पीपीएससी मुख्य परीक्षा के परिणामों में परीक्षा केंद्रों और कमरों के हिसाब से चयन के आंकड़ों पर उठाए सवाल, 86 अभ्यर्थियों के लगातार क्रम वाले रोल नंबरों पर जताया संदेह; साक्षात्कार रोककर उत्तर पुस्तिकाएं सील करने की मांग
चंडीगढ़। पंजाब में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) की पीसीएस मुख्य परीक्षा के घोषित परिणामों को लेकर भाजपा ने आम आदमी पार्टी सरकार को घेरते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने परीक्षा परिणामों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच करवाने की मांग की है। वहीं, पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी परीक्षा केंद्रों और कमरों के आधार पर सामने आए चयन के आंकड़ों को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि पीसीएस जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा के परिणामों में सामने आए आंकड़ों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे उन हजारों युवाओं के मन में संदेह पैदा हो रहा है, जो वर्षों तक मेहनत करके प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सपना देखते हैं। हालांकि, भाजपा नेताओं की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में परीक्षा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए आयोग और सरकार की ओर से तथ्यात्मक जवाब महत्वपूर्ण होगा।
सुनील जाखड़ ने एक्स पर पोस्ट कर सरकार के दावों को घेरा
पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार के उस दावे पर सवाल उठाए, जिसमें बिना रिश्वत और बिना सिफारिश सरकारी नौकरियां देने की बात कही जाती रही है।
जाखड़ ने कहा कि पीसीएस मुख्य परीक्षा के परिणामों में कुछ परीक्षा केंद्रों और विशेष कमरों से असामान्य संख्या में अभ्यर्थियों के चयन का दावा सामने आया है। उनके अनुसार, कुछ परीक्षा कक्षों में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों में से 10 से 11 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है।
उन्होंने रोल नंबरों के क्रम को लेकर भी सवाल उठाए। जाखड़ के मुताबिक, तीन से चार लगातार क्रम वाले रोल नंबरों के समूह में कुल 86 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। उन्होंने पूछा कि क्या रोल नंबर आवंटन की प्रक्रिया में ही इस तरह की व्यवस्था की गई थी और क्या कुछ अभ्यर्थियों को जानबूझकर लगातार क्रम वाले रोल नंबर दिए गए थे?
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जब किसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा में एक ही केंद्र या कुछ चुनिंदा कमरों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का चयन होने की बात सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। उन्होंने मांग की कि सरकार और पीपीएससी इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करें।
331 पदों के लिए हुई परीक्षा, 751 अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट
पीपीएससी ने चार नवंबर को पंजाब राज्य सिविल सेवा संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2025 की मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 331 पदों को भरा जाना है। मुख्य परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर 751 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए अस्थायी रूप से शॉर्टलिस्ट किया गया है।
मुख्य परीक्षा का आयोजन एक से 10 अप्रैल 2026 तक किया गया था। अब चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच 11 से 17 नवंबर तक पटियाला स्थित पंजाब लोक सेवा आयोग के कार्यालय में की जाएगी।
परिणाम घोषित होने के बाद परीक्षा केंद्रों और रोल नंबरों को लेकर उठे सवालों ने भर्ती प्रक्रिया को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। भाजपा का कहना है कि साक्षात्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले इन सवालों का समाधान होना चाहिए, ताकि किसी भी योग्य अभ्यर्थी के साथ अन्याय की आशंका न रहे।
नीट पेपर लीक मामले से की तुलना
सुनील जाखड़ ने पीसीएस परीक्षा के कथित विवाद को नीट पेपर लीक मामले से जोड़ते हुए पंजाब के युवाओं से दोनों मामलों की तुलना करने की बात कही। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा हो रहा है तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
उन्होंने इससे पहले पंजाब में नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा और बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज की फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में सामने आए विवादों का भी उल्लेख किया। जाखड़ के अनुसार, लगातार अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं को लेकर सवाल उठना प्रदेश की चयन व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
नायब तहसीलदार भर्ती में नकल के आरोपों के बाद रद हुई थी परीक्षा
पंजाब में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। 22 मई 2022 को 78 नायब तहसीलदार पदों के लिए आयोजित परीक्षा में बड़े पैमाने पर नकल के आरोप लगे थे। मामले की जांच के दौरान वायरलेस उपकरणों के इस्तेमाल से नकल किए जाने की पुष्टि हुई थी।
इसके बाद परीक्षा रद कर दी गई थी और 18 जून 2023 को दोबारा परीक्षा आयोजित करवाई गई। इस प्रकरण ने उस समय भी प्रदेश की भर्ती व्यवस्था और परीक्षा संचालन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
भाजपा नेताओं ने इसी पुराने मामले का हवाला देते हुए कहा है कि सरकार को मौजूदा विवाद को भी गंभीरता से लेना चाहिए। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता का असर केवल चयनित पदों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
