नाभा जेल से रिहाई के बाद समर्थकों ने किया स्वागत, परविंदर झोटा मामले पर जताई अनभिज्ञता; अमृतपाल सिंह और जेलों में बंद सिखों की रिहाई के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही
नाभा। लखा सिधाना को वीरवार देर शाम नाभा की नई जिला जेल से रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई के दौरान जेल के बाहर समर्थकों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही। उन्हें लेने के लिए वारिस पंजाब दे के तरसेम सिंह, भाना सिद्धू, काका सिंह, नवजोत कौर लंबी, सतविंदर सिंह टोहड़ा और लखवीर सिंह लौट सहित कई लोग पहुंचे। जेल से बाहर आते ही समर्थकों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में लखा सिधाना ने पंजाब के मौजूदा हालात, नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई और जेलों में बंद सिखों की रिहाई के लिए चल रहे संघर्ष को लेकर अपनी बात रखी।
जेल से बाहर आने के बाद पत्रकारों ने उनसे परविंदर झोटा के मामले और उसे इंसाफ मिलने की संभावना को लेकर सवाल किया। इस पर लखा सिधाना ने कहा कि उन्हें इस मामले की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। पिछले कुछ दिनों से वह पुलिस हिरासत में थे और इस दौरान उन्हें अलग-अलग पुलिस थानों में रखा गया था। ऐसे में पंजाब में हाल ही में हुए घटनाक्रमों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं मिल पाई।
मोर्चे में शामिल होने के बाद लेंगे फैसले
पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह अब परविंदर झोटा के समर्थन में चल रहे मोर्चे में शामिल होंगे और आगे की रणनीति क्या होगी। इस पर उन्होंने कहा कि मोर्चे में जाने के बाद ही उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिलेगी। इसके बाद ही वह इस संबंध में कोई बात कह सकेंगे। उन्होंने फिलहाल किसी तरह की घोषणा करने से परहेज किया और कहा कि पहले उन्हें मौजूदा हालात समझने होंगे।
पुलिस हिरासत के दौरान उनके साथ हुए व्यवहार के बारे में पूछे जाने पर लखा सिधाना ने कहा कि पुलिस ने उन्हें ज्यादा प्रताड़ित नहीं किया, लेकिन हिरासत में रहने के कारण वह मानसिक रूप से परेशान जरूर हुए हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग थानों में रखे जाने के दौरान पिछले कुछ दिनों का समय उनके लिए आसान नहीं रहा।
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई का आरोप
अश्वनी कुमार की दुकान गिराए जाने के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए लखा सिधाना ने कहा कि दुकान को जेसीबी की मदद से गिराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने और इस मुद्दे पर संघर्ष करने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार, नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ने वालों को समर्थन और सुरक्षा देने के बजाय उनके खिलाफ कदम उठाए जा रहे हैं।
पत्रकारों ने उनसे यह भी सवाल किया कि अब पंजाब के मुद्दों को लेकर संघर्ष कौन करेगा और आगे इस लड़ाई को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा। इस पर उन्होंने कहा कि पंजाब गुरुओं की बनाई हुई धरती है और यहां परविंदर जैसे झोटे हमेशा पैदा होते रहेंगे। उनका कहना था कि पंजाब में अन्याय और गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की कमी नहीं होगी।
अमृतपाल सिंह और जेलों में बंद सिखों की रिहाई का मुद्दा उठाया
लखा सिधाना ने कहा कि सरकारें लंबे समय से सच बोलने वाले लोगों की आवाज दबाने का प्रयास करती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि वे लंबे समय से जेलों में बंद सिखों और अमृतपाल सिंह की रिहाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके मुताबिक, पंजाब के विभिन्न मुद्दों पर आवाज उठाने और अपने विचार रखने वालों को कई बार अलग-अलग नामों से संबोधित कर दिया जाता है और फिर उन्हें जेल में बंद कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति देश और पंजाब से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखता है तो उसे अलग-अलग तरह के नामों से जोड़कर देखा जाता है। उनके अनुसार, इस तरह की कार्रवाई से असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास होता है। उन्होंने जेलों में बंद सिखों की रिहाई को लेकर जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि यह मुद्दा उनके लिए लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।
गिरफ्तारी पर किसी पर नहीं लगाया आरोप
अपनी गिरफ्तारी के संबंध में पूछे गए सवाल पर लखा सिधाना ने स्पष्ट किया कि वह किसी पर आरोप नहीं लगा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में किसी व्यक्ति या संगठन को जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी हिरासत के अनुभव और मानसिक परेशानी का जिक्र किया, लेकिन गिरफ्तारी को लेकर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया।
लखा सिधाना की रिहाई के समय जेल के बाहर विभिन्न लोगों की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी चर्चा का विषय बना दिया। हालांकि, परविंदर झोटा के मामले में आगे की भूमिका को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की। उन्होंने संकेत दिया कि संबंधित मोर्चे में पहुंचने और पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने के बाद ही वह अपनी अगली भूमिका तय करेंगे।
रिहाई के बाद उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों में नशे के खिलाफ संघर्ष करने वालों पर कथित कार्रवाई, जेलों में बंद सिखों की रिहाई और अमृतपाल सिंह की रिहाई की मांग प्रमुख रही। अब नजर इस बात पर रहेगी कि लखा सिधाना आगे किस तरह इन मुद्दों पर सक्रिय होते हैं और परविंदर झोटा के मामले में चल रहे संघर्ष को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।




