2027 की चुनावी बिसात बिछाने में जुटी कांग्रेस, पंजाब में नौ दिन तक संगठन की नब्ज टटोलेंगे भूपेश बघेल; राहुल गांधी के अभियान की भी होगी तैयारी

2027 की चुनावी बिसात बिछाने में जुटी कांग्रेस, पंजाब में नौ दिन तक संगठन की नब्ज टटोलेंगे भूपेश बघेल; राहुल गांधी के अभियान की भी होगी तैयारी

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 भले ही अभी कुछ समय दूर हो, लेकिन कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों को तेज करना शुरू कर दिया है। पार्टी हाईकमान अब केवल बड़े नेताओं की बैठकों तक सीमित रहने के बजाय संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल 30 जुलाई से 8 अगस्त तक राज्य के व्यापक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख जिलों में जाकर पार्टी पदाधिकारियों, पूर्व उम्मीदवारों, जिला और ब्लॉक स्तर के नेताओं के साथ सीधा संवाद करेंगे।

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को मजबूत दावेदारी पेश करनी है तो सबसे पहले संगठन को एकजुट और सक्रिय बनाना होगा। पिछले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के अनुभवों के आधार पर अब पार्टी जमीनी स्तर से फीडबैक जुटाकर आगे की रणनीति तैयार करना चाहती है।

भूपेश बघेल का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। एक तरफ वह संगठन की वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे, वहीं दूसरी ओर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने और चुनावी तैयारियों को गति देने का प्रयास करेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक जिले में अलग-अलग स्तर के नेताओं के साथ विस्तृत चर्चा होगी, ताकि स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की मजबूती और संभावित चुनावी चुनौतियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

इस दौरे में केवल औपचारिक बैठकें ही नहीं होंगी, बल्कि उन नेताओं और कार्यकर्ताओं की राय भी ली जाएगी जो लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं। पार्टी चाहती है कि उम्मीदवारों के चयन से पहले संगठनात्मक ढांचे को मजबूत किया जाए और स्थानीय स्तर पर मौजूद कमियों को समय रहते दूर किया जाए।

भूपेश बघेल अपने दौरे के दौरान वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके कांग्रेस प्रत्याशियों, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों, ब्लॉक कांग्रेस प्रधानों, हलका अध्यक्षों, मंडल प्रधानों और विभिन्न संगठनात्मक इकाइयों के पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे। बैठकों में बूथ प्रबंधन, मतदाता संपर्क अभियान, संगठन विस्तार, सोशल मीडिया की भूमिका, स्थानीय मुद्दों और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी।

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि केवल बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों से चुनाव नहीं जीते जा सकते। इसके लिए प्रत्येक बूथ पर मजबूत संगठन, सक्रिय कार्यकर्ता और मतदाताओं के साथ लगातार संवाद बेहद जरूरी है। इसी सोच के तहत पार्टी अब ब्लॉक और मंडल स्तर तक अपनी तैयारियों की समीक्षा कर रही है।

पंजाब कांग्रेस के संगठन महासचिव कैप्टन संदीप संधू ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित बैठकों में अनिवार्य रूप से शामिल हों। पार्टी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी जिले या संगठनात्मक इकाई की बात अनसुनी न रह जाए।

बताया जा रहा है कि भूपेश बघेल इससे पहले भी चंडीगढ़ में कई दिनों तक वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर चुके हैं। उन बैठकों में प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की वर्तमान स्थिति और विभिन्न गुटों के बीच चल रहे मतभेदों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। उस दौरान तैयार की गई रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को भी सौंपी गई थी। अब दूसरे चरण में बघेल सीधे जिलों में जाकर संगठन की वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे।

पार्टी के अंदर यह भी माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक बदलाव, नई जिम्मेदारियां और प्रचार अभियान की रूपरेखा पर अंतिम निर्णय लिए जा सकते हैं।

कांग्रेस की रणनीति केवल संगठन तक सीमित नहीं है। पार्टी 15 अगस्त के बाद राज्यभर में बड़े स्तर पर राजनीतिक अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस अभियान में वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं की सक्रिय भागीदारी रहेगी। राहुल गांधी भी पंजाब में चुनावी माहौल बनाने के लिए विशेष कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी की प्रस्तावित बस यात्रा को लेकर भी संगठन स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस यात्रा का उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर जनता से सीधा संवाद स्थापित करना और कांग्रेस के पक्ष में माहौल तैयार करना होगा। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि यह अभियान केवल राजनीतिक रैली तक सीमित न रहे, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और किसानों, युवाओं, महिलाओं तथा व्यापारियों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जाए।

बस यात्रा के जरिए कांग्रेस प्रदेश में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश करेगी। पार्टी का मानना है कि लगातार जनता के बीच रहने से कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा और संगठन में नई सक्रियता आएगी।

