‘नशे के खिलाफ लड़ाई आंकड़ों से नहीं, सप्लाई चेन तोड़कर जीती जाएगी’: तरुण चुघ

‘नशे के खिलाफ लड़ाई आंकड़ों से नहीं, सप्लाई चेन तोड़कर जीती जाएगी’: तरुण चुघ

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से 17 सितंबर को पठानकोट से शुरू की गई ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के जरिए पार्टी ने प्रदेश में नशे के कारोबार और उससे जुड़े अपराध को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की। 13 दिन तक प्रदेश के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरने के बाद यात्रा का समापन जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की महारैली के साथ हुआ। इस दौरान शाह ने घोषणा की कि पंजाब में भाजपा की सरकार बनने पर 31 दिसंबर 2029 तक प्रदेश को नशामुक्त किया जाएगा।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इस समय सीमा को विपक्ष द्वारा ‘जुमला’ बताए जाने पर पलटवार करते हुए कहा कि तारीख तय करके भाजपा ने अपनी जवाबदेही खुद तय की है। उन्होंने कहा कि जुमला वह होता है जिसकी कोई समय सीमा नहीं होती। उनके अनुसार भाजपा ने नशे के खिलाफ लड़ाई के लिए लक्ष्य और समय दोनों स्पष्ट कर दिए हैं।

चुघ ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने भी 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब को नशामुक्त करने का वादा किया था, लेकिन साढ़े चार साल बाद भी प्रदेश में नशे की समस्या खत्म नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आज भी अनेक परिवार नशे के कारण अपने बच्चों को खो रहे हैं और सरकार को यह बताना चाहिए कि चुनाव के समय किए गए वादे का क्या हुआ।

नशे पर भाजपा ने बनाया बड़ा राजनीतिक मुद्दा

भाजपा की यात्रा को पार्टी की ओर से प्रदेश में नशे के खिलाफ अभियान के रूप में पेश किया गया। पठानकोट से शुरू हुई यात्रा राज्य के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी और इसमें कई केंद्रीय मंत्रियों तथा भाजपा नेताओं ने हिस्सा लिया। पार्टी नेताओं ने इस दौरान नशे के कारण प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और नशे के कारोबार के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की।

चुघ के मुताबिक, यात्रा के दौरान भाजपा नेताओं को केवल राजनीतिक समर्थन ही नहीं मिला, बल्कि नशे से प्रभावित परिवारों का दर्द भी सामने आया। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर ऐसे परिवार मिले जिन्होंने नशे के कारण अपने बेटे या परिवार के किसी सदस्य को खो दिया।

उन्होंने कहा कि पंजाब की माताओं की पीड़ा को केवल राजनीतिक आंकड़ों में नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार यात्रा के दौरान कई जगहों पर माताएं अपने बेटों की तस्वीरें लेकर सरकार से जवाब मांगती नजर आईं। यही स्थिति भाजपा के लिए नशे के मुद्दे को और गंभीर बनाती है।

गुजरात में ड्रग्स पकड़े जाने पर आप के सवाल का जवाब

आम आदमी पार्टी की ओर से भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा गया कि जिस दिन पंजाब में यात्रा निकाली गई, उसी दिन गुजरात में तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की ड्रग्स पकड़ी गई। आप ने सवाल उठाया कि भाजपा को नशामुक्ति अभियान पंजाब की बजाय गुजरात से शुरू करना चाहिए था।

इस पर चुघ ने कहा कि ड्रग्स की बड़ी खेप पकड़ा जाना किसी राज्य की विफलता नहीं, बल्कि कार्रवाई की सफलता है। उनका कहना था कि यदि किसी राज्य की एजेंसियां ड्रग्स पकड़ रही हैं तो इसका मतलब है कि खुफिया तंत्र और पुलिस कार्रवाई कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं होना चाहिए कि किसी राज्य में ड्रग्स पकड़ी गई, बल्कि यह होना चाहिए कि नशे की खेप को बाजार तक पहुंचने से पहले कैसे रोका जा रहा है। उनके अनुसार गुजरात में कार्रवाई होने को पंजाब सरकार अपनी सफाई के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर सकती।

‘77 हजार गिरफ्तारियां, फिर भी नशा क्यों नहीं रुका’

पंजाब सरकार ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान के तहत 77 हजार से अधिक नशा तस्करों की गिरफ्तारी का दावा कर रही है। चुघ ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं तो प्रदेश में नशे से जुड़ी मौतों और तस्करी की खबरें लगातार क्यों सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को केवल गिरफ्तारियों की संख्या बताने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि नशे के बड़े सरगनाओं के खिलाफ कितनी कार्रवाई हुई। उनके अनुसार छोटी मछलियों को पकड़ने से नशे का नेटवर्क खत्म नहीं होगा, बल्कि उस पूरी सप्लाई चेन को तोड़ना होगा जिसके जरिए नशीले पदार्थ पंजाब के गांवों और शहरों तक पहुंच रहे हैं।

चुघ ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल आंकड़ों की प्रतियोगिता नहीं बनाया जाना चाहिए। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि तस्करी के नेटवर्क को आर्थिक और कानूनी दोनों स्तरों पर किस तरह खत्म किया जा रहा है।

पीआइटी-एनडीपीएस कानून को बताया प्रभावी हथियार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जालंधर की रैली में पीआइटी-एनडीपीएस कानून का उल्लेख किए जाने को लेकर भी चुघ ने विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि नशे के बड़े तस्करों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए यह कानून महत्वपूर्ण है।

उनके अनुसार इस कानून का उद्देश्य ऐसे बड़े नशा तस्करों पर कार्रवाई करना है जो कानूनी प्रक्रिया का फायदा उठाकर बाहर आने के बाद फिर से नशे के कारोबार में शामिल हो जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने राज्यों को नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए मजबूत कानूनी हथियार दिया है, लेकिन पंजाब सरकार ने इसका पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किया।

चुघ ने कहा कि किसी भी कानून की प्रभावशीलता केवल उसके प्रावधानों में नहीं, बल्कि सरकार की इच्छाशक्ति और उसके इस्तेमाल में होती है। यदि सरकार के पास कानूनी अधिकार मौजूद हैं और फिर भी उनका इस्तेमाल नहीं किया जाता तो सवाल क्षमता से अधिक राजनीतिक इच्छाशक्ति पर उठता है।

यात्रा के विरोध को लेकर भी आप पर हमला

यात्रा के दौरान कई स्थानों पर भाजपा नेताओं के विरोध और प्रदर्शन को लेकर भी विवाद हुआ। आप की ओर से इसे पंजाब में भाजपा के प्रति लोगों की नाराजगी का परिणाम बताया गया। इसके जवाब में चुघ ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर राजनीतिक दल और नागरिक का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति काले झंडे दिखाए या नारे लगाए तो भाजपा को उससे आपत्ति नहीं है, लेकिन पत्थर फेंकना, अंडे मारना, काफिलों पर हमला करना या नेताओं के साथ बदसलूकी करना लोकतांत्रिक विरोध नहीं है।

चुघ ने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ निकली यात्रा को रोकने की कोशिशों से यह सवाल उठता है कि आखिर नशे के खिलाफ अभियान से किसे परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता ऐसे विरोध से डरने वाला नहीं है और यही कारण है कि यात्रा पठानकोट से शुरू होकर पूरे प्रदेश में गई और जालंधर में समाप्त हुई।

सीमा पार से तस्करी और पंजाब के भीतर का नेटवर्क

सीमावर्ती जिले अमृतसर से जुड़े होने के कारण सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से नशे और हथियारों की तस्करी के सवाल पर चुघ ने कहा कि सीमा सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार लगातार तकनीक और एंटी-ड्रोन सिस्टम को मजबूत कर रही है।

उन्होंने कहा कि सीमा पार से नशीला पदार्थ पंजाब में पहुंचना एक चुनौती है, लेकिन इसके बाद उसे गांवों और शहरों में पहुंचाने वाला नेटवर्क राज्य के भीतर काम करता है। इस नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करना राज्य पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

चुघ ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में नशे के साथ-साथ गैंगस्टर गतिविधियों और आपराधिक नेटवर्क की चुनौती भी गंभीर है। उन्होंने अमृतसर में पुलिसकर्मियों पर होने वाले हमलों और सीमा पार से अपराधियों को मिल रहे निर्देशों को लेकर भी चिंता जताई।

थानों और पुलिस सुरक्षा पर उठाए सवाल

पंजाब में पुलिस थानों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों को लेकर चुघ ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस स्थान को आम आदमी सुरक्षा का प्रतीक मानता है, यदि वही थाना असुरक्षित हो जाए तो यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में पुलिस थानों, भाजपा कार्यालय और पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। उनके अनुसार अपराधियों में कानून का डर पैदा करना जरूरी है।

