Punjab News: पंजाब मिल्कफेड के चेयरमैन नरिंदर सिंह शेरगिल ने दिया इस्तीफा, सरकार ने तुरंत किया मंजूर

Punjab News: पंजाब मिल्कफेड के चेयरमैन नरिंदर सिंह शेरगिल ने दिया इस्तीफा, सरकार ने तुरंत किया मंजूर

पंजाब की राजनीति और सहकारी क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पंजाब मिल्कफेड (Milkfed Punjab) के चेयरमैन नरिंदर सिंह शेरगिल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्य सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह, लगभग 26 फरवरी 2026 के आसपास अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसे तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया गया।

हालांकि, अब तक सरकार या शेरगिल की ओर से इस्तीफे के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। राजनीतिक हलकों में इसे व्यक्तिगत या प्रशासनिक कारणों से जोड़ा जा रहा है, लेकिन इस संबंध में किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि नरिंदर सिंह शेरगिल आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और उन्हें मुख्यमंत्री भगवंत मान का करीबी माना जाता रहा है। ऐसे में उनके इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है।

पंजाब मिल्कफेड क्या है और इसकी क्या भूमिका है?

पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन लिमिटेड, जिसे आमतौर पर पंजाब मिल्कफेड के नाम से जाना जाता है, राज्य की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी संस्था है। इसका प्रमुख उद्देश्य राज्य के लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों से दूध खरीदना, उसका प्रसंस्करण करना और विभिन्न डेयरी उत्पादों के रूप में बाजार तक पहुंचाना है।

मिल्कफेड का सबसे लोकप्रिय ब्रांड वेरका (Verka) है, जो पंजाब ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में दूध, दही, घी, मक्खन, पनीर, लस्सी, आइसक्रीम और अन्य डेयरी उत्पादों के लिए जाना जाता है।

राज्य के हजारों डेयरी सहकारी समितियों और लाखों दुग्ध उत्पादकों की आजीविका इस संस्था से जुड़ी हुई है। इसलिए मिल्कफेड के चेयरमैन का पद प्रशासनिक और आर्थिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

कब संभाली थी चेयरमैन की जिम्मेदारी?

नरिंदर सिंह शेरगिल को 31 अगस्त 2022 को मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने पंजाब मिल्कफेड का चेयरमैन नियुक्त किया था। उस समय राज्य सरकार ने विभिन्न बोर्डों, निगमों और सहकारी संस्थाओं में कई राजनीतिक नियुक्तियां की थीं, जिनमें शेरगिल का नाम भी शामिल था।

चेयरमैन बनने के बाद उन्होंने लगभग चार वर्षों तक इस पद पर कार्य किया। इस दौरान उन्होंने डेयरी क्षेत्र के विस्तार, किसानों के हितों और वेरका ब्रांड की पहुंच बढ़ाने से जुड़े कई प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाई।

वेरका ब्रांड के विस्तार पर रहा विशेष फोकस

अपने कार्यकाल के दौरान नरिंदर सिंह शेरगिल ने पंजाब से बाहर भी वेरका ब्रांड की उपस्थिति मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। विशेष रूप से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वेरका दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की दिशा में कई कदम उठाए गए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में वेरका दूध की दैनिक सप्लाई को लगभग 20 हजार लीटर से बढ़ाकर 2 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके लिए वितरण नेटवर्क मजबूत करने, नए बिक्री केंद्र खोलने और उपभोक्ताओं तक बेहतर पहुंच बनाने की योजनाओं पर काम किया गया।

इसके अलावा आधुनिक डेयरी तकनीक, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

किसानों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर रही सक्रियता

चेयरमैन के रूप में शेरगिल ने डेयरी किसानों के हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर काम किया। उन्होंने दूध संग्रह प्रणाली को मजबूत करने, सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार और डेयरी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया।

राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी प्रयास किए गए। वेरका ब्रांड की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के लिए नए उत्पादों और बेहतर विपणन रणनीतियों पर भी काम हुआ।

इस्तीफे का कारण अभी स्पष्ट नहीं

हालांकि शेरगिल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन इसके पीछे की वास्तविक वजह को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

सरकार की ओर से जारी आदेश में केवल इस्तीफा स्वीकार किए जाने की जानकारी दी गई। न तो शेरगिल ने सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया दी है और न ही सरकार ने कारणों का खुलासा किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आती, तब तक इस्तीफे के कारणों को लेकर किसी भी तरह की अटकलों को तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