हालांकि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक मजबूती से पहले आंतरिक एकजुटता कायम करना है। पिछले कुछ समय से प्रदेश कांग्रेस में विभिन्न गुटों के बीच मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। कई मौकों पर पार्टी के वरिष्ठ नेता अलग-अलग मंचों पर दिखाई दिए हैं, जिससे संगठन की एकजुट छवि प्रभावित हुई है।

हाल के दिनों में नीट परीक्षा विवाद और पंजाब फार्मासिस्ट पेपर लीक जैसे मुद्दों पर कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों में भी प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक अलग-अलग नजर आए। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि चुनाव से पहले यह दूरी कम नहीं हुई तो इसका असर पार्टी की चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।

इसी वजह से भूपेश बघेल का दौरा केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे विभिन्न गुटों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी हाईकमान चाहता है कि सभी नेता व्यक्तिगत मतभेदों को पीछे छोड़कर चुनावी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें।

चुनाव समितियों के गठन के बाद से ही कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर भी चर्चा तेज रही है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक लगातार संगठन में बदलाव की मांग उठाते रहे हैं। हालांकि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल किसी बड़े परिवर्तन के पक्ष में दिखाई नहीं दे रहा।

राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या चन्नी समर्थक नेता भूपेश बघेल के सभी कार्यक्रमों में भाग लेंगे या फिर पहले की तरह दूरी बनाए रखेंगे। बताया जा रहा है कि चन्नी गुट पहले ही ऐसे कार्यक्रमों से दूरी बनाने का संकेत दे चुका है जिनमें प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग मौजूद हों। ऐसे में बघेल के सामने दोनों पक्षों को एक मंच पर लाना आसान नहीं होगा।

कांग्रेस नेतृत्व इस बात से भी अच्छी तरह परिचित है कि विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन के लिए केवल चुनावी घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी। संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं का विश्वास और नेतृत्व के बीच तालमेल ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

भूपेश बघेल का यह दौरा इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पार्टी चाहती है कि प्रत्येक जिले से मिलने वाले सुझावों के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग चुनावी रणनीति तैयार की जाए। सीमावर्ती जिलों, मालवा, दोआबा और माझा क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए प्रत्येक क्षेत्र की जरूरत के अनुसार अभियान की योजना बनाई जाएगी।

दौरे के दौरान कार्यकर्ताओं से यह भी पूछा जाएगा कि स्थानीय स्तर पर जनता किन मुद्दों को सबसे अधिक महत्व दे रही है। बेरोजगारी, किसानों से जुड़े सवाल, नशे की समस्या, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, व्यापार और कानून-व्यवस्था जैसे विषयों पर भी संगठनात्मक स्तर पर चर्चा होने की संभावना है।

पार्टी का मानना है कि यदि चुनाव से पहले जनता के प्रमुख मुद्दों को सही ढंग से समझ लिया जाए तो घोषणा पत्र और चुनावी अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। यही कारण है कि इस बार फीडबैक प्रक्रिया को काफी महत्व दिया जा रहा है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भूपेश बघेल 30 जुलाई को चंडीगढ़ पहुंचेंगे। 31 जुलाई को वह फतेहगढ़ साहिब और मोहाली में संगठनात्मक बैठकें करेंगे। इसके बाद 1 अगस्त को पटियाला और संगरूर, 2 अगस्त को बरनाला और मानसा, 3 अगस्त को बठिंडा तथा श्री मुक्तसर साहिब का दौरा करेंगे।

4 अगस्त को उनका कार्यक्रम फाजिल्का और फिरोजपुर में रहेगा। 5 अगस्त को मोगा और फरीदकोट में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठकें होंगी। 6 अगस्त को वह लुधियाना पहुंचेंगे, जबकि 7 अगस्त को मलेरकोटला और खन्ना में संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे। दौरे के अंतिम दिन 8 अगस्त को नवांशहर और रोपड़ में बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिसके बाद पूरे दौरे की रिपोर्ट तैयार कर कांग्रेस हाईकमान को सौंपी जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस के लिए यह दौरा केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण चरण साबित हो सकता है। यदि पार्टी इस दौरान गुटबाजी कम करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में सफल रहती है, तो 2027 के चुनाव से पहले उसे नई राजनीतिक ऊर्जा मिल सकती है। वहीं यदि आंतरिक मतभेद बरकरार रहे, तो चुनावी तैयारियों के बावजूद कांग्रेस के सामने चुनौती कम नहीं होगी। ऐसे में सभी की नजरें अब भूपेश बघेल के नौ दिवसीय दौरे और उसके बाद राहुल गांधी के प्रस्तावित चुनावी अभियान पर टिकी रहेंगी, क्योंकि इन्हीं दोनों चरणों से पंजाब कांग्रेस की आगामी चुनावी रणनीति की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।