दिल की बीमारी का नया कनेक्शन आया सामने: बड़े ट्रॉमा के बाद बढ़ सकता है कार्डियोवैस्कुलर रिस्क

दिल की बीमारी का नया कनेक्शन आया सामने: बड़े ट्रॉमा के बाद बढ़ सकता है कार्डियोवैस्कुलर रिस्क

जिंदगी में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जिनका असर सिर्फ उस पल तक सीमित नहीं रहता। किसी करीबी की अचानक मौत, गंभीर हादसा, शारीरिक हमला, आग या धमाके जैसी घटना, गंभीर चोट या किसी बड़ी बीमारी का सामना करना व्यक्ति को लंबे समय तक मानसिक रूप से परेशान कर सकता है। ऐसे अनुभव को आमतौर पर ट्रॉमा यानी मानसिक सदमा कहा जाता है। कई बार घटना गुजर जाने के बाद भी डर, बेचैनी, तनाव और दूसरी मानसिक परेशानियां बनी रहती हैं।

अब एक बड़े वैज्ञानिक अध्ययन ने इस ओर ध्यान दिलाया है कि दर्दनाक अनुभव के बाद होने वाली मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को केवल मन से जुड़ी परेशानी समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। इनका संबंध आगे चलकर हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों के जोखिम से भी हो सकता है। रिसर्च में यह समझने की कोशिश की गई कि ट्रॉमा के बाद पैदा होने वाली अलग-अलग मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के खतरे को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं।

2.19 लाख से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण

यह अध्ययन ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ में प्रकाशित हुआ। इसमें 2,19,866 वयस्कों को शामिल किया गया, जिनके जीवन में किसी न किसी तरह की दर्दनाक घटना हुई थी। इतनी बड़ी संख्या में लोगों को शामिल किए जाने के कारण शोधकर्ताओं को ट्रॉमा और उसके बाद सामने आने वाले मानसिक स्वास्थ्य जोखिमों के बीच संबंधों को समझने का व्यापक मौका मिला।

शोध में प्रतिभागियों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का विश्लेषण करते हुए यह देखा गया कि किन मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों का संबंध आगे चलकर हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं से अधिक दिखाई देता है। वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया में मशीन लर्निंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल भी किया। इसका उद्देश्य उन प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य कारकों को पहचानना था, जो कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के जोखिम से सबसे ज्यादा जुड़े नजर आए।

ट्रॉमा सिर्फ एक घटना नहीं, उसका असर भी महत्वपूर्ण

किसी व्यक्ति के साथ कोई भयावह घटना होने के बाद उसका मानसिक प्रभाव अलग-अलग लोगों में अलग हो सकता है। कुछ लोग धीरे-धीरे उस अनुभव से उबर जाते हैं, जबकि कुछ लोगों में लंबे समय तक तनाव, चिंता, डर या दूसरी मानसिक परेशानियां बनी रह सकती हैं।

ट्रॉमा का मतलब केवल किसी एक खास तरह की घटना नहीं है। अध्ययन में ऐसे अनुभवों की व्यापक श्रेणी पर ध्यान दिया गया। इसमें गंभीर दुर्घटना, आग लगना, धमाका, शारीरिक हमला, किसी करीबी व्यक्ति की मौत या आत्महत्या, गंभीर बीमारी और बड़ी चोट जैसी घटनाएं शामिल हो सकती हैं।

ऐसे अनुभवों के बाद व्यक्ति का व्यवहार भी बदल सकता है। नींद प्रभावित हो सकती है, रोजमर्रा के कामों में मन कम लग सकता है और व्यक्ति लगातार तनाव में रह सकता है। कुछ लोग अपने भावनात्मक दर्द से बचने के लिए ऐसी आदतों का सहारा भी ले सकते हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित होती हैं।

मानसिक तनाव और दिल के बीच क्या संबंध हो सकता है?

ट्रॉमा के बाद लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर पर भी असर डाल सकता है। जब व्यक्ति लगातार मानसिक दबाव में रहता है, तो शरीर का तनाव संबंधी सिस्टम सक्रिय बना रह सकता है। इससे हृदय गति, रक्तचाप और शरीर की दूसरी प्रक्रियाओं पर प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि, किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा केवल मानसिक स्थिति से तय नहीं होता। उम्र, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, वजन, शारीरिक गतिविधि, खान-पान और पारिवारिक इतिहास जैसे कई दूसरे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए इस रिसर्च को ट्रॉमा के बाद होने वाली मानसिक परेशानियों और हृदय संबंधी जोखिम के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध के रूप में देखना चाहिए, न कि हर व्यक्ति के लिए निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर।

शराब का ज्यादा सेवन सबसे महत्वपूर्ण जोखिमों में सामने आया

अध्ययन से जुड़ी एक खास बात अत्यधिक शराब सेवन को लेकर सामने आई। शोधकर्ताओं ने पाया कि ट्रॉमा के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े जिन कारकों का अध्ययन किया गया, उनमें शराब का अत्यधिक सेवन कार्डियोवैस्कुलर जोखिम से प्रमुख रूप से जुड़ा हुआ दिखाई दिया।