मोहाली की राजनीति से जुड़ा लंबा राजनीतिक सफर

नरिंदर सिंह शेरगिल का राजनीतिक जीवन मुख्य रूप से मोहाली जिले से जुड़ा रहा है। वे मोहाली के खरड़ क्षेत्र स्थित झिंगरां कलां गांव के निवासी हैं और स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।

वे अपने गांव के पूर्व सरपंच भी रह चुके हैं। ग्रामीण स्तर की राजनीति से शुरुआत करने के बाद उन्होंने राज्य स्तर की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।

उनका नाम आम आदमी पार्टी के शुरुआती सक्रिय नेताओं में शामिल रहा है, जिन्होंने पंजाब में पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया।

2017 विधानसभा चुनाव में मिले थे AAP के उम्मीदवार

वर्ष 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने नरिंदर सिंह शेरगिल को मोहाली विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था।

उस समय पार्टी पंजाब में बड़े राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर रही थी और कई नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा गया था। हालांकि, शेरगिल इस चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके।

चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाना जारी रखा और क्षेत्रीय स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में लगातार भाग लेते रहे।

2019 लोकसभा चुनाव भी लड़ा

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने उन्हें आनंदपुर साहिब लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया।

इस चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी विजयी रहे, जबकि शिरोमणि अकाली दल के प्रेम सिंह चंदूमाजरा दूसरे स्थान पर रहे। नरिंदर सिंह शेरगिल को लगभग 53 हजार वोट प्राप्त हुए और वे तीसरे स्थान पर रहे।

हालांकि चुनावी जीत उन्हें नहीं मिली, लेकिन पार्टी के सक्रिय नेताओं में उनकी पहचान बनी रही।

संगठन में निभाई कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

नरिंदर सिंह शेरगिल केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने मोहाली और आसपास के क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई।

वे रोड शो, जनसभाओं, जनसंपर्क अभियानों और संगठनात्मक बैठकों में लगातार शामिल होते रहे। स्थानीय स्तर पर पार्टी के विस्तार और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बनाए रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।

किन मुद्दों पर करते रहे राजनीति?

अपने राजनीतिक जीवन के दौरान नरिंदर सिंह शेरगिल ने कई स्थानीय और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—

  • भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग
  • युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
  • नशे की समस्या पर नियंत्रण
  • ग्रामीण विकास
  • प्रवासन और स्थानीय रोजगार
  • किसानों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े मुद्दे
  • आधारभूत सुविधाओं का विकास

उन्होंने कई चुनावी अभियानों के दौरान “परिवर्तन” और पारदर्शी शासन जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।

मिल्कफेड में चेयरमैन की भूमिका क्यों होती है अहम?

पंजाब मिल्कफेड के चेयरमैन का पद केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

चेयरमैन संस्था की नीतियों, विस्तार योजनाओं, किसानों के हितों, नए निवेश, डेयरी उद्योग के आधुनिकीकरण और ब्रांड विकास से जुड़े कई अहम निर्णयों में भूमिका निभाते हैं।

वेरका जैसे बड़े ब्रांड की प्रतिस्पर्धा देश की अन्य प्रमुख डेयरी कंपनियों से रहती है। ऐसे में संस्था के नेतृत्व की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

आगे किसे मिल सकती है जिम्मेदारी?

नरिंदर सिंह शेरगिल के इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि पंजाब सरकार मिल्कफेड के नए चेयरमैन के रूप में किसे जिम्मेदारी सौंप सकती है।

हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक किसी नए नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। संभावना है कि आने वाले समय में सरकार नई नियुक्ति को लेकर आदेश जारी करे।

जब तक नई नियुक्ति नहीं होती, तब तक संस्था के नियमित प्रशासनिक कार्य पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार चलते रहेंगे।

राज्य की राजनीति में इस्तीफे के मायने

पंजाब की सहकारी संस्थाओं और बोर्डों में होने वाले नेतृत्व परिवर्तन को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में विभिन्न बोर्डों और निगमों में समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं।

नरिंदर सिंह शेरगिल का इस्तीफा भी ऐसे समय आया है जब राज्य सरकार प्रशासनिक स्तर पर कई नियुक्तियों और पुनर्गठन की प्रक्रिया पर काम कर रही है। हालांकि, उनके इस्तीफे को किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ने संबंधी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और नए चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर सभी की नजरें राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।

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