भीषण गर्मी में क्यों फूटती है नाक से खून की समस्या? जानिए तुरंत क्या करें और किन बातों से बचें

भीषण गर्मी में क्यों फूटती है नाक से खून की समस्या? जानिए तुरंत क्या करें और किन बातों से बचें

देश के कई राज्यों में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। तेज धूप, लू, अत्यधिक तापमान और शरीर में पानी की कमी का असर केवल सामान्य स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि नाक, त्वचा और श्वसन तंत्र पर भी पड़ सकता है। गर्मियों के मौसम में जिस समस्या की शिकायत सबसे अधिक देखने को मिलती है, उनमें से एक है नकसीर (Nosebleed) यानी नाक से अचानक खून आना।

अधिकांश मामलों में नकसीर गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन यदि समय पर सही प्राथमिक उपचार न किया जाए या यह समस्या बार-बार होने लगे, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों, हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों तथा लंबे समय तक धूप में रहने वाले लोगों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म और शुष्क वातावरण नाक के अंदर मौजूद बेहद पतली रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को प्रभावित करता है। जब नाक के अंदर की सतह अत्यधिक सूख जाती है, तो मामूली दबाव या रगड़ से भी रक्त वाहिकाएं फट सकती हैं और नाक से खून निकलना शुरू हो जाता है।

नकसीर क्या होती है?

नकसीर वह स्थिति है जिसमें नाक के अंदर मौजूद छोटी रक्त वाहिकाओं से रक्तस्राव होने लगता है। अधिकांश मामलों में खून नाक के अगले हिस्से से निकलता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में Anterior Nosebleed कहा जाता है। यह अपेक्षाकृत सामान्य स्थिति होती है और सही प्राथमिक उपचार से अक्सर कुछ ही मिनटों में नियंत्रित हो जाती है।

कुछ दुर्लभ मामलों में नाक के पिछले हिस्से से भी रक्तस्राव हो सकता है, जिसे अधिक गंभीर माना जाता है और इसके लिए तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।

गर्मी में नकसीर क्यों बढ़ जाती है?

गर्मियों के दौरान वातावरण में नमी कम हो जाती है और तापमान काफी अधिक रहता है। लगातार गर्म हवा के संपर्क में रहने से नाक की अंदरूनी परत सूखने लगती है। इस कारण वहां मौजूद छोटी रक्त वाहिकाएं कमजोर हो सकती हैं और हल्के दबाव से भी फट सकती हैं।

यदि व्यक्ति लंबे समय तक धूप में रहता है या पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीता, तो शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की स्थिति बन सकती है, जिससे यह समस्या और बढ़ सकती है।

किन लोगों में अधिक जोखिम रहता है?

हालांकि नकसीर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है। छोटे बच्चों में नाक की रक्त वाहिकाएं अधिक संवेदनशील होती हैं, जबकि बुजुर्गों में उम्र बढ़ने के साथ रक्त वाहिकाएं कमजोर हो सकती हैं।

इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, एलर्जी, बार-बार नाक साफ करने की आदत, धूल या प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों तथा लंबे समय तक तेज धूप में काम करने वालों में भी नकसीर की संभावना अधिक हो सकती है।

शरीर में पानी की कमी का क्या प्रभाव पड़ता है?

पर्याप्त पानी न पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता है। जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो नाक की अंदरूनी सतह भी सूखने लगती है। इससे रक्त वाहिकाएं अधिक संवेदनशील हो जाती हैं और मामूली कारणों से भी उनमें रक्तस्राव हो सकता है।

गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने से इस समस्या के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

नाक से खून आने पर क्या करें, किन गलतियों से बचें और कब डॉक्टर से संपर्क करें

नकसीर आने पर घबराएं नहीं

यदि किसी व्यक्ति की नाक से अचानक खून आने लगे तो सबसे पहले शांत रहें और घबराएं नहीं। अधिकांश मामलों में सही प्राथमिक उपचार अपनाने से कुछ ही मिनटों में रक्तस्राव नियंत्रित किया जा सकता है।

घबराने से रक्तचाप बढ़ सकता है, जिससे कुछ मामलों में रक्तस्राव अधिक समय तक जारी रह सकता है। इसलिए मरीज को आराम से बैठाना सबसे पहला कदम माना जाता है।

सही प्राथमिक उपचार कैसे करें?