किसी बड़े सदमे के बाद कुछ लोग अपने तनाव, दुख या बेचैनी से राहत पाने के लिए शराब का सहारा लेने लगते हैं। शुरुआत में उन्हें लग सकता है कि इससे तनाव कुछ समय के लिए कम हो रहा है, लेकिन नियमित या अत्यधिक सेवन आगे चलकर कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

शोध से जुड़ी विशेषज्ञ समनर के अनुसार, गंभीर और परेशान करने वाले अनुभवों के बाद लोग अपनी भावनाओं को संभालने के लिए शराब का इस्तेमाल कर सकते हैं। यही व्यवहार बाद में स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए ट्रॉमा के बाद व्यक्ति के व्यवहार में होने वाले ऐसे बदलावों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

शराब और हृदय स्वास्थ्य को लेकर क्यों बरतें सावधानी?

अत्यधिक शराब का सेवन शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक ज्यादा शराब लेने की आदत रक्तचाप बढ़ने, हृदय की धड़कन में गड़बड़ी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। इसके अलावा शराब का इस्तेमाल तनाव से निपटने के मुख्य साधन के रूप में करने से समस्या का मूल कारण दूर नहीं होता।

अगर किसी व्यक्ति ने कोई बड़ा सदमा झेला है और उसके बाद वह पहले की तुलना में ज्यादा शराब पीने लगा है, तो इसे एक चेतावनी संकेत माना जा सकता है। ऐसे समय में व्यक्ति को आलोचना या शर्मिंदा करने के बजाय उसकी समस्या समझना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

मशीन लर्निंग ने खोजे 15 प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य कारक

इस अध्ययन की एक खास विशेषता इसका डेटा विश्लेषण करने का तरीका भी था। वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग तकनीक की मदद से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े 15 महत्वपूर्ण कारकों की पहचान करने की कोशिश की, जिनका कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से संबंध देखा गया।

मशीन लर्निंग बड़े स्तर पर उपलब्ध स्वास्थ्य डेटा में पैटर्न खोजने में मदद कर सकती है। इससे शोधकर्ताओं को यह समझने में सहायता मिलती है कि कई संभावित कारकों में से कौन-से कारक बीमारी के जोखिम से ज्यादा जुड़े हुए दिखाई देते हैं।

हालांकि, ऐसे विश्लेषण से किसी एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति को सीधे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए आगे भी शोध की जरूरत रहती है, खासकर यह समझने के लिए कि ट्रॉमा, मानसिक स्वास्थ्य, जीवनशैली और हृदय रोग के बीच कारण और प्रभाव का संबंध कितना मजबूत है।

सदमे के बाद किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?

किसी बड़े हादसे या दुखद घटना के बाद कुछ समय तक परेशान महसूस करना असामान्य नहीं है। लेकिन अगर व्यक्ति लंबे समय तक बेहद तनाव में रहे, लगातार डर या चिंता महसूस करे, नींद खराब हो जाए, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें या वह शराब जैसी चीजों पर निर्भर होने लगे, तो मदद लेना समझदारी हो सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य की परेशानी को छिपाने के बजाय परिवार के किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना पहला कदम हो सकता है। जरूरत महसूस होने पर मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक से सलाह ली जा सकती है। समय रहते मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने से व्यक्ति को अपने अनुभव से बेहतर तरीके से उबरने और नुकसानदेह आदतों से बचने में मदद मिल सकती है।

दिल की सेहत के लिए बाकी जोखिमों पर भी रखें नजर

ट्रॉमा के बाद मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है, लेकिन हृदय रोग से बचाव के लिए बाकी जोखिम कारकों को नियंत्रित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच, डायबिटीज का नियंत्रण, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से दूरी दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है।

अगर किसी व्यक्ति में पहले से हृदय रोग के जोखिम मौजूद हैं और उसके साथ मानसिक तनाव या शराब का सेवन भी बढ़ गया है, तो उसे अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। किसी भी नए या गंभीर स्वास्थ्य लक्षण को केवल तनाव मानकर टालना उचित नहीं है।

रिसर्च का बड़ा संदेश क्या है?

इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि किसी बड़े सदमे के बाद मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ट्रॉमा का असर केवल भावनाओं और व्यवहार तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि उससे जुड़े मानसिक स्वास्थ्य बदलाव और अस्वास्थ्यकर आदतें लंबे समय में शरीर के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती हैं।

इसलिए किसी दर्दनाक घटना के बाद व्यक्ति के ठीक होने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि वह घटना के बारे में बात करना बंद कर दे। उसकी नींद, तनाव, व्यवहार, शराब जैसी आदतों और सामान्य स्वास्थ्य पर भी नजर रखना जरूरी है।

अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह सदमे से बाहर नहीं निकल पा रहा है, तो मदद मांगना कमजोरी नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से समय पर बातचीत करना और साथ ही हृदय स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों पर ध्यान देना भविष्य में गंभीर परेशानियों की संभावना कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।