हिमाचल कांग्रेस में अब काम के आधार पर मिलेगी कुर्सी, 7 ब्लॉक अध्यक्षों को सुधारने का अल्टीमेटम

हिमाचल कांग्रेस में अब काम के आधार पर मिलेगी कुर्सी, 7 ब्लॉक अध्यक्षों को सुधारने का अल्टीमेटम

मिशन-2027 से पहले संगठन की कार्यप्रणाली पर सख्ती, सभी जिला अध्यक्ष ग्रीन जोन में; 72 में से 65 ब्लॉक अध्यक्षों का प्रदर्शन भी संतोषजनक

शिमला। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव-2027 की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने संगठन को मजबूत और सक्रिय बनाने के लिए पदाधिकारियों के कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी है। अब पार्टी में केवल पद पर बने रहने या बैठकें आयोजित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिम्मेदारियों को निभाने और संगठनात्मक कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने के आधार पर पदाधिकारियों का मूल्यांकन किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर उनके प्रदर्शन को अलग-अलग जोन में बांटा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य संगठन में जवाबदेही बढ़ाना, सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना और कामकाज में ढिलाई बरतने वालों को समय रहते सचेत करना है।

पदाधिकारियों के कामकाज की पहली समीक्षा में जिला स्तर पर पार्टी को संतोषजनक परिणाम मिले हैं। प्रदेश के सभी जिला अध्यक्षों का प्रदर्शन बेहतर पाया गया है और उन्हें ग्रीन जोन में रखा गया है। इनमें 12 जिला अध्यक्षों के साथ संगठनात्मक जिला शिमला के अध्यक्ष का कामकाज भी शामिल है। इसके विपरीत ब्लॉक स्तर पर कुछ पदाधिकारियों का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा। कुल 72 ब्लॉक अध्यक्षों में से 65 ग्रीन जोन में जगह बनाने में सफल रहे, जबकि सात अध्यक्षों को यलो जोन में रखा गया है।

फिलहाल किसी भी जिला या ब्लॉक अध्यक्ष को रेड जोन में शामिल नहीं किया गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने समीक्षा के निष्कर्ष हाइकमान को भेज दिए हैं। पार्टी अब इस व्यवस्था के जरिए संगठनात्मक गतिविधियों की नियमित निगरानी करना चाहती है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बूथ और पंचायत स्तर तक संगठन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

पद पर बने रहने के लिए दिखाना होगा प्रदर्शन

कांग्रेस की नई कार्यप्रणाली में पदाधिकारियों की सक्रियता को प्रमुख आधार बनाया गया है। पार्टी नेतृत्व का जोर इस बात पर है कि संगठन में जिम्मेदारी संभालने वाले लोग केवल औपचारिक बैठकें करने तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें हाइकमान और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से सौंपे गए कार्यक्रमों को समय पर पूरा करना होगा।

धरने-प्रदर्शन, राजनीतिक आंदोलनों, घर-घर संपर्क अभियान और संगठन विस्तार जैसी गतिविधियों की प्रगति का आकलन किया जाएगा। पदाधिकारियों को यह बताना होगा कि उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों को अपने क्षेत्र में किस तरह लागू किया और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए क्या प्रयास किए। संगठनात्मक कामकाज में निरंतरता, निर्धारित कार्यक्रमों में भागीदारी और स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।

इस व्यवस्था के जरिए कांग्रेस नेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि संगठन में पद जिम्मेदारी के साथ जुड़ा है। जिन पदाधिकारियों का प्रदर्शन बेहतर रहेगा, उन्हें आगे अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने पर विचार किया जा सकता है। वहीं, लगातार सुस्ती दिखाने वालों के लिए संगठन में बने रहना मुश्किल हो सकता है।

सात ब्लॉक अध्यक्षों को मिला सुधार का अवसर

पहली समीक्षा में यलो जोन में रखे गए सात ब्लॉक अध्यक्षों को फिलहाल राहत दी गई है। इन पदाधिकारियों ने अपने कामकाज में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के पीछे पारिवारिक कारणों का हवाला दिया है। पार्टी ने उनके स्पष्टीकरण को ध्यान में रखते हुए तत्काल संगठन से हटाने के बजाय प्रदर्शन सुधारने का अवसर देने का फैसला किया है।

हालांकि, यह राहत स्थायी नहीं मानी जा रही। अगली समीक्षा में इन सभी पदाधिकारियों के कामकाज का दोबारा आकलन किया जाएगा। यदि वे निर्धारित कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी दिखाते हैं और अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाते हैं, तो उनके प्रदर्शन में सुधार दर्ज हो सकता है। इसके विपरीत, यदि कामकाज में ढिलाई जारी रहती है, तो उनके पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

यलो जोन में शामिल होना फिलहाल चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी का उद्देश्य पदाधिकारियों को तत्काल हटाने के बजाय उन्हें अपनी कार्यप्रणाली सुधारने का मौका देना है। लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया है कि लगातार खराब प्रदर्शन को अनदेखा नहीं किया जाएगा।

