आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने मंगलवार को दावा किया कि भगवंत मान सरकार के कार्यकाल में गैंगस्टरों और संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का दायरा पंजाब से बाहर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के जरिए विदेशों में छिपे एक दर्जन से अधिक गैंगस्टरों को वापस लाने में सफलता हासिल की है। इनमें हाल ही में कनाडा से डिपोर्ट किए गए लॉरेंस बिश्नोई के करीबी सहयोगी बताए जा रहे करमवीर सिंह उर्फ करमवीर देव का मामला भी शामिल है।
चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान पन्नू ने कहा कि अमेरिका, कनाडा, दुबई, मलेशिया और मोल्दोवा जैसे अलग-अलग देशों में फरार आरोपियों को ट्रैक करने के लिए पंजाब पुलिस की क्षमताओं को मजबूत किया गया है। उनके अनुसार, पुलिस को आधुनिक तकनीक, बेहतर उपकरण और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करने की सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं।
पन्नू ने कहा कि सरकार की ओर से पुलिस को आधुनिक बनाने का उद्देश्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध की साजिश का समय रहते पता लगाकर उसे रोकना भी है। उनके मुताबिक, विदेश में बैठकर पंजाब में आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने वाले लोगों पर भी पुलिस की नजर है।
हालांकि, विदेश से आरोपियों की वापसी में प्रत्यर्पण, निर्वासन और केंद्रीय एजेंसियों सहित अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। हाल के मामलों में पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित देशों की एजेंसियों के साथ समन्वय किया है। मोल्दोवा से अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम की वापसी को पंजाब पुलिस ने यूरोप से अपनी पहली सफल प्रत्यर्पण कार्रवाई बताया है।
करमवीर देव की कनाडा से वापसी का मामला
पन्नू ने कहा कि कनाडा से डिपोर्ट किए गए करमवीर सिंह उर्फ करमवीर देव को दिल्ली एयरपोर्ट पर पंजाब पुलिस ने हिरासत में लिया। उन्होंने उसे लॉरेंस बिश्नोई का करीबी सहयोगी बताया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कनाडा से निर्वासन के बाद उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ा गया और पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स की कार्रवाई के तहत आगे की प्रक्रिया की गई।
पन्नू ने इसे विदेशों में मौजूद गैंग नेटवर्क के खिलाफ पंजाब पुलिस की कार्रवाई की कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब में अपराध से जुड़े लोगों के लिए विदेश में जाकर कानून से बचना आसान नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य विदेशों में मौजूद आपराधिक नेटवर्क और पंजाब में सक्रिय उनके सहयोगियों के बीच संपर्क को तोड़ना है। उनके मुताबिक, इसके लिए पुलिस की खुफिया व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत किया गया है।
मोल्दोवा से अमृत दलम की वापसी बनी अहम कार्रवाई
पन्नू ने हाल ही में मोल्दोवा से वापस लाए गए अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम का भी उल्लेख किया। पंजाब पुलिस के अनुसार, वह जग्गू भगवानपुरिया गिरोह से जुड़ा आरोपी है और उसके खिलाफ पंजाब में हत्या, हत्या के प्रयास, हथियार, मादक पदार्थ और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। पंजाब पुलिस ने बताया कि छह महीने तक चले ऑपरेशन ‘ईस्टर्न रीच’ के दौरान उसे ट्रैक किया गया और केंद्रीय एजेंसियों व अंतरराष्ट्रीय सहयोग से उसे भारत वापस लाया गया।
पुलिस के अनुसार, यह पंजाब पुलिस का किसी यूरोपीय देश से पहला सफल प्रत्यर्पण था। चार सदस्यीय एजीटीएफ टीम ने मोल्दोवा में स्थानीय अधिकारियों के साथ आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं और आरोपी को अजरबैजान के रास्ते भारत लाया गया।
पन्नू ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब पुलिस की टीम से मुलाकात कर उसके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इसे विदेश में फरार आरोपियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
विदेश से वापस लाए गए आरोपियों की सूची गिनाई
आप नेता ने कहा कि अब तक विदेश से वापस लाए गए आरोपियों में सचिन बिश्नोई, मनप्रीत सिंह उर्फ पीता, रमनजीत सिंह उर्फ रोमी, परमिंदर सिंह उर्फ पिंडी, अनमोल बिश्नोई, अमृतपाल उर्फ मेहरो, गुरविंदर सिंह और जोबनदीप सिंह उर्फ जोबन बिल्ला समेत कई नाम शामिल हैं।
पन्नू के अनुसार, अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से वापस लाया गया, जबकि अमृतपाल उर्फ मेहरो को दुबई और गुरविंदर सिंह को मलेशिया से वापस लाने की कार्रवाई की गई। जोबनदीप सिंह उर्फ जोबन बिल्ला को भी विदेश से वापस लाए जाने की जानकारी सामने आई है। जुलाई में पंजाब पुलिस द्वारा जोबन बिल्ला को इंडोनेशिया से भारत वापस लाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
पन्नू ने इन मामलों को पंजाब में संगठित अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई का हिस्सा बताया और कहा कि पुलिस का अभियान केवल राज्य की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है।
पुलिस को आधुनिक तकनीक से लैस करने का दावा
