अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर गुनजीत रुचि बावा ने 1200 विद्यार्थियों को किया जागरूक

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर गुनजीत रुचि बावा ने 1200 विद्यार्थियों को किया जागरूक

बच्चों को शिक्षा के साथ अपने अधिकारों और सुरक्षा की जानकारी देना भी जरूरी : गुनजीत रुचि बावा

लुधियाना: अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर बच्चों को शिक्षा के साथ उनके अधिकारों, सुरक्षा और जरूरत के समय उपलब्ध सहायता के साधनों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। पंजाब बाल अधिकार आयोग की वाइस चेयरपर्सन गुनजीत रुचि बावा ने ‘नन्हे कदम’ पहल के तहत सरकारी हाई स्कूल, ढंडारी कलां का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल के करीब 1200 विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और उन्हें शिक्षा, बाल अधिकार, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा कठिन परिस्थितियों में मदद हासिल करने के विभिन्न माध्यमों की जानकारी दी।

विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए गुनजीत रुचि बावा ने कहा कि साक्षरता को केवल पढ़ने और लिखने की क्षमता तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को ज्ञान देने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। जब कोई बच्चा अपने अधिकारों को समझता है तो वह अपने आसपास होने वाली घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकता है और किसी भी असुरक्षित परिस्थिति में उचित निर्णय लेने का साहस हासिल करता है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को यह जानकारी होना बेहद जरूरी है कि उनके साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार, उत्पीड़न, धमकी या उपेक्षा होने पर उन्हें चुप रहने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में वे अपने माता-पिता, शिक्षकों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर संबंधित सहायता व्यवस्था का सहारा ले सकते हैं।

गुनजीत रुचि बावा ने विद्यार्थियों को व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में भी समझाया। उन्होंने कहा कि बच्चों में शुरुआत से ही यह आत्मविश्वास विकसित किया जाना चाहिए कि वे सही और गलत व्यवहार के बीच अंतर कर सकें। यदि कोई परिस्थिति उन्हें असहज या असुरक्षित महसूस कराती है तो उस बारे में खुलकर बात करना जरूरी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी बच्चे को यदि किसी प्रकार की परेशानी हो, वह खुद को असुरक्षित महसूस करे या उसे सहायता की आवश्यकता हो तो वह मदद के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क कर सकता है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे हेल्पलाइन की जानकारी अपने दोस्तों और जरूरतमंद साथियों तक भी पहुंचाएं, ताकि मुश्किल समय में कोई बच्चा सहायता से वंचित न रहे।

गुनजीत रुचि बावा ने कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करना केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए। स्कूलों में नियमित रूप से ऐसी गतिविधियां आयोजित की जानी चाहिए, जिनमें विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, सुरक्षा, जिम्मेदारियों और सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि जागरूक बच्चा न केवल स्वयं को सुरक्षित रखने में सक्षम होता है, बल्कि अपने आसपास के अन्य बच्चों के लिए भी मददगार बन सकता है।

उन्होंने कहा, “साक्षरता बच्चे को दुनिया को समझने की क्षमता देती है, जबकि जागरूकता उसे इस दुनिया में सही तरीके से आगे बढ़ने का आत्मविश्वास देती है। हर बच्चे को यह पता होना चाहिए कि शिक्षा और अधिकार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।”

कार्यक्रम के दौरान बच्चों के साथ संवाद करते हुए उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शिक्षा का व्यापक उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़ा है। केवल किताबी ज्ञान हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। बच्चों में आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और अपने अधिकारों के प्रति समझ विकसित करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों की सुरक्षा का दायरा केवल घर और स्कूल तक सीमित नहीं रहा है। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है। उन्हें अपनी निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए और यदि ऑनलाइन या वास्तविक जीवन में कोई ऐसी स्थिति सामने आती है जिससे वे असहज महसूस करें तो तुरंत किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

उन्होंने शिक्षकों और स्कूल प्रशासन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं और उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों को समझ सकते हैं। इसलिए स्कूलों में ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए जहां विद्यार्थी बिना डर के अपनी समस्याएं शिक्षकों के साथ साझा कर सकें।

गुनजीत रुचि बावा ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसमें माता-पिता, शिक्षक, प्रशासन, सामाजिक संगठन और आम नागरिक सभी की भूमिका है। बच्चों को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि मुश्किल परिस्थिति में उनकी बात सुनी जाएगी और उन्हें सहायता मिलेगी।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह संदेश देना भी रहा कि पढ़ाई केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने का माध्यम नहीं है। शिक्षा व्यक्ति को अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने, अधिकारों को समझने और समाज में जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाती है।

इस अवसर पर विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी और पढ़ाई से जुड़ी आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध करवाई गई। ‘आस एहसास’ एनजीओ की ओर से बच्चों को लिखने वाले बोर्ड और पेन वितरित किए गए। संस्था की ओर से विद्यार्थियों को आगामी परीक्षाओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और बाल अधिकारों तथा सुरक्षा से संबंधित विषयों पर बातचीत की। संवाद के दौरान बच्चों को अपनी समस्याओं को दबाने के बजाय सही समय पर आवाज उठाने तथा जरूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए प्रेरित किया गया।

इस मौके पर डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) अमनदीप सिंह, स्कूल की मुख्य अध्यापिका नवनींदर कौर और स्कूल का स्टाफ मौजूद रहा। कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों ने भी बच्चों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी देने के ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

‘नन्हे कदम’ पहल के तहत आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि मजबूत समाज की नींव जागरूक और शिक्षित बच्चों से तैयार होती है। बच्चों को यदि कम उम्र से ही शिक्षा के साथ सुरक्षा, अधिकारों और जिम्मेदारियों की समझ दी जाए तो वे भविष्य में अधिक आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ समाज में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति गंभीर रहने, अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और किसी भी कठिन परिस्थिति में मदद लेने से न झिझकने का संदेश दिया गया। साथ ही शिक्षण संस्थानों और समाज के सभी वर्गों से बच्चों की सुरक्षा तथा जागरूकता के लिए लगातार प्रयास करते रहने की अपील की गई।