दो चेतावनियों के बाद संगठन से बाहर करने का प्रावधान

पदाधिकारियों के कामकाज की निगरानी के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शिमला स्थित राजीव भवन में कनेक्ट सेंटर बनाया है। इस केंद्र के माध्यम से हाइकमान के निर्देशों और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार की ओर से जारी कार्यक्रमों की प्रगति पर नजर रखी जाती है। संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी जुटाकर यह आकलन किया जाता है कि संबंधित पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को कितनी गंभीरता से निभा रहे हैं।

कनेक्ट सेंटर में संगठन विस्तार, धरने-प्रदर्शन, आंदोलन और घर-घर संपर्क अभियान समेत विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की जाती है। इसका उद्देश्य केवल रिपोर्ट तैयार करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी के निर्देशों का पालन जिला और ब्लॉक स्तर तक हो।

प्रदर्शन के आधार पर पदाधिकारियों को ग्रीन, यलो और रेड जोन में रखा जा रहा है। ग्रीन जोन में शामिल पदाधिकारियों को बेहतर कामकाज के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। भविष्य में उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां सौंपकर संगठन में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। यलो जोन में आने वालों को चेतावनी के साथ सुधार का मौका दिया जाएगा।

वहीं, लगातार चेतावनी के बावजूद कामकाज में सुधार नहीं करने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। यदि किसी पदाधिकारी का प्रदर्शन दो बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी बेहतर नहीं होता, तो उसे संगठन से बाहर किया जा सकता है। रेड जोन में पहुंचने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ सीधे कार्रवाई की जा सकती है। इस व्यवस्था से पार्टी ने साफ कर दिया है कि जिम्मेदारी निभाने में लगातार लापरवाही बरतने वालों को पद पर बनाए रखना जरूरी नहीं होगा।

हाइकमान की समीक्षा में चौथे स्थान पर हिमाचल कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस कमेटी संगठनात्मक प्रदर्शन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी सुधार का दावा कर रही है। हाइकमान की समीक्षा में हिमाचल कांग्रेस देशभर में चौथे स्थान पर पहुंची है। पार्टी के अनुसार, इससे पहले प्रदेश संगठन की रैंकिंग 20वें और 21वें स्थान से भी नीचे रहती थी। ऐसे में चौथे स्थान तक पहुंचने को संगठनात्मक कामकाज में सुधार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रदेश नेतृत्व अब इस प्रदर्शन को बनाए रखने के साथ संगठन को चुनावी जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। पार्टी की कोशिश है कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली बेहतर रैंकिंग का लाभ राज्य में संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने के लिए भी मिले। इसके लिए केवल प्रदेश और जिला स्तर पर गतिविधियां बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ब्लॉक, पंचायत और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

कांग्रेस के सामने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की चुनौती है। चुनावी तैयारियों में स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, मतदाताओं से संपर्क और पार्टी के कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन अहम माना जा रहा है। ऐसे में रिपोर्ट कार्ड की व्यवस्था को चुनाव से पहले संगठन की स्थिति परखने और कमजोरियों को दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की तैयारी

प्रदेश कांग्रेस ने जिला, बूथ और पंचायत स्तर तक कार्यकारिणियों का विस्तार किया है। अब पृष्ठ प्रभारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इसका उद्देश्य संगठन की जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट करना और मतदाता स्तर तक पार्टी की पहुंच मजबूत करना है।

पृष्ठ प्रभारियों की नियुक्ति और निचले स्तर तक संगठनात्मक ढांचे के विस्तार से पार्टी को स्थानीय गतिविधियों की निगरानी करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही पदाधिकारियों के कामकाज की नियमित समीक्षा से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कौन-से क्षेत्र में संगठन सक्रिय है और कहां अधिक मेहनत की जरूरत है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं संगठन प्रभारी विनोद जिंटा ने कहा कि कुछ ब्लॉक अध्यक्ष यलो जोन में आए हैं और उन्होंने इसके पीछे पारिवारिक कारण बताए हैं। अगली समीक्षा में उनके कामकाज का दोबारा आकलन किया जाएगा।

कांग्रेस की इस पहल को मिशन-2027 से पहले संगठन में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। अब पदाधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे रिपोर्ट कार्ड में बेहतर प्रदर्शन दर्ज कराने के साथ पार्टी के कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करें। पहली समीक्षा में जिला अध्यक्षों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है और अधिकांश ब्लॉक अध्यक्ष भी ग्रीन जोन में हैं। अब अगली समीक्षा बताएगी कि यलो जोन में रखे गए सात अध्यक्ष अपने कामकाज में कितना सुधार कर पाते हैं और पार्टी संगठनात्मक मजबूती की दिशा में कितनी प्रगति करती है।