सीमावर्ती पंजाब के लिए केंद्र से बड़ी मांग: नीति आयोग में CM मान ने उठाए सुरक्षा, विकास और विशेष सहायता के मुद्दे

सीमावर्ती पंजाब के लिए केंद्र से बड़ी मांग: नीति आयोग में CM मान ने उठाए सुरक्षा, विकास और विशेष सहायता के मुद्दे

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नीति आयोग की बैठक में राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण और लंबे समय से लंबित मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग की मांग की। उन्होंने कहा कि देश की पश्चिमी सीमा पर स्थित पंजाब को जिन असाधारण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, उन्हें देखते हुए राज्य के लिए विशेष वित्तीय और विकासात्मक सहायता समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पंजाब को विशेष श्रेणी का दर्जा प्रदान किया जाए और सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए एक विशेष पैकेज घोषित किया जाए।

नीति आयोग के समक्ष राज्य का पक्ष रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा का एक मजबूत प्रहरी है। पाकिस्तान के साथ लगती लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण पंजाब को सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद राज्य लगातार राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की विकास संबंधी आकांक्षाएं पूरी तरह से ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप हैं। यदि देश को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है तो पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्यों को मजबूत और समृद्ध बनाना अनिवार्य है।

सीमावर्ती राज्य होने की कीमत चुका रहा पंजाब

मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के साथ पंजाब की लगभग 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। यह सीमा केवल सुरक्षा दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि यहां रहने वाले लाखों लोगों के जीवन को भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। सीमा पार से होने वाली ड्रोन गतिविधियां, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, आतंकवादी गतिविधियों की आशंका तथा सुरक्षा संबंधी अन्य चुनौतियां राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों का सबसे अधिक असर पंजाब के युवाओं और सीमावर्ती गांवों पर पड़ता है। नशे की समस्या, संगठित अपराध और सामाजिक असुरक्षा जैसी परिस्थितियां राज्य के विकास को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित कृषि भूमि पर खेती करने वाले किसानों को भी अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सुरक्षा नियमों और प्रतिबंधों के कारण उनकी खेती और आजीविका प्रभावित होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा से सटे इलाकों के लोगों ने वर्षों से देश की सुरक्षा में अप्रत्यक्ष योगदान दिया है, लेकिन बदले में उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और विकास के अवसर नहीं मिल पाए हैं।

प्राकृतिक आपदाओं ने भी बढ़ाई मुश्किलें

मुख्यमंत्री मान ने बैठक में राज्य को हाल के वर्षों में झेलनी पड़ी प्राकृतिक आपदाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में आई विनाशकारी बाढ़ ने पंजाब के हजारों गांवों और लाखों लोगों को प्रभावित किया। बाढ़ के कारण कृषि, सड़कें, पुल, सार्वजनिक ढांचा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा।

उन्होंने बताया कि 2,300 से अधिक गांव इस आपदा से प्रभावित हुए और राज्य को हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। ऐसी परिस्थितियों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए केंद्र की अतिरिक्त सहायता बेहद आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हाल के सुरक्षा घटनाक्रमों के दौरान पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास के लिए एक अलग और व्यापक नीति की आवश्यकता है।

निवेश और उद्योगों पर पड़ा असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में लंबे समय से बनी अनिश्चितता का प्रभाव आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। कई क्षेत्रों में उद्योगों ने विस्तार नहीं किया, जबकि कुछ उद्योगों ने अन्य राज्यों का रुख कर लिया। निजी निवेशकों के लिए भी सीमावर्ती क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में जहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक और बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है, वहीं सीमा से सटे अनेक गांव और कस्बे अपेक्षाकृत पीछे रह गए हैं। रोजगार के अवसरों की कमी के कारण युवाओं को दूसरे राज्यों या देशों की ओर रुख करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यदि इन क्षेत्रों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराया जाए तो वहां उद्योग, पर्यटन, कृषि आधारित व्यवसाय और अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास संभव होगा।

विशेष श्रेणी का दर्जा देने की मांग

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नीति आयोग के समक्ष यह भी मांग रखी कि पंजाब को विशेष श्रेणी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस प्रकार पहाड़ी राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर को विशेष सहायता व्यवस्था के तहत 90:10 के अनुपात में केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है, उसी प्रकार पंजाब को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य की भौगोलिक और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां उसे विशेष श्रेणी की सहायता का पात्र बनाती हैं। यदि पंजाब को इस प्रकार की वित्तीय सहायता प्राप्त होती है तो राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में और अधिक तेजी से प्रगति कर सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब राष्ट्रीय सुरक्षा का अतिरिक्त बोझ वहन करता है, इसलिए इसके विकास की जिम्मेदारी केवल राज्य सरकार की नहीं बल्कि केंद्र सरकार की भी है।

सीमावर्ती गांवों को पर्याप्त लाभ नहीं

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए शुरू की गई कई योजनाओं का लाभ पंजाब के सभी पात्र गांवों तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल में शुरू किए गए सीमावर्ती गांवों के विकास कार्यक्रम के तहत पंजाब के केवल सीमित संख्या में गांवों को शामिल किया गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि सीमा से सटे दो हजार से अधिक गांव और कस्बे विशेष सहायता के पात्र हैं।

उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों के लोगों को बुनियादी सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना राष्ट्रीय प्राथमिकता का हिस्सा होना चाहिए।

केंद्र से सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार पहले भी कई बार केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांगें रख चुकी है। राज्य ने अंतरराष्ट्रीय सीमा को और अधिक सुरक्षित बनाने, ड्रोन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और आर्थिक पुनरुत्थान से जुड़े कई प्रस्ताव भेजे हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार इन मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और राज्य को उसकी परिस्थितियों के अनुरूप सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की मांगें किसी विशेष लाभ के लिए नहीं, बल्कि राज्य की वास्तविक जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर उठाई गई हैं।

‘रंगला पंजाब’ और ‘विकसित भारत’ का साझा लक्ष्य

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ‘रंगला पंजाब’ के विजन पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य राज्य को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य देश के ‘विकसित भारत-2047’ अभियान से पूरी तरह मेल खाता है।

उन्होंने कहा कि मानव संसाधन विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल प्रशिक्षण और रोजगार सृजन पंजाब सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। राज्य सरकार युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए कई पहल कर रही है।

मुख्यमंत्री ने परिवार-केंद्रित विकास मॉडल की वकालत करते हुए कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है जब समाज के हर वर्ग को उसका लाभ मिले। बच्चों को बेहतर शिक्षा, युवाओं को रोजगार, महिलाओं को अवसर और बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना किसी भी विकसित समाज की पहचान है।

पंजाब की मजबूती से मजबूत होगा भारत

बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और उसके लोग हमेशा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते आए हैं। देश की सीमाओं की रक्षा से लेकर खाद्यान्न सुरक्षा तक, पंजाब ने हर मोर्चे पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार राज्य की परिस्थितियों और जरूरतों को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि एक सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल पंजाब ही विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार राष्ट्रीय विकास के एजेंडे में पूरी भागीदारी निभाती रहेगी और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए केंद्र के साथ मिलकर कार्य करती रहेगी।