आप मीडिया इंचार्ज ने कहा कि पंजाब पुलिस को मजबूत करने का मतलब केवल नए वाहन या भौतिक संसाधन उपलब्ध करवाना नहीं है। पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीक, संचार साधनों और अन्य उपकरणों से लैस किया गया है, ताकि अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने और समय पर कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ाई जा सके।
उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षमता बढ़ने से पुलिस को अपराधियों की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने, संभावित घटनाओं की पहचान करने और ऑपरेशन को अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करने में मदद मिल रही है।
पन्नू ने हाल ही में लुधियाना में हुई पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस को एक रक्तदान शिविर में हमले की योजना के संबंध में पहले से सूचना मिली थी और इस आधार पर कार्रवाई की गई। हाल की घटना में लुधियाना पुलिस और एजीटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में दो कथित गैंग सदस्यों की मौत हुई थी। पुलिस के अनुसार, वे एक रक्तदान शिविर में हमले की योजना बना रहे थे।
विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय पर जोर
पन्नू ने कहा कि विदेशों में मौजूद आरोपियों को वापस लाने के लिए पंजाब पुलिस को केंद्रीय जांच एजेंसियों और दूसरे देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना पड़ता है। कई मामलों में प्रत्यर्पण संधि और स्थानीय कानूनों के तहत अलग-अलग प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं।
उन्होंने दावा किया कि पंजाब पुलिस ऐसे देशों में भी आरोपियों की तलाश कर रही है, जहां भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं है। उनके अनुसार, विदेशों में मौजूद आपराधिक नेटवर्क संबंधित देशों के लिए भी चिंता का विषय बन रहे हैं, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ा है।
मोल्दोवा के मामले में भी पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों और वहां की एजेंसियों के साथ समन्वय किया था। पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन ईस्टर्न रीच में पंजाब एजीटीएफ, विदेशों में फरार आरोपियों को ट्रैक करने वाली इकाई, केंद्रीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच तालमेल रहा।
विपक्ष के आरोपों पर भी किया पलटवार
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पन्नू ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सरकार की कार्रवाई को नजरअंदाज कर लगातार ऐसे मुद्दे उठाता है, जिनके जरिए सरकार को घेरने की कोशिश की जा रही है।
पन्नू ने पंजाब में गैंगस्टरवाद के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 2007 से 2017 के बीच गैंगस्टर गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई और उस दौरान ‘गैंगस्टर’ शब्द पंजाब की सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गया। उन्होंने 2017 से 2022 के बीच रही कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को लेकर भी आरोप लगाए।
उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकारों के दौरान आपराधिक नेटवर्क को खत्म करने के लिए पर्याप्त प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। पन्नू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय उत्तर प्रदेश से एक गैंगस्टर को पंजाब की जेल में लाया गया और उसे विशेष सुविधाएं दी गईं। उन्होंने कहा कि उसकी वापसी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा।
नशे और संगठित अपराध को जोड़कर अभियान चलाने का दावा
पन्नू ने कहा कि राज्य सरकार ने नशे और गैंगस्टर नेटवर्क को अलग-अलग समस्या के रूप में देखने के बजाय दोनों के बीच मौजूद संभावित आपराधिक कड़ियों पर भी कार्रवाई को प्राथमिकता दी है। उनके अनुसार, नशे से जुड़े नेटवर्क को कमजोर करने के साथ-साथ हथियारों, जबरन वसूली और हिंसक अपराधों से जुड़े गिरोहों पर भी कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि विदेशों में बैठे कुछ आरोपी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से पंजाब में मौजूद अपने नेटवर्क के संपर्क में रहने की कोशिश करते हैं। पुलिस की तकनीकी और खुफिया क्षमता बढ़ने से ऐसे संपर्कों की निगरानी और जांच में मदद मिलती है।
सरकार का संदेश कार्रवाई जारी रखने का
पन्नू ने कहा कि भगवंत मान सरकार के कार्यकाल में पंजाब पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आधुनिक संसाधन उपलब्ध करवाए गए हैं। उनके मुताबिक, विदेश भागने के बाद भी आरोपियों को ट्रैक करने की नीति के कारण पुलिस की कार्रवाई अब राज्य की सीमा से बाहर तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि करमवीर देव की कनाडा से वापसी और अमृत दलम की मोल्दोवा से वापसी जैसे मामले इस बात को दर्शाते हैं कि पंजाब में दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों में फरार आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम कर रही हैं। अमृत दलम की वापसी को पंजाब पुलिस ने यूरोप से अपनी पहली सफल प्रत्यर्पण कार्रवाई बताया है।
पन्नू ने कहा कि सरकार का फोकस संगठित अपराध के नेटवर्क को कमजोर करने, विदेश में फरार आरोपियों को कानून के दायरे में लाने और पुलिस की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में भी विदेशों में छिपे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय को और मजबूत किया जाएगा।




