कक्कों की सरपंच अनीता रानी के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग, सात पंचों का समर्थन होने के बावजूद जिम्मेदारी नहीं सौंपने का आरोप; 20 अक्टूबर के बाद आंदोलन की चेतावनी
होशियारपुर। लोगों को न्याय दिलाने के लिए अदालतों में पैरवी करने वाले जिला बार एसोसिएशन होशियारपुर के प्रधान एडवोकेट शमशेर भारद्वाज ने अब अपनी पत्नी के मामले में इंसाफ की मांग उठाई है। उनकी पत्नी अनीता रानी गांव कक्कों की सरपंच हैं और अक्टूबर 2024 में 104 वोटों के अंतर से निर्वाचित हुई थीं। शमशेर भारद्वाज ने आरोप लगाया कि राजनीतिक रंजिश के चलते उनकी पत्नी को सरपंच पद से निलंबित करवाया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि निलंबन के बाद नौ में से सात पंचों का समर्थन होने के बावजूद किसी सदस्य को सरपंच की जिम्मेदारी सौंपने संबंधी आदेश पर अमल क्यों नहीं किया जा रहा है।
होशियारपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारद्वाज ने कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह और जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने और पंचायत से जुड़े विवाद का नियमों के अनुसार समाधान करने की मांग की। भारद्वाज ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो दशहरे के बाद आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा।
अकाली दल से जुड़ाव को बताया विवाद की वजह
एडवोकेट शमशेर भारद्वाज ने दावा किया कि उनका परिवार शिरोमणि अकाली दल बादल से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, मंत्री की ओर से उन पर आम आदमी पार्टी में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा करने से इनकार करने के बाद उनकी पत्नी के खिलाफ राजनीतिक रंजिश के तहत कार्रवाई की गई और उन्हें सरपंच पद से निलंबित करवा दिया गया।
भारद्वाज ने कहा कि उनकी पत्नी गांव के लोगों के समर्थन से सरपंच चुनी गई थीं। ऐसे में उनके निलंबन और उसके बाद पंचायत में जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और किसी भी व्यक्ति के साथ राजनीतिक आधार पर भेदभाव न किया जाए।
हालांकि, राजनीतिक दबाव और रंजिश से जुड़े ये आरोप भारद्वाज की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों पर संबंधित मंत्री या प्रशासन का पक्ष सामने आने पर ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पंचायत के आय-व्यय के हिसाब पर भी विवाद
शमशेर भारद्वाज ने पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली पंचायत के कार्यकाल में पानी के बिलों के माध्यम से हर महीने करीब 50 हजार रुपये एकत्र किए जाते थे। उनके मुताबिक, नई पंचायत बनने के बाद जब आय और व्यय का पूरा हिसाब मांगा गया, तो संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
भारद्वाज का दावा है कि रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाने के बाद शिकायतों का सिलसिला शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि पंचायत के वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता होनी चाहिए और आय-व्यय से संबंधित दस्तावेज नियमानुसार उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि किसी भी तरह की आशंका दूर हो सके।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड से संबंधित शिकायतों की भी जांच कराई जाए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार, पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों का सम्मान जरूरी है।
सात पंचों का समर्थन होने के बावजूद जिम्मेदारी नहीं
भारद्वाज ने पंचायत की संरचना का हवाला देते हुए कहा कि कुल नौ पंचों में से सात उनके पक्ष में हैं। उनका दावा है कि सरपंच के निलंबित होने की स्थिति में नियमानुसार समर्थन प्राप्त पंच को जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि जब सात पंच समर्थन कर रहे हैं, तो किसी सदस्य को चार्ज देने संबंधी आदेश पर अमल क्यों नहीं हुआ। उनके मुताबिक, इस स्थिति के कारण पंचायत के कामकाज और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर असमंजस बना हुआ है।
भारद्वाज ने मांग की कि संबंधित नियमों और आदेशों की समीक्षा कर यह स्पष्ट किया जाए कि सरपंच के निलंबन के बाद पंचायत की जिम्मेदारी किसे सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस मामले में नियमों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए, ताकि पंचायत का कामकाज प्रभावित न हो।
इस विवाद में पंचों के समर्थन और जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर प्रशासन की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
मंत्री और बीडीपीओ कार्यालय पर लगाए आरोप
पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारद्वाज ने कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह पर कथित राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन दबाव में काम कर रहा है और मामले में निष्पक्ष निर्णय नहीं लिया जा रहा। उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे घटनाक्रम की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की।
इसके अलावा, उन्होंने बीडीपीओ कार्यालय के एक कर्मचारी पर पंचायतों के बिल पास करने के बदले कथित तौर पर प्रतिशत मांगने का आरोप भी लगाया। भारद्वाज ने कहा कि यदि इस तरह की शिकायतें हैं तो उनकी जांच की जानी चाहिए और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कर्मचारी, मंत्री और प्रशासन का पक्ष सामने आने पर ही इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल भारद्वाज ने इन मुद्दों को उठाते हुए पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।
सरपंच के निलंबन के खिलाफ अपील
शमशेर भारद्वाज ने बताया कि उनकी पत्नी अनीता रानी के निलंबन के खिलाफ अपील की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत जो फैसला आएगा, उसका पालन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि अपील और पंचायत की जिम्मेदारी सौंपने से जुड़े पहलुओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
उनका कहना है कि मामला केवल एक पद से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसमें पंचायत के कामकाज, निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों और प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्षता से जुड़े सवाल भी हैं। इसलिए संबंधित अधिकारियों को तथ्यों और नियमों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
भारद्वाज ने दोहराया कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं, लेकिन यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
20 अक्टूबर के बाद बड़े आंदोलन की चेतावनी
इस दौरान शिरोमणि अकाली दल बादल के जिला प्रधान संजीव तलवाड़, वरिष्ठ अकाली नेता जतिंदर सिंह लाली बाजवा और हलका शामचौरासी से पार्टी प्रभारी संदीप सीकरी भी मौजूद रहे। इन नेताओं ने भी मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो 20 अक्टूबर को दशहरे के बाद बड़े स्तर पर संघर्ष शुरू किया जाएगा।
अकाली नेताओं ने कहा कि आंदोलन के अगले चरण में होशियारपुर-दसूहा मार्ग जाम करने का कदम उठाया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
इस चेतावनी के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। एक ओर भारद्वाज ने सरपंच के निलंबन, पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड और जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर अकाली नेताओं ने आंदोलन की घोषणा कर प्रशासन पर दबाव बढ़ाने का संकेत दिया है।
अब इस मामले में प्रशासन की प्रतिक्रिया, सरपंच के निलंबन के खिलाफ अपील पर होने वाली कार्रवाई और पंचायत की जिम्मेदारी सौंपने संबंधी स्थिति पर नजर रहेगी। यदि विवाद का समाधान समय रहते नहीं होता, तो दशहरे के बाद आंदोलन के कारण क्षेत्र में यातायात और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहेगी।