चुघ ने कहा कि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के वीआइपी सुरक्षा में तैनात होने से सामान्य पुलिसिंग प्रभावित होती है। उनका कहना था कि पुलिस को पर्याप्त संसाधन, स्पष्ट जवाबदेही और स्वतंत्रता मिलेगी तभी अपराध और नशे के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी।

नशे को उद्योग और रोजगार से जोड़ा

चुघ ने नशे की समस्या को केवल स्वास्थ्य या कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानने से इनकार करते हुए इसे पंजाब की अर्थव्यवस्था और रोजगार से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि नशा बढ़ता है तो अपराध बढ़ता है, अपराध बढ़ने से निवेश का माहौल खराब होता है और निवेश नहीं आएगा तो रोजगार के अवसर कम होंगे।

उनके अनुसार रोजगार के अवसर कम होने पर पंजाब के युवाओं का विदेश जाने का दबाव बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जहां विदेश जाना मजबूरी नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पसंद हो।

उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में उद्योग, कौशल विकास, रोजगार और निवेश को बढ़ावा देने की बात कर रही है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले सुरक्षित माहौल जरूरी है। जिस राज्य में कारोबारी फिरौती और हिंसा को लेकर चिंतित हों, वहां बड़े निवेश की उम्मीद करना कठिन है।

किसान, उद्योग और वित्तीय स्थिति भी एजेंडे में

इस सवाल पर कि यदि भाजपा नशे को चुनावी मुद्दा बनाती है तो क्या किसान, उद्योग, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे दूसरे मुद्दे पीछे चले जाएंगे, चुघ ने कहा कि नशे का मुद्दा बाकी समस्याओं से अलग नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा किसानों की समस्याओं, पंजाब की वित्तीय स्थिति, युवाओं के रोजगार और औद्योगिक विकास को भी अपने एजेंडे में रखेगी। उनका दावा है कि पंजाब को औद्योगिक क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में वापस लाने के लिए सरकार निवेश और रोजगार पर विशेष ध्यान देगी।

उनके मुताबिक इन सभी लक्ष्यों की पहली शर्त सुरक्षित और नशामुक्त पंजाब है। यदि नशे के कारोबार और उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क पर रोक लगती है तो उद्योग, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है।

‘यात्रा ने आंकड़े नहीं, परिवारों का दर्द दिखाया’

13 दिन तक 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरने वाली यात्रा के अनुभव के बारे में चुघ ने कहा कि भाजपा को इस दौरान पंजाब की वास्तविक तस्वीर देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं ने ऐसे परिवारों से मुलाकात की जिनके सदस्य नशे की वजह से प्रभावित हुए।

चुघ ने कहा कि पंजाब के किसानों ने देश के अन्न भंडार भरने में योगदान दिया और पंजाब के जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा में बलिदान दिया है। ऐसे राज्य में नशे के कारण परिवारों का टूटना बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि यात्रा केवल भाजपा का राजनीतिक कार्यक्रम बनकर नहीं रही, बल्कि नशे से प्रभावित परिवारों की आवाज को सामने लाने का माध्यम बनी। उनके अनुसार पंजाब में नशे के खिलाफ सामाजिक आंदोलन को राजनीतिक प्रयासों के साथ जोड़ने की जरूरत है।

भाजपा के लिए 2027 में बड़ी परीक्षा

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच टकराव का बड़ा कारण बनता जा रहा है। भाजपा जहां इसे सरकार की कथित विफलता के रूप में पेश कर रही है, वहीं आम आदमी पार्टी अपनी कार्रवाई और गिरफ्तारियों के आंकड़ों के जरिए जवाब दे रही है।

ऐसे में चुनाव तक नशे के खिलाफ कार्रवाई, तस्करी के नेटवर्क, पुलिस व्यवस्था और नशे से होने वाली मौतें प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने रहने की संभावना है। भाजपा का दावा है कि सत्ता में आने पर वह निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजाब को नशामुक्त करेगी।

चुघ ने पंजाब की जनता से भाजपा को मौका देने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी का लक्ष्य ऐसा पंजाब बनाना है जहां नशे का कारोबार पूरी तरह खत्म हो, पुलिसकर्मी बिना डर के काम करें और युवा नशे या अपराध से नहीं बल्कि अपनी उपलब्धियों से पहचाने जाएं।

उनके अनुसार पंजाब की पहचान उसकी समस्याओं से नहीं बल्कि उसकी कृषि, उद्योग, युवाओं, सैनिकों और उपलब्धियों से होनी चाहिए। भाजपा अब इसी संदेश को लेकर 2027 के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।