हरियाणा में बाल संरक्षण पर सरकार का फोकस, जुवेनाइल जस्टिस फंड होगा 10 करोड़

हरियाणा में बाल संरक्षण पर सरकार का फोकस, जुवेनाइल जस्टिस फंड होगा 10 करोड़

हरियाणा सरकार ने बच्चों और किशोरों की सुरक्षा, संरक्षण तथा कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में कई अहम फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए जुवेनाइल जस्टिस फंड की राशि बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही यौन अपराधों और पाक्सो एक्ट के तहत पीड़ित बच्चों को मिलने वाली तत्काल सामाजिक एवं वित्तीय सहायता की राशि भी बढ़ाई जाएगी।

सरकार की ओर से अब पीड़ित बच्चों को तत्काल सहायता के तौर पर 20 हजार रुपये की बजाय 50 हजार रुपये तक की मदद उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को सहायता के लिए लंबी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। इसके लिए पूरी व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए, ताकि जरूरत के समय आर्थिक और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें पीड़ित और उनके परिवारों को सहायता के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। अधिकारियों को सहायता वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

जुवेनाइल जस्टिस फंड बढ़ाकर किया जाएगा 10 करोड़

बैठक में बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास से संबंधित व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम के तहत जरूरतमंद बच्चों को बेहतर सहायता उपलब्ध कराने के लिए फंड बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान व्यवस्था की तुलना में फंड की क्षमता बढ़ने से बाल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों और जरूरतमंद बच्चों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सहायता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बाल संरक्षण से संबंधित योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचना चाहिए। इसके लिए विभागीय स्तर पर निगरानी और समन्वय को मजबूत किया जाए।

यौन अपराधों तथा पाक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में पीड़ित बच्चों की स्थिति को देखते हुए तत्काल मदद उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। सहायता राशि को 20 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने का प्रस्ताव इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया जाएगा।

किराये के भवनों से अपने भवनों में आएंगी आंगनबाड़ियां

महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किराये के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर अपने भवन उपलब्ध करवाने की दिशा में तेजी लाई जाए।

उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए नए भवन बनाने के लिए उपलब्ध सरकारी जमीन का बेहतर इस्तेमाल किया जाए। इसके अलावा सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध भूमि तथा अन्य उपयुक्त स्थानों को भी चिन्हित किया जाए। विभाग को ऐसे स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां सुविधाजनक और सुरक्षित तरीके से आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन की उपलब्धता के अनुसार विद्यालय परिसरों में भी आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की संभावनाएं तलाशनी चाहिए। इसके साथ ही ऐसी धर्मशालाओं की भी पहचान की जाए, जहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाकर आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा सकते हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य किराये के भवनों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए स्थायी बुनियादी ढांचा तैयार करना है। स्थायी भवन उपलब्ध होने से बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सेवाओं के संचालन के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकेगा।

बीपीएल महिलाओं और किशोरियों को मुफ्त सैनिटरी पैड

बैठक में महिला एवं किशोरी सम्मान योजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र बीपीएल महिलाओं और किशोरियों को गुणवत्तापूर्ण सैनिटरी पैड निशुल्क उपलब्ध करवाए जाएं।

उन्होंने लाभार्थियों के पंजीकरण और वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित करने पर जोर दिया। इसके तहत लाभार्थी का पूरा नाम, फोन नंबर और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज करने तथा सैनिटरी पैड के वितरण का उचित रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पात्र महिलाओं और किशोरियों को नियमित रूप से इसका लाभ मिले। इसके लिए वितरण प्रक्रिया की निगरानी और लाभार्थियों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना जरूरी है।

स्कूलों और जन औषधि केंद्रों के माध्यम से भी वितरण

ग्रामीण क्षेत्रों में सैनिटरी पैड की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जन औषधि केंद्रों और संबंधित वितरण केंद्रों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में पढ़ने वाली पात्र किशोरियों तक भी इन उत्पादों की पहुंच सुनिश्चित की जाए।

शहरी क्षेत्रों में भी जन औषधि केंद्रों और स्कूलों के माध्यम से सैनिटरी पैड उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करने को कहा गया है। जहां आवश्यकता महसूस हो, वहां डिस्पेंसिंग मशीनें लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस व्यवस्था के जरिए सरकार का जोर सैनिटरी उत्पादों की उपलब्धता को आसान बनाने पर है। खासतौर पर उन किशोरियों और महिलाओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था तैयार करने को कहा गया है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं।

चिल्ड्रन होम में सोलर पैनल लगाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने मिशन वात्सल्य के तहत संचालित चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने इन संस्थानों में रह रहे बच्चों को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध करवाने के लिए भवनों की स्थिति, रखरखाव और मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देने के निर्देश दिए।

उन्होंने चिल्ड्रन होम में सोलर पैनल लगाने को कहा। इससे इन संस्थानों में ऊर्जा से संबंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित की जा सकेगी। साथ ही मुख्यमंत्री ने चिल्ड्रन होम के भवनों के रिनोवेशन और नियमित रखरखाव पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस में रहने वाले बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे खुद को सुरक्षित महसूस करें और उनके विकास के लिए सकारात्मक माहौल उपलब्ध हो। भवनों की मरम्मत, स्वच्छता, सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया।

बच्चों की सुरक्षा के साथ सुविधाओं पर जोर

महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान सरकार की ओर से बच्चों, महिलाओं और किशोरियों से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। एक तरफ जहां बाल अपराधों के पीड़ितों को तत्काल आर्थिक सहायता बढ़ाने का फैसला लिया गया है, वहीं दूसरी तरफ बाल संरक्षण संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी निर्देश दिए गए हैं।

सरकार की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए स्थायी भवन, बीपीएल महिलाओं और किशोरियों को निशुल्क सैनिटरी पैड तथा चाइल्ड केयर संस्थानों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजनाओं को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी के साथ-साथ लाभार्थियों के रिकॉर्ड को भी व्यवस्थित रखा जाए, ताकि जरूरतमंद परिवारों को समय पर सहायता मिल सके।

इस समीक्षा बैठक में बाल संरक्षण, महिला कल्याण और किशोरियों से संबंधित योजनाओं के साथ विभागीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से अधिकारियों को इन निर्देशों पर तेजी से काम करने को कहा गया है।