धान भीगने पर सीएम सैनी सख्त, मतलौडा मंडी की खामियों पर अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी

धान भीगने पर सीएम सैनी सख्त, मतलौडा मंडी की खामियों पर अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी

स्वीडन से डीसी को फोन कर लिया हालात का जायजा, निरीक्षण में सीवरेज और जनरेटर व्यवस्था मिली खराब; नाले में बच्चे के गिरने के मामले में ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी

पानीपत। हरियाणा में बारिश के कारण अनाज मंडियों में धान भीगने की घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सख्त रुख अपनाया है। स्वीडन दौरे पर होने के बावजूद मुख्यमंत्री ने मतलौडा अनाज मंडी के हालात की जानकारी लेने के लिए जिला उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ को फोन किया। उन्होंने मंडी में बारिश से प्रभावित धान और किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए किए गए इंतजामों के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री के संज्ञान लेने के बाद शुक्रवार को उपायुक्त स्वयं मतलौडा अनाज मंडी पहुंचे और वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान मंडी में कई खामियां सामने आईं। सीवरेज व्यवस्था दुरुस्त नहीं मिली, जबकि बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में इस्तेमाल होने वाला जनरेटर भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की तैयारी शुरू कर दी है। मंडी सचिव और मार्केट कमेटी के कार्यकारी अभियंता के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन का कहना है कि मंडियों में किसानों की फसल की सुरक्षा और खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। यदि व्यवस्थाओं में लापरवाही सामने आती है, तो केवल अधिकारियों ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार ठेकेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

बारिश से 1509 और पीआर धान प्रभावित

वीरवार को हुई बारिश से मतलौडा अनाज मंडी में बिक्री के लिए लाई गई धान की 1509 और पीआर किस्में प्रभावित हुईं। मंडी परिसर में खुले में रखी फसल पर बारिश का पानी पड़ने से किसानों और खरीद व्यवस्था से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई। सड़क पर रखी धान की आठ से दस ढेरियों को अधिक नुकसान होने की आशंका जताई गई है। कुछ धान पानी के साथ बहकर बिखर भी गई, जिससे फसल को सुरक्षित रखने के इंतजामों पर सवाल खड़े हुए हैं।

बारिश की चपेट में खुले में रखे सरकारी खरीद के करीब 30 से 40 हजार कट्टे भी आए। ऐसे में धान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त ढकाव, जल निकासी और उचित भंडारण व्यवस्था की जरूरत एक बार फिर सामने आई है। मंडियों में खरीद के दौरान खुले में रखी फसल को मौसम की मार से बचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

बारिश के बाद मंडी में व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए उपायुक्त ने अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि मंडी परिसर में पानी जमा न हो और धान को दोबारा नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। सीवरेज व्यवस्था में खामी और जनरेटर के सही तरीके से काम नहीं करने को भी गंभीरता से लिया गया।

मंडी सचिव और एक्सईएन पर कार्रवाई की तैयारी

मतलौडा अनाज मंडी में निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों के बाद मंडी सचिव और मार्केट कमेटी के कार्यकारी अभियंता की भूमिका जांच के दायरे में आ सकती है। प्रशासन यह देखेगा कि मंडी में जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त रखने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे और बारिश के दौरान फसल को सुरक्षित रखने में कहां चूक हुई।

उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने स्पष्ट किया कि किसानों की फसल को नुकसान से बचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में जिम्मेदारी तय होती है, तो संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री की ओर से विदेश से ही मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। अब मंडी में सामने आई कमियों को दूर करने और फसल की सुरक्षा के लिए व्यवस्थाएं बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। बारिश के दौरान धान को नुकसान से बचाने के लिए जल निकासी, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं का ठीक होना बेहद जरूरी है।

नाले में बच्चे के गिरने के मामले में ठेकेदार पर कार्रवाई

दूसरी ओर, देवी मंदिर से बरसत रोड तक निर्माणाधीन नाले में एक बच्चे के गिरने की घटना के बाद प्रशासन और नगर निगम ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में पहले ही संबंधित जूनियर इंजीनियर को निलंबित किया जा चुका है। अब उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने ठेकेदार देवीराम को ब्लैकलिस्ट करने के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

उपायुक्त ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि निर्माण कार्य नियमों के अनुरूप नहीं किया गया। निर्माणाधीन नाले जैसे सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होना जरूरी है, ताकि राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को किसी तरह का खतरा न हो। बच्चे के नाले में गिरने की घटना ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को उजागर किया है।

प्रशासन ने नाले से सुरक्षा जालियां हटाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं। सुरक्षा जालियां लोगों को खुले निर्माण स्थल में गिरने से बचाने के लिए लगाई जाती हैं। इन्हें हटाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा इंतजामों के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

निर्माण कार्य पूरा कराने के लिए मशीनरी और कर्मचारी तैनात

देवी मंदिर से बरसत रोड तक सड़क, नाले और सीवर से जुड़े निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा कराने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाए गए हैं। इसके तहत पांच जेसीबी, 18 ट्रैक्टर-ट्राली और 35 कर्मचारियों को काम पर लगाया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए और अधूरे काम के कारण आम लोगों को होने वाली परेशानियों को कम किया जा सके।

निर्माणाधीन नाले की घटना के बाद सुरक्षा उपायों को लेकर भी सख्ती बरतने की जरूरत है। निर्माण स्थल पर उचित घेराबंदी, सुरक्षा जालियां और चेतावनी संबंधी इंतजाम होने चाहिए, ताकि लोगों की आवाजाही के दौरान कोई हादसा न हो। प्रशासन की ओर से नाले से सुरक्षा जालियां हटाने वालों पर प्राथमिकी के निर्देश इसी दिशा में उठाया गया कदम हैं।

ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के लिए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता और नियमों के पालन को लेकर जिम्मेदारी तय करने का हिस्सा है। हालांकि, अंतिम कार्रवाई संबंधित प्रक्रिया और जवाब के आधार पर होगी।

लापरवाही पर जवाबदेही तय करने का संदेश

मतलौडा अनाज मंडी में धान भीगने और निर्माणाधीन नाले में बच्चे के गिरने की घटना के बाद प्रशासन के सामने दो अलग-अलग मोर्चों पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की चुनौती है। एक ओर किसानों की फसल को बारिश से बचाने के लिए मंडियों में जल निकासी और अन्य सुविधाएं बेहतर करना जरूरी है, तो दूसरी ओर निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना भी उतना ही अहम है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा मंडी की स्थिति का संज्ञान लेने के बाद अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की तैयारी की जा रही है। वहीं, नाले की घटना में जूनियर इंजीनियर के निलंबन और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के नोटिस के निर्देशों से स्पष्ट है कि प्रशासन निर्माण कार्यों में लापरवाही को गंभीरता से ले रहा है।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि मंडी की व्यवस्थाओं में सामने आई कमियों को कितनी जल्दी दूर किया जाता है और निर्माण कार्यों में सुरक्षा संबंधी खामियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। किसानों की फसल की सुरक्षा और आम लोगों की जान-माल की हिफाजत दोनों ही मामलों में प्रशासन के लिए समय पर कार्रवाई करना अहम होगा।