नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आप ने विपक्ष पर साधा निशाना, धालीवाल ने केंद्र की भूमिका पर भी उठाए सवाल

नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आप ने विपक्ष पर साधा निशाना, धालीवाल ने केंद्र की भूमिका पर भी उठाए सवाल

पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने नशे के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में नशा तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और नशे के नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई जारी है।

धालीवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल छोटे स्तर के तस्करों तक कार्रवाई सीमित रखना नहीं है, बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क को तोड़ना है। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने के लिए सरकार ने पुलिस और प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उनके मुताबिक, इस अभियान में किसी व्यक्ति की राजनीतिक या प्रशासनिक हैसियत को आधार नहीं बनाया जाएगा और जांच में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी।

मजीठिया मामले में आमने-सामने पूछताछ की मांग

अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से समन जारी किए जाने के मुद्दे पर धालीवाल ने कहा कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए जांच एजेंसी को संबंधित लोगों से विस्तृत पूछताछ करनी चाहिए। उन्होंने जगदीश भोला और बिक्रम सिंह मजीठिया से आमने-सामने पूछताछ की जरूरत बताई।

धालीवाल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में पंजाब में नशे का नेटवर्क मजबूत हुआ। उन्होंने कहा कि उस दौर की नशे से जुड़ी घटनाओं और मामलों की जांच के दौरान जिन लोगों के नाम सामने आए, उनकी भूमिका की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को केवल राजनीतिक पहचान के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। यदि जांच में किसी नेता, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई में सरकार किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।

बदले की राजनीति के आरोप पर जवाब

अकाली दल की ओर से सरकार पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई करने के लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए धालीवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या नेता को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पंजाब को नशे की समस्या से बाहर निकालना है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार को राजनीतिक बदला लेना होता तो कार्रवाई पहले ही की जा सकती थी, लेकिन मौजूदा मामलों में जांच की प्रक्रिया के तहत कदम उठाए जा रहे हैं। धालीवाल ने दावा किया कि जांच एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय इसे पंजाब के युवाओं और राज्य के भविष्य से जुड़े मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, सरकार की प्राथमिकता नशे के नेटवर्क को कमजोर करना और तस्करी में शामिल लोगों को कानून के दायरे में लाना है।

बड़े नामों पर भी कार्रवाई का दावा

धालीवाल ने कहा कि नशे के मामलों में कार्रवाई केवल तस्करी करने वाले छोटे आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे कोई राजनीतिक नेता हो या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, यदि जांच में उसकी भूमिका सामने आती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के नेटवर्क ने पंजाब की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है और इस समस्या से निपटने के लिए नेटवर्क के सभी स्तरों तक पहुंचना जरूरी है। धालीवाल ने कहा कि जिन लोगों पर नशे के कारोबार को बढ़ावा देने या उससे जुड़े होने के आरोप हैं, उनके मामलों की जांच पूरी होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई का उद्देश्य यह संदेश देना है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को उसकी राजनीतिक, प्रशासनिक या सामाजिक पहचान के आधार पर संरक्षण नहीं मिलेगा।

विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप

धालीवाल ने नशे के मुद्दे पर विपक्षी दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अकाली दल और भाजपा समेत विपक्षी दल सरकार की नशा विरोधी मुहिम को राजनीतिक मुद्दा बनाने में लगे हैं। उनके मुताबिक, विपक्ष को सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाने के बजाय नशे के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग नशे की समस्या की गंभीरता को अच्छी तरह समझते हैं और वे यह भी देख रहे हैं कि सरकार इस मुद्दे पर किस तरह की कार्रवाई कर रही है। धालीवाल ने दावा किया कि सरकार ने नशे के खिलाफ कार्रवाई को केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता और रोकथाम से जुड़े प्रयास भी किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नशे की समस्या का समाधान केवल गिरफ्तारियों से नहीं होगा। इसके लिए तस्करी के स्रोत, सप्लाई चैन, सीमा पार से होने वाली तस्करी और नशे की मांग को कम करने पर भी एक साथ काम करना जरूरी है।

