अकाली-भाजपा गठबंधन से पंजाब में एनडीए की जीत तय : रामदास अठावले

अकाली-भाजपा गठबंधन से पंजाब में एनडीए की जीत तय : रामदास अठावले

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) 10 से 15 विधानसभा सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार, बाकी सीटों पर गठबंधन प्रत्याशियों को समर्थन देने का ऐलान

चंडीगढ़। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर गठबंधन की राजनीति ने अभी से जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। इसी बीच केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास अठावले ने पंजाब की सियासत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर साथ आते हैं तो पंजाब में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत सुनिश्चित हो सकती है। उनके अनुसार, दोनों दलों के बीच गठबंधन बनने से चुनावी समीकरण बदलेंगे और एनडीए को राज्य में मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित होने का अवसर मिलेगा।

चंडीगढ़ दौरे पर पहुंचे अठावले ने कहा कि पंजाब की राजनीति में अकाली दल और भाजपा दोनों का अपना अलग जनाधार रहा है। पूर्व में दोनों दल लंबे समय तक गठबंधन में रहकर चुनाव लड़ते रहे हैं। ऐसे में यदि दोनों पार्टियां फिर से एक मंच पर आती हैं तो इसका सीधा लाभ एनडीए को मिल सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों दलों की संयुक्त ताकत आगामी विधानसभा चुनाव में बेहतर परिणाम देने में सक्षम होगी।

अठावले ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी भी पंजाब विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रही है। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) राज्य में केवल गठबंधन के समर्थन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार भी उतारेगी। पार्टी की योजना 10 से 15 सीटों पर चुनाव लड़ने की है। इन सीटों पर संगठन की स्थिति और चुनावी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा।

10 से 15 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उनकी पार्टी पंजाब की 10 से 15 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी। इन क्षेत्रों में पार्टी अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगी और चुनावी अभियान के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचेगी। वहीं, शेष विधानसभा सीटों पर एनडीए के उम्मीदवारों को समर्थन दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य पंजाब में एनडीए को मजबूत करना और गठबंधन की चुनावी संभावनाओं को बेहतर बनाना है। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) गठबंधन के साथ मिलकर काम करने की इच्छुक है। पार्टी चाहती है कि पंजाब में सभी सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल बने और चुनाव के दौरान एक साझा रणनीति के तहत काम किया जाए।

अठावले के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में छोटे सहयोगी दलों की भूमिका और सीटों के बंटवारे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 10 से 15 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ उनकी पार्टी ने यह संकेत दिया है कि वह गठबंधन में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी चाहती है। हालांकि, किन विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे जाएंगे और सीटों के बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों के बीच क्या सहमति बनेगी, इस बारे में अभी कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

अकाली दल-भाजपा की एकजुटता को बताया चुनावी सफलता का आधार

रामदास अठावले ने अकाली दल और भाजपा के संभावित गठबंधन को पंजाब की राजनीति के लिए अहम बताते हुए कहा कि दोनों दलों के एक साथ आने से एनडीए को नई मजबूती मिलेगी। उनके मुताबिक, दोनों पार्टियों के बीच पहले भी राजनीतिक और संगठनात्मक तालमेल रहा है। यदि यह तालमेल दोबारा स्थापित होता है तो इसका असर विधानसभा चुनाव के परिणामों पर दिखाई दे सकता है।

पंजाब में अकाली दल और भाजपा का गठबंधन लंबे समय तक राज्य की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। दोनों दलों ने कई विधानसभा और लोकसभा चुनाव मिलकर लड़े। हालांकि, कृषि कानूनों को लेकर वर्ष 2020 में दोनों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ गई थी और अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद से दोनों दल अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ रहे हैं।

अब आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों दलों के संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। अठावले ने भी अपने बयान के माध्यम से इस संभावना का समर्थन किया है। उनका मानना है कि पंजाब में एनडीए की मजबूती के लिए अकाली दल और भाजपा का साथ आना जरूरी है।

हालांकि, दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित पार्टी नेतृत्व को ही लेना है। अभी तक अठावले के बयान को किसी औपचारिक गठबंधन घोषणा के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसके बावजूद उनके बयान ने पंजाब में चुनावी गठजोड़ और संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

अन्य राज्यों में भी चुनावी मैदान में उतरेगी पार्टी

रामदास अठावले ने बताया कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) की चुनावी रणनीति केवल पंजाब तक सीमित नहीं रहेगी। उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में अन्य राज्यों में भी अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रही है। इसके तहत मणिपुर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी पार्टी अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगी।

उन्होंने कहा कि पार्टी विभिन्न राज्यों में संगठन को मजबूत करने और अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करने के लिए काम कर रही है। चुनावों में भागीदारी बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है। जिन राज्यों में चुनाव लड़े जाएंगे, वहां स्थानीय परिस्थितियों और संगठन की स्थिति के अनुसार उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

अठावले की पार्टी अनुसूचित जातियों, वंचित वर्गों और सामाजिक रूप से कमजोर तबकों से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बनाती रही है। पार्टी इन वर्गों के बीच संगठनात्मक पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ चुनावी राजनीति में अपनी भागीदारी मजबूत करना चाहती है।

एनडीए में सहयोगी भूमिका बढ़ाने की रणनीति

रामदास अठावले के बयान से यह संकेत मिलता है कि उनकी पार्टी आगामी चुनावों में एनडीए के साथ अपनी राजनीतिक भूमिका का विस्तार करना चाहती है। पंजाब में 10 से 15 सीटों पर चुनाव लड़ने और बाकी सीटों पर एनडीए प्रत्याशियों को समर्थन देने की योजना इसी रणनीति का हिस्सा है।

पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होने के साथ गठबंधन और सीटों के समीकरण भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में अकाली दल और भाजपा के संभावित साथ आने का मुद्दा एनडीए की चुनावी रणनीति के केंद्र में रह सकता है। अठावले ने अपने बयान में दोनों दलों की एकजुटता को जीत का आधार बताया है।

अब देखना होगा कि अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन को लेकर क्या राजनीतिक सहमति बनती है और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) को संभावित गठबंधन में कितनी सीटें मिलती हैं। फिलहाल केंद्रीय मंत्री के बयान ने पंजाब की आगामी चुनावी राजनीति में नए समीकरणों और संभावित गठबंधन को लेकर बहस को जरूर तेज कर दिया है।