फार्मेसी अफसर भर्ती में भी हाईटेक नकल गिरोह का मामला
बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज की फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा भी विवादों में रही है। 19 जुलाई 2026 को 454 फार्मेसी अफसर पदों के लिए आयोजित परीक्षा में कथित हाईटेक नकल के अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ था।
इस मामले में पुलिस ने सात आरोपितों और 28 अभ्यर्थियों को पकड़ा था। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर कानूनी विवाद भी सामने आया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस भर्ती की आगे की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
जाखड़ ने इन घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब में युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को जवाबदेही दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीसीएस परीक्षा में उठे सवालों की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, ताकि किसी तरह का संदेह बाकी न रहे।
रवनीत बिट्टू ने कमरेवार चयन के आंकड़े रखकर सरकार को घेरा
पीसीएस परिणामों को लेकर भाजपा के हमले में पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए परीक्षा के केंद्रवार और कमरों के आधार पर सामने आए आंकड़ों का हवाला दिया और सरकार की भर्ती नीति पर सवाल उठाए।
बिट्टू ने दावा किया कि सेंटर-7 के कमरा नंबर 8 में परीक्षा देने वाले 24 अभ्यर्थियों में से 11 को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है। यह अनुपात करीब 45.8 प्रतिशत बताया गया है।
इसी तरह उन्होंने सेंटर-11 और सेंटर-4 के कमरों से 10-10 उम्मीदवारों के चयन का दावा किया। उनके अनुसार, इन कमरों में भी चयन का अनुपात लगभग 41.7 प्रतिशत रहा है।
बिट्टू ने कहा कि सिविल सेवा जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा में किसी एक कमरे से इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का सफल होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों की निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए और आयोग को चयन प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
एक केंद्र पर चयन दर 24.21 प्रतिशत, दूसरे केंद्र पर 2.89 प्रतिशत होने का दावा
रवनीत बिट्टू ने अपने बयान में परीक्षा केंद्रों के बीच चयन दर के अंतर को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि सेंटर-8 में कुल शॉर्टलिस्टिंग दर 24.21 प्रतिशत रही, जबकि सेंटर-1 के कमरा नंबर 1 से 7 तक यह दर केवल 2.89 प्रतिशत दर्ज की गई।
उन्होंने सवाल किया कि एक ही परीक्षा में अलग-अलग केंद्रों और कमरों के बीच चयन के अनुपात में इतना बड़ा अंतर कैसे आया। बिट्टू के अनुसार, जब कुछ विशेष कमरों और लगातार क्रम वाले रोल नंबरों से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के चयन की बात सामने आती है तो पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि सरकार मंचों से योग्यता, मेरिट और पारदर्शिता की बात करती है, लेकिन भर्ती के नतीजों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब भी उसे देना चाहिए। मेहनती युवाओं को यह भरोसा मिलना जरूरी है कि उनका चयन केवल उनकी योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर हुआ है।
साक्षात्कार रोकने और उत्तर पुस्तिकाएं सील करने की मांग
रवनीत बिट्टू ने मांग की कि मामले की जांच पूरी होने तक साक्षात्कार की प्रक्रिया रोक दी जाए। उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं को तत्काल सील करने और उनकी निष्पक्ष जांच करवाने की बात कही।
वहीं, सुनील जाखड़ ने पूरे मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच में रोल नंबर आवंटन, परीक्षा केंद्रों का निर्धारण, कमरेवार उपस्थिति, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया के सभी पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि यदि प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और योग्य उम्मीदवारों का भरोसा भी मजबूत होगा। वहीं, यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।
युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल
भाजपा नेताओं ने कहा कि पंजाब के हजारों युवा सरकारी सेवाओं में आने के लिए वर्षों तक तैयारी करते हैं। कई अभ्यर्थी आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कोचिंग और अध्ययन सामग्री पर खर्च करते हैं। ऐसे में किसी भी भर्ती परीक्षा को लेकर संदेह पैदा होना उनके मनोबल को प्रभावित करता है।
पीसीएस परीक्षा प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल है। इसलिए इसके परिणामों की विश्वसनीयता बनाए रखना आयोग और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।
फिलहाल इस मामले में भाजपा की ओर से लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। परीक्षा केंद्रों में चयन का अनुपात अलग-अलग होने के पीछे अभ्यर्थियों की संख्या, उनकी तैयारी और अन्य कारक भी हो सकते हैं। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड और विस्तृत जांच की आवश्यकता होगी।
अब देखना होगा कि भगवंत मान सरकार और पीपीएससी इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि साक्षात्कार की निर्धारित प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाता है या आयोग मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ता है। फिलहाल पीसीएस परिणामों को लेकर उठा विवाद पंजाब में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और युवाओं के भरोसे का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।




