पंजाब में भ्रष्टाचार मामले की जांच तेज, सीएम के ओएसडी राजवीर घुम्मन के छह करीबियों से सीबीआई ने की पूछताछ

पंजाब में भ्रष्टाचार मामले की जांच तेज, सीएम के ओएसडी राजवीर घुम्मन के छह करीबियों से सीबीआई ने की पूछताछ

तबादलों, नियुक्तियों और सरकारी फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही जांच एजेंसी; राजवीर घुम्मन को सोमवार को फिर बुलाया, वकील बोले—जांच में पूरा सहयोग करेंगे

पंजाब में भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी जांच तेज कर दी है। रविवार को मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) राजवीर घुम्मन के छह करीबियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए गए। इससे एक दिन पहले जांच एजेंसी ने राजवीर घुम्मन से लगभग छह घंटे तक पूछताछ की थी। अब उन्हें सोमवार को दोबारा जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। मामले में कानूनी पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता जीपी घुम्मन ने स्पष्ट किया है कि जांच से जुड़े सभी लोग केंद्रीय एजेंसी का पूरा सहयोग करेंगे और पूछे गए सवालों के जवाब देंगे।

जांच एजेंसी की कार्रवाई ऐसे समय में आगे बढ़ रही है, जब मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी कार्यवाही हो चुकी है। सीबीआई सरकारी अधिकारियों के तबादलों और नियुक्तियों से संबंधित रिकॉर्ड के साथ-साथ नीतिगत फैसलों, टेंडरों तथा प्रशासनिक मंजूरियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।

छह करीबियों को नोटिस, जांच में शामिल होने को कहा

वरिष्ठ अधिवक्ता जीपी घुम्मन के अनुसार, रविवार को नितिन गोहल, जितिन गोहल, बीर दविंदर सिंह, डॉ. रोमी महाजन, पुष्पिंदर चहल और सतिंदर सिंह को जांच एजेंसी की ओर से नोटिस प्राप्त हुए। उन्होंने बताया कि नोटिस अलग-अलग माध्यमों से भेजे जा रहे हैं। संबंधित लोगों को जब भी नोटिस की जानकारी मिलती है, उन्हें जांच में शामिल होने और एजेंसी की ओर से पूछे गए सवालों का स्पष्ट जवाब देने के लिए कहा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया में सहयोग किया जाएगा और जांच एजेंसी के सवालों का जवाब देने में कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा जा रहा है और संबंधित पक्ष जांच में अपना सहयोग देंगे।

सीबीआई की ओर से इन छह लोगों से पूछताछ का उद्देश्य और उनसे पूछे गए विशिष्ट सवालों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि पूछताछ के दौरान किन दस्तावेजों और तथ्यों पर विशेष रूप से जानकारी मांगी गई।

राजवीर घुम्मन से छह घंटे तक हुई पूछताछ

इससे पहले सीबीआई ने मुख्यमंत्री के ओएसडी राजवीर घुम्मन से करीब छह घंटे तक पूछताछ की थी। इस दौरान उनसे लगभग 40 सवाल पूछे जाने की जानकारी सामने आई थी। पूछताछ में मामले से जुड़े तथ्यों, संबंधित सरकारी कामकाज और उपलब्ध दस्तावेजों के बारे में जानकारी जुटाने पर जोर रहा।

जांच एजेंसी ने अब उन्हें सोमवार को फिर तलब किया है। दोबारा पूछताछ के दौरान पहले दिए गए जवाबों से संबंधित स्पष्टीकरण, दस्तावेजों की पुष्टि और मामले के अन्य पहलुओं पर जानकारी मांगी जा सकती है। हालांकि, एजेंसी की ओर से पूछताछ के संभावित विषयों के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

राजवीर घुम्मन से पूछताछ और उनके करीबियों को नोटिस जारी किए जाने से मामले की जांच का दायरा आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। सीबीआई संबंधित व्यक्तियों के बयान और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

हाई कोर्ट ने पांच दिसंबर तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था

जीपी घुम्मन ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पांच अक्टूबर को केंद्रीय जांच एजेंसी को प्राथमिकी दर्ज कर पांच दिसंबर तक विस्तृत जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। उनके अनुसार, मामला 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ था।

इस कानूनी कार्यवाही के दौरान आरोपित पक्ष को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने से संबंधित राहत मिली थी। हालांकि, इसका अर्थ जांच पर रोक लगना नहीं था। सीबीआई को मामले की जांच जारी रखने की अनुमति है और इसी क्रम में संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

मामले में कानूनी राहत और जांच की निरंतरता दोनों अलग-अलग पहलू हैं। जहां अदालत के आदेशों के तहत आरोपितों के संबंध में कुछ सुरक्षा प्रदान की गई, वहीं जांच एजेंसी को तथ्यों की पड़ताल करने और संबंधित व्यक्तियों से जानकारी लेने की प्रक्रिया जारी रखने का अवसर मिला हुआ है।

हिरासत में लेकर पूछताछ पर राहत, जांच जारी

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद आरोपित पक्ष को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने से राहत मिलने की बात कही गई थी। जीपी घुम्मन के अनुसार, इस राहत के बावजूद जांच जारी रहने की व्यवस्था है। इसी कारण अब जांच एजेंसी की ओर से नोटिