चीमा ने अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल को बताया पंजाब के लिए काला दौर, अमित शाह और मजीठिया की नजदीकियों पर उठाए सवाल
चंडीगढ़। पंजाब में नशे के मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की ओर से अदालत में दाखिल 40 हजार पन्नों की चार्जशीट में 736.96 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन का विवरण शामिल है। चीमा के अनुसार, जांच में कई कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से हुए लेन-देन सामने आए हैं, जिनके स्रोत और धन के आवागमन को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों में अंतिम जवाबदेही कानूनी प्रक्रिया के जरिए तय होगी।
चीमा ने वर्ष 2007 से 2017 तक के अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल को पंजाब के इतिहास का काला दौर करार देते हुए आरोप लगाया कि इस दौरान नशे की समस्या ने प्रदेश के युवाओं और हजारों परिवारों को बुरी तरह प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग यह जानना चाहते हैं कि उस अवधि में कथित वित्तीय साम्राज्य कैसे खड़ा हुआ और विभिन्न कंपनियों के बीच इतनी बड़ी रकम का लेन-देन किस उद्देश्य से किया गया।
उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाब को दोबारा नशे के संकट की ओर ले जाने वाली किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। चीमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिक्रम सिंह मजीठिया के बीच राजनीतिक नजदीकियों का उल्लेख करते हुए भाजपा से नशा तस्करी के मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग भी की।
चार्जशीट में कई कंपनियों के नेटवर्क का उल्लेख
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के मोहाली स्थित फ्लाइंग स्क्वाड ने 25 जून 2025 को एफआईआर नंबर 22 दर्ज की थी। उनके मुताबिक, यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत दर्ज किया गया। जांच का दायरा 2 मार्च 2007 से 31 मार्च 2017 तक की अवधि से संबंधित है।
चीमा ने दावा किया कि जांच के दौरान विभिन्न कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटाई गई और इस आधार पर पूरक आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया। उन्होंने कहा कि आरोपपत्र में लेन-देन के विवरण के साथ उन कंपनियों की संरचना और उनके बीच धन के कथित हस्तांतरण से संबंधित जानकारियां भी शामिल हैं।
वित्त मंत्री के अनुसार, जांच में जिन संस्थाओं और कारोबारी इकाइयों का उल्लेख किया गया है, उनमें सराया इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, पेरेग्रीन सराया ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, एसडी बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, ए2जेड ट्रांसपोर्ट अथवा पटियाला एक्सप्रेस, एडी एंटरप्राइजेज, हरप्रीत गुलाटी एचयूएफ से संबंधित यूनाइटेड वाइन्स, आकाश एंटरप्राइजेज, यूडब्ल्यू एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, एडी एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड और आकाश स्पिरिट्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन कंपनियों के माध्यम से हुए कथित वित्तीय लेन-देन की जांच में धन के स्रोत, एक संस्था से दूसरी संस्था तक उसके हस्तांतरण और कुछ कारोबारी इकाइयों के बंद होने अथवा अस्तित्व में नहीं रहने जैसे पहलुओं की पड़ताल की गई है।
चीमा ने कहा कि 40 हजार पन्नों के आरोपपत्र में जांच के दौरान सामने आए वित्तीय रिकॉर्ड अदालत के समक्ष रखे गए हैं। अब यह न्यायिक प्रक्रिया का विषय है कि इन लेन-देन के संबंध में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और किन लोगों की जिम्मेदारी निर्धारित होती है।
अकाली-भाजपा शासन पर साधा निशाना
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच पंजाब में नशे की समस्या ने गंभीर रूप धारण किया था। उनके मुताबिक, सिंथेटिक नशे के प्रसार से अनेक परिवार प्रभावित हुए और युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की सरकारें नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क को प्रभावी ढंग से तोड़ने में नाकाम रहीं। चीमा ने कहा कि नशे के कारण प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा और कई माता-पिता अपने बच्चों को इस लत से बाहर निकालने के लिए परेशान रहे।
मजीठिया की तत्कालीन राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय वह पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के रिश्तेदार भी हैं। चीमा ने सवाल उठाया कि जांच के दायरे में आए वित्तीय लेन-देन और कंपनियों के नेटवर्क की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि संबंधित अवधि में इतनी बड़ी रकम का लेन-देन किन परिस्थितियों में हुआ। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आरोपपत्र में दर्ज आरोपों और वित्तीय विवरणों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
कांग्रेस सरकार को भी घेरा
नशे के खिलाफ पिछली सरकारों की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए चीमा ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस की ओर से किए गए वादों का उल्लेख किया। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नशे के खात्मे संबंधी प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए कहा कि वादों के बावजूद पंजाब में नशे की समस्या बनी रही।
चीमा के अनुसार, पिछली सरकारें नशे की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई करने में सफल नहीं हो सकीं। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग अब ऐसे हालात दोबारा नहीं देखना चाहते, जिनमें नशे का कारोबार बढ़ता रहे और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो।
उन्होंने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी व्यापक है। इससे प्रभावित परिवारों को मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ नशे की लत से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
मान सरकार की कार्रवाई का किया उल्लेख
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मार्च 2022 में सरकार बनने के बाद से नशे के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान के तहत अब तक 80 हजार से अधिक गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं।
चीमा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नशे के छोटे कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि आपूर्ति नेटवर्क को तोड़ना और बड़े तस्करों तक पहुंचना भी है। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है और नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों को उचित उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का मकसद पंजाब में नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाना, तस्करी से जुड़े नेटवर्क को कमजोर करना और प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन में लौटने में मदद देना है।
वित्त मंत्री ने दावा किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार इस अभियान को जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे से बचाना और राज्य को दोबारा पुराने संकट की ओर जाने से रोकना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
गुजरात के बंदरगाहों से हेरोइन की बरामदगी पर सवाल
भाजपा पर हमला जारी रखते हुए चीमा ने गुजरात के बंदरगाहों से बड़ी मात्रा में हेरोइन बरामद होने की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसी बरामदगियां देश में नशीले पदार्थों की आपूर्ति के रास्तों और तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने भाजपा से पूछा कि देश में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए उठाए गए कदमों का हिसाब जनता के सामने रखा जाना चाहिए। चीमा ने कहा कि नशे के मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर उन नेटवर्कों पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है, जिनके माध्यम से नशीले पदार्थों की आपूर्ति होती है।
उन्होंने अमित शाह और बिक्रम सिंह मजीठिया का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब पहले ही नशे के कारण भारी नुकसान झेल चुका है। प्रदेश को दोबारा उसी स्थिति में पहुंचने से रोकने के लिए सभी स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
कानूनी प्रक्रिया से तय होगी जवाबदेही
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की ओर से दाखिल आरोपपत्र में जांच के दायरे में आए वित्तीय लेन-देन का विवरण अदालत के समक्ष रखा गया है। उनके मुताबिक, 736.96 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन और विभिन्न कंपनियों के बीच धन के आवागमन से जुड़े सवालों का उत्तर कानूनी प्रक्रिया के दौरान सामने आएगा।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने के साथ-साथ भ्रष्टाचार के मामलों में भी जवाबदेही तय करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार नशे के खिलाफ अभियान को कमजोर नहीं पड़ने देगी।
चीमा ने कहा कि पंजाब के लोगों को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें नशे की तस्करी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, प्रभावित लोगों को उपचार मिले और युवाओं को सुरक्षित भविष्य के अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार नशे के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखेगी।
उन्होंने अंत में कहा कि आरोपपत्र में दर्ज वित्तीय लेन-देन और कंपनियों के नेटवर्क से जुड़े मामलों का अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा। सरकार का लक्ष्य पंजाब को नशे के संकट से बाहर निकालना और प्रदेश के युवाओं के भविष्य की रक्षा करना है।




