभागियों को आवेदन, दस्तावेज जमा करवाने, परीक्षा में शामिल होने और शिकायत दर्ज करने जैसी सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेंगी।

प्रश्न बैंक की सुरक्षा, स्वत: अंक निर्धारण, डुप्लीकेट पंजीकरण पर रोक और शिकायतों के ऑनलाइन निपटारे जैसी व्यवस्थाएं प्रतियोगिता को पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

फिलहाल, सरकार की ओर से डिजिटल ढांचे को तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। प्रतियोगिता की नियमावली और अन्य संचालन संबंधी विवरण सामने आने के बाद इसके आयोजन तथा प्रतिभागियों की पात्रता को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।