पंजाब के सुनाम विधानसभा क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने हलके के 129 सरकारी स्कूलों के 19,886 विद्यार्थियों को स्कूल बैग उपलब्ध कराने की मुहिम शुरू की। अभियान के पहले चरण में 6वीं से 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाली 5,710 छात्राओं को स्कूल बैग वितरित किए गए।
लौंगोवाल स्थित शहीद सरदार भगवान सिंह सरकारी स्मार्ट स्कूल (कन्या) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के अलावा अभिभावक, शिक्षक और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे। अमन अरोड़ा की पत्नी सबीना अरोड़ा भी इस अवसर पर उपस्थित थीं।
अमन अरोड़ा ने बताया कि यह पहल उनके परिवार की ओर से ‘बाबू भगवान दास अरोड़ा फाउंडेशन’ के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल अभियान की शुरुआत छात्राओं से की गई है और आने वाले दिनों में सुनाम हलके के बाकी विद्यार्थियों को भी स्कूल बैग उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाई से संबंधित बुनियादी सुविधाओं के लिए किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उन्होंने कहा कि कई परिवारों के लिए बच्चों की शिक्षा से जुड़े छोटे-छोटे खर्च भी आर्थिक चुनौती बन जाते हैं। ऐसे में स्कूल बैग जैसी आवश्यक वस्तु उपलब्ध करवाने से विद्यार्थियों और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष राहत मिल सकती है। उन्होंने इसे केवल सहायता कार्यक्रम न बताते हुए बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ाने की पहल बताया।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि समाज की जिम्मेदारी केवल बच्चों को स्कूल भेजने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विद्यार्थी नियमित रूप से स्कूल जाएं, उनके पास पढ़ाई के लिए जरूरी सामग्री हो और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा में किसी प्रकार की कमी न आए, इसके लिए समाज के सक्षम वर्ग को भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
अमन अरोड़ा ने कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया। खासतौर पर उन विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया गया जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सुनाम क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
उन्होंने बताया कि सुनाम हलके के 13 विद्यार्थियों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE में सफलता हासिल की है। इनमें आठ छात्राएं शामिल हैं। इन विद्यार्थियों को कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
मंत्री ने कहा कि ऐसे विद्यार्थियों की उपलब्धियां दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनती हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी सरकारी स्कूल का विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त करता है तो यह केवल उस विद्यार्थी या उसके परिवार की उपलब्धि नहीं होती, बल्कि पूरे क्षेत्र और शिक्षा व्यवस्था के लिए गौरव का विषय होता है।
कार्यक्रम में विभिन्न कक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। अपनी कक्षा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र और पदक प्रदान किए गए। इस दौरान विद्यार्थियों को भविष्य में भी मेहनत जारी रखने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया गया।
अमन अरोड़ा ने विशेष रूप से छात्राओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब की बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई मिसाल कायम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल और नॉन-मेडिकल शिक्षा से लेकर रक्षा सेवाओं, प्रशासनिक सेवाओं और अन्य पेशों तक पंजाब की बेटियां अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि बेटियों को आगे बढ़ने के लिए समान अवसर देना समाज की जिम्मेदारी है। यदि छात्राओं को अच्छी शिक्षा, उचित मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन मिलें तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी बेटियों की पढ़ाई को प्राथमिकता देने की अपील की।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ ऐसा वातावरण उपलब्ध कराया जाए, जिसमें वे अपनी प्रतिभा को विकसित कर सकें। उनके अनुसार शिक्षा केवल परीक्षा में अंक हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य को मजबूत बनाने का सबसे महत्वपूर्ण साधन है।
कार्यक्रम के दौरान निजी स्कूलों की फीस से जुड़े सवाल पर भी अमन अरोड़ा ने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार अभिभावकों को निजी स्कूलों की ओर से मनमाने तरीके से फीस बढ़ाए जाने से राहत दिलाने के लिए कानूनी प्रावधानों के तहत कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि निर्धारित नियमों के अनुसार निजी स्कूल फीस में पांच प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी नहीं कर सकते। यदि कोई स्कूल तय सीमा से अधिक फीस वसूलता है तो उसके खिलाफ नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अभिभावकों से निर्धारित सीमा से अधिक राशि ली गई है तो अतिरिक्त वसूली गई रकम वापस करवाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
