हरपाल चीमा का अकाली-भाजपा और कांग्रेस पर हमला, बोले- पिछली सरकारों ने पंजाब को नशे और गैंगस्टरवाद की आग में झोंका

हरपाल चीमा का अकाली-भाजपा और कांग्रेस पर हमला, बोले- पिछली सरकारों ने पंजाब को नशे और गैंगस्टरवाद की आग में झोंका

ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मान सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया, 68,545 मामले दर्ज और करीब 90 हजार आरोपी गिरफ्तार करने का दावा

भाजपा शासित राज्यों में नशे के बढ़ते इस्तेमाल पर उठाए सवाल, गुजरात को बताया देश में नशे की सप्लाई का बड़ा माध्यम

चंडीगढ़। पंजाब में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक टकराव का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस को घेरते हुए पिछली सरकारों को पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद की समस्या बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। आप के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भगवंत मान सरकार की ओर से नशा तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा पेश किया। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से नशे के नेटवर्क और गैंगस्टरों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया है और इसमें कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

चीमा ने अकाली दल-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन पार्टियों के शासनकाल में पंजाब को नशे की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच अकाली दल और भाजपा की सरकार के दौरान राज्य में सफेद नशे, अन्य मादक पदार्थों और गैंगस्टरवाद का विस्तार हुआ। इसके बाद वर्ष 2017 में कांग्रेस ने नशे के खिलाफ कार्रवाई करने के वादे के साथ सत्ता संभाली, लेकिन अपने पांच साल के कार्यकाल में वह भी इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं कर सकी।

अकाली-भाजपा और कांग्रेस के शासनकाल पर उठाए सवाल

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि पिछली सरकारों की नीतियों और कथित संरक्षण के कारण यह गंभीर रूप लेती गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से 2017 तक अकाली दल और भाजपा गठबंधन की सरकार रही। इस दौरान राज्य में नशे का कारोबार बढ़ने के साथ आपराधिक गतिविधियों का भी विस्तार हुआ।

उन्होंने कांग्रेस को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि वर्ष 2017 में सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। लेकिन वर्ष 2017 से 2022 तक सरकार चलाने के बावजूद नशे की समस्या पर अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। चीमा के अनुसार, इन दोनों राजनीतिक दलों ने पंजाब को इस स्थिति तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई और अब वही दल नशे के मुद्दे पर मौजूदा सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने के बाद नशे और गैंगस्टरवाद के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दी। सरकार ने केवल घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय पुलिस और प्रवर्तन एजेंसियों को सक्रिय करते हुए संगठित अपराध के नेटवर्क पर प्रहार करने की रणनीति अपनाई।

एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स बनाकर शुरू की कार्रवाई

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि भगवंत मान सरकार ने सत्ता संभालने के बाद एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स का गठन किया था। इसका उद्देश्य राज्य में सक्रिय गैंगस्टरों और संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई करना था। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई और आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारियां की गईं।

चीमा ने दावा किया कि पुलिस ने बड़ी संख्या में अपराधियों को गिरफ्तार करने के साथ अवैध हथियार भी बरामद किए हैं। इसके अलावा विदेशों में छिपकर बैठे उन अपराधियों को वापस लाने की दिशा में भी कार्रवाई की गई, जो कानून से बचने के लिए दूसरे देशों में चले गए थे।

उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि गैंगस्टरों और अपराधियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों के दौरान 2,105 घोषित भगोड़ों (पीओ) को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा विभिन्न अपराधों में शामिल 81,499 लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया गया है। चीमा ने कहा कि ये आंकड़े सरकार की ओर से अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की व्यापकता को दर्शाते हैं।

युद्ध नशेआं विरुद्ध अभियान से तस्करी नेटवर्क पर प्रहार

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार ने नशे की समस्या से निपटने के लिए ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित करने के माध्यम से मादक पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थ भेजने की घटनाओं को देखते हुए तकनीकी निगरानी और सुरक्षा उपायों को मजबूत करना जरूरी था।

चीमा के अनुसार, 31 मार्च 2025 से राज्य में नशे से संबंधित 68,545 मामले दर्ज किए गए हैं और करीब 90 हजार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की रणनीति केवल नशा बेचने वालों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन पूरे नेटवर्क को खत्म करना है, जिनके माध्यम से नशीले पदार्थ पंजाब के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचते हैं।

450 किलो हेरोइन और करोड़ों की ड्रग मनी बरामद करने का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीमा ने नशा विरोधी अभियानों के दौरान बरामद किए गए मादक पदार्थों का विवरण भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन एजेंसियों ने करीब 450 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है। इसके अलावा 23 करोड़ रुपये से अधिक की ड्रग मनी भी बरामद की गई है।

उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान 67 लाख से अधिक नारकोटिक कैप्सूल, करीब 4,200 नशीले इंजेक्शन और 84 किलोग्राम नारकोटिक पाउडर भी जब्त किया गया है। उनके अनुसार, इन पदार्थों का इस्तेमाल नशे के आदी लोगों और विशेष रूप से युवाओं को नशे की गिरफ्त में रखने के लिए किया जाता था।

चीमा ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी यह दिखाती है कि राज्य में नशे का कारोबार कितना व्यापक नेटवर्क बनाकर संचालित किया जा रहा था। सरकार का प्रयास है कि इस नेटवर्क की सप्लाई चेन को तोड़ा जाए, तस्करों के आर्थिक स्रोतों पर चोट की जाए और पंजाब की नई पीढ़ी को नशे से बचाया जाए।

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई का विषय नहीं है, बल्कि यह पंजाब के भविष्य और युवाओं के जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसलिए सरकार इस अभियान को लगातार जारी रखेगी।

भाजपा शासित राज्यों के आंकड़े पेश कर घेरा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरपाल सिंह चीमा ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में नशे के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय अपने शासन वाले राज्यों में नशे की स्थिति का जवाब दे। उन्होंने 25 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पंजाब में नशे के इस्तेमाल में 5.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि कई अन्य राज्यों में इसमें बढ़ोतरी हुई है।

चीमा की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में नशे के इस्तेमाल में 28 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 18 प्रतिशत, हरियाणा में 42 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 51 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े आम आदमी पार्टी सरकार की ओर से तैयार नहीं किए गए, बल्कि भारत सरकार के आंकड़ों पर आधारित हैं।

उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि यदि पार्टी वास्तव में नशे की समस्या को लेकर गंभीर है तो उसे अपने शासन वाले राज्यों में बढ़ते नशे के इस्तेमाल पर भी जवाब देना चाहिए। चीमा ने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर सवाल उठाने से पहले भाजपा को अपने राज्यों की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए।

बिहार के डीजीपी के कथित बयान का भी किया जिक्र

चीमा ने अपने संबोधन में बिहार के पुलिस महानिदेशक कुंदन कृष्णन के कथित बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार के डीजीपी ने दूसरे राज्यों को नशे के खिलाफ पंजाब की ओर से किए जा रहे प्रयासों से सीखने की बात कही थी।

चीमा ने इस बयान को पंजाब सरकार के अभियान के समर्थन के रूप में पेश करते हुए कहा कि राज्य में नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई को दूसरे राज्यों में भी एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की कोशिश है कि नशा तस्करी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और तकनीकी निगरानी को और प्रभावी बनाया जाए।

गुजरात में नशे की सप्लाई को लेकर भाजपा पर निशाना

भाजपा पर हमला जारी रखते हुए चीमा ने गुजरात का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा गुजरात में तीन दशक से अधिक समय से सत्ता में है, इसके बावजूद यह राज्य देश में नशीले पदार्थों की सप्लाई के एक बड़े माध्यम के रूप में सामने आता रहा है।

उन्होंने सवाल किया कि जब भाजपा अपने लंबे शासनकाल के बावजूद गुजरात में नशे की समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित नहीं कर पाई तो उसे पंजाब में इस मुद्दे पर राजनीति करने का नैतिक अधिकार कैसे मिल सकता है।

चीमा ने कहा कि नशे की समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह नशे के खिलाफ ठोस कार्रवाई और समाधान पर चर्चा करने के बजाय पंजाब सरकार को निशाना बनाने में अधिक रुचि दिखा रही है।

युवाओं को नशे से बचाने की लड़ाई जारी रहेगी

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार का लक्ष्य राज्य को नशामुक्त बनाना और आने वाली पीढ़ियों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभाव से बचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा तस्करों, गैंगस्टरों और संगठित अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ उन नेटवर्कों को भी निशाना बनाया जाएगा, जो इस अवैध व्यापार को आर्थिक और आपराधिक संरक्षण देते हैं। सरकार की प्रतिबद्धता है कि नशे की सप्लाई को रोका जाए और युवाओं को इस बुराई से दूर रखा जाए।

कुल मिलाकर, हरपाल सिंह चीमा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नशे का मुद्दा एक बार फिर पंजाब की राजनीति के केंद्र में दिखाई दिया। एक तरफ आप सरकार ने अपनी कार्रवाई और बरामदगी के आंकड़े पेश कर अपनी उपलब्धियां गिनाईं, वहीं दूसरी तरफ अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस को पिछली सरकारों की नीतियों के लिए जिम्मेदार ठहराया। भाजपा शासित राज्यों में नशे के इस्तेमाल से जुड़े आंकड़ों का हवाला देकर चीमा ने राजनीतिक बहस को पंजाब से बाहर दूसरे राज्यों तक भी पहुंचाने की कोशिश की। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा आधार बनने के संकेत दे रहा है।