नाक से खून आने की स्थिति में व्यक्ति को सीधा बैठाएं और उसका सिर हल्का आगे की ओर झुकाएं। इससे खून गले में जाने से बचता है। इसके बाद नाक के मुलायम हिस्से को अंगूठे और उंगली की सहायता से लगभग 10 से 15 मिनट तक लगातार दबाकर रखें।

इस दौरान व्यक्ति को सामान्य रूप से मुंह से सांस लेने के लिए कहें। यदि कुछ मिनट बाद भी रक्तस्राव जारी रहे, तो आवश्यकतानुसार यही प्रक्रिया दोबारा दोहराई जा सकती है।

ठंडी पट्टी या बर्फ का उपयोग

नाक और माथे पर ठंडी पट्टी या कपड़े में लपेटकर बर्फ रखने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं, जिससे रक्तस्राव कम होने में सहायता मिल सकती है। हालांकि बर्फ को सीधे त्वचा पर लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए।

ठंडी सिकाई केवल सहायक उपाय है और इसे प्राथमिक उपचार के साथ ही अपनाया जाना चाहिए।

शरीर को हाइड्रेट रखना क्यों जरूरी है?

गर्मियों में शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। नियमित रूप से पानी पीना, नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ, सादा ओआरएस घोल (यदि आवश्यकता हो) और अन्य तरल पदार्थों का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।

पर्याप्त तरल पदार्थ लेने से नाक की अंदरूनी सतह भी अपेक्षाकृत नम बनी रहती है, जिससे सूखापन कम हो सकता है।

नकसीर के दौरान कौन-सी गलतियाँ नहीं करनी चाहिए?

नाक से खून आने पर कुछ सामान्य गलतियाँ स्थिति को और गंभीर बना सकती हैं। सबसे बड़ी गलती सिर को पीछे की ओर झुका लेना है। ऐसा करने से खून गले के रास्ते पेट में जा सकता है, जिससे उल्टी, खांसी या सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

इसके अलावा नाक में उंगली डालना, बार-बार जोर से नाक साफ करना, लगातार छींकने का प्रयास करना या तुरंत लेट जाना भी उचित नहीं माना जाता।

बार-बार नकसीर आने के संभावित कारण

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार नकसीर आती है, तो इसके पीछे केवल गर्मी ही नहीं बल्कि अन्य कारण भी हो सकते हैं। इनमें एलर्जी, बार-बार नाक में चोट लगना, संक्रमण, उच्च रक्तचाप, कुछ दवाओं का प्रभाव या अन्य चिकित्सकीय स्थितियां शामिल हो सकती हैं।

ऐसी स्थिति में स्वयं उपचार करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना अधिक सुरक्षित रहता है।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि नाक से खून लगातार 15 से 20 मिनट तक बंद न हो, बार-बार नकसीर आती रहे, खून की मात्रा अधिक हो, व्यक्ति को चक्कर आए, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या सांस लेने में परेशानी होने लगे, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

इसी प्रकार यदि सिर में गंभीर चोट लगने के बाद नाक से खून आने लगे या मरीज रक्त पतला करने वाली दवाएं ले रहा हो, तो भी डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना आवश्यक माना जाता है।

गर्मियों में नकसीर से बचाव के आसान उपाय

गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी पीना, लंबे समय तक तेज धूप से बचना, लू के दौरान बाहर निकलने पर सिर को ढकना, नाक के अंदर अत्यधिक सूखापन महसूस होने पर डॉक्टर की सलाह अनुसार मॉइस्चराइजिंग उपाय अपनाना तथा संतुलित आहार लेना इस समस्या के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है।

घर और कार्यस्थल पर पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना, अत्यधिक गर्म वातावरण से बचना और बच्चों को बार-बार नाक में उंगली डालने से रोकना भी उपयोगी सावधानियों में शामिल है।

गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान

तेज गर्मी केवल नकसीर ही नहीं बल्कि डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकती है। इसलिए मौसम के अनुसार पर्याप्त पानी पीना, हल्के और सूती कपड़े पहनना, पौष्टिक भोजन करना तथा दोपहर की तेज धूप में अनावश्यक रूप से बाहर जाने से बचना स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सही जानकारी, समय पर प्राथमिक उपचार और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने से नकसीर जैसी समस्या का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।