अमन अरोड़ा ने कहा कि शिक्षा का अत्यधिक व्यावसायीकरण विद्यार्थियों और उनके परिवारों के हित में नहीं है। सरकार का प्रयास है कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव न पड़े। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों को भी नियमों का पालन करते हुए पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के लिए आधारभूत सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों पर ध्यान दे रही है। स्कूलों में बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के साथ विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने में इस तरह के सम्मान और प्रोत्साहन कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मंत्री ने कहा कि आज सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं और प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि यदि विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन और अवसर दिए जाएं तो वे किसी भी क्षेत्र में निजी संस्थानों के विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा शिक्षा तंत्र तैयार करना है जिसमें बच्चे की आर्थिक स्थिति उसकी शिक्षा के रास्ते में बाधा न बने। किसी परिवार के पास संसाधनों की कमी होने के कारण बच्चे की प्रतिभा दबनी नहीं चाहिए। स्कूल बैग वितरण जैसी पहल इसी सोच का हिस्सा है।
अमन अरोड़ा ने कहा कि विद्यार्थी किसी भी स्ट्रीम, विषय या ट्रेड से जुड़े हों, उनका भविष्य समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षा और करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हरसंभव प्रोत्साहन और सहयोग मिलता रहे।
उन्होंने विद्यार्थियों से भी अपील की कि वे उपलब्ध सुविधाओं का सही इस्तेमाल करें और पढ़ाई के साथ अनुशासन, मेहनत और सकारात्मक सोच को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही भविष्य में पंजाब के विकास की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सुनाम क्षेत्र में शुरू किए गए स्कूल बैग वितरण अभियान को इसी व्यापक उद्देश्य से जोड़कर देखा जा रहा है। 129 सरकारी स्कूलों के करीब 20 हजार विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने से बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। पहले चरण में 5,710 छात्राओं को बैग वितरित किए गए हैं, जबकि शेष विद्यार्थियों तक यह सुविधा आने वाले दिनों में पहुंचाने की बात कही गई है।
कार्यक्रम में प्रशासनिक और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। डिप्टी कमिश्नर पूनमदीप कौर, जिला पुलिस प्रमुख डॉ. रवजोत ग्रेवाल और जिला शिक्षा अधिकारी तरविंदर कौर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके अलावा बड़ी संख्या में विद्यार्थी, उनके अभिभावक, शिक्षक और स्थानीय निवासी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। एक ओर जहां छात्राओं को स्कूल बैग प्रदान किए गए, वहीं दूसरी ओर परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। इससे कार्यक्रम का फोकस केवल सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मेहनत और शैक्षणिक उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने पर भी रहा।
अमन अरोड़ा ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध करवाने के साथ उनकी उपलब्धियों को पहचान देना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब किसी विद्यार्थी की मेहनत को सार्वजनिक रूप से सम्मान मिलता है तो इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और अन्य विद्यार्थी भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होते हैं।
सुनाम में शुरू की गई यह पहल सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं और प्रोत्साहन दोनों पर ध्यान देने की कोशिश के रूप में सामने आई है। एक तरफ जरूरतमंद विद्यार्थियों को स्कूल बैग उपलब्ध करवाने की योजना है, तो दूसरी तरफ NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने वाले तथा कक्षा स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया गया है।
कुल मिलाकर अमन अरोड़ा की इस पहल के तहत सुनाम विधानसभा क्षेत्र के 129 सरकारी स्कूलों के 19,886 विद्यार्थियों तक स्कूल बैग पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में 5,710 छात्राओं को बैग दिए जा चुके हैं। सरकार और फाउंडेशन की इस पहल का उद्देश्य बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने के साथ उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और यह संदेश देना है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा और सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।