अमित शाह के पंजाब दौरे पर सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे को लेकर भी धालीवाल ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को पंजाब में नशे के मुद्दे पर राजनीति करने से पहले देश में नशे की सप्लाई से जुड़े बड़े स्रोतों पर जवाब देना चाहिए।

धालीवाल ने आरोप लगाया कि गुजरात के बंदरगाहों के माध्यम से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की खेप देश में पहुंचने के आरोप सामने आते रहे हैं और इनमें से कुछ खेप पंजाब तक पहुंचती हैं। उन्होंने गुजरात के एक निजी बंदरगाह का भी उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से इस पूरे नेटवर्क को लेकर जवाब मांगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को केवल पंजाब सरकार से सवाल करने के बजाय देश में नशीले पदार्थों की आवाजाही रोकने के लिए अपनी जिम्मेदारी भी स्पष्ट करनी चाहिए। उनके मुताबिक, नशे के खिलाफ लड़ाई में राज्य और केंद्र की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र पर सवाल

धालीवाल ने पंजाब की पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब की करीब 532 किलोमीटर लंबी सीमा पाकिस्तान से लगती है। उनके मुताबिक, सीमा सुरक्षा और सीमा पार से होने वाली तस्करी को रोकने में केंद्र सरकार और सीमा सुरक्षा बल की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियार और नशीले पदार्थ पंजाब में पहुंचाए जाने की घटनाएं सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं। राज्य सरकार की ओर से केंद्र से एंटी-ड्रोन तकनीक और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

धालीवाल ने कहा कि सीमा पार से आने वाले ड्रोन को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने केंद्र सरकार से पंजाब की सीमा पर निगरानी के लिए राज्य सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने की मांग की।

नशे की सप्लाई चेन तोड़ने पर जोर

आप नेता ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिये से नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे एक संगठित सप्लाई चेन काम करती है, जिसमें सीमा पार से तस्करी, अंतरराज्यीय नेटवर्क और स्थानीय स्तर पर वितरण शामिल हो सकता है। इसलिए कार्रवाई भी नेटवर्क के विभिन्न स्तरों पर एक साथ करनी होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि तस्करों के साथ-साथ उनके नेटवर्क और आर्थिक स्रोतों पर भी शिकंजा कसा जाए। नशे से होने वाली आय को रोकना और तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नेटवर्क को खत्म करना अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

धालीवाल ने कहा कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ अभियान को आगे भी जारी रखेगी। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई और तेज की जाएगी।

राजनीतिक आरोपों के बीच नशा बना बड़ा चुनावी मुद्दा

पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नशे का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। सत्तारूढ़ आप जहां सरकार की कार्रवाई को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बता रही है, वहीं विपक्षी दल सरकार की नीतियों और कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

इसी राजनीतिक माहौल के बीच धालीवाल का बयान आप की ओर से नशे के मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने एक तरफ राज्य सरकार की कार्रवाई का बचाव किया, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार और विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल खड़े किए।

धालीवाल ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं बल्कि पूरे पंजाब की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, राज्य सरकार अपनी ओर से कार्रवाई कर रही है, लेकिन सीमा पार तस्करी रोकने और अंतरराज्यीय नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केंद्र की एजेंसियों का सहयोग भी आवश्यक है।

उन्होंने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य नशे के कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क को कानून के दायरे में लाना है। चाहे आरोपी किसी राजनीतिक दल से जुड़ा हो, प्रशासनिक पद पर रहा हो या किसी अन्य प्रभावशाली वर्ग से संबंध रखता हो, जांच में भूमिका सामने आने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने केंद्र से सीमा सुरक्षा और नशे की अंतरराज्यीय सप्लाई को रोकने में पंजाब को अधिक सहयोग देने की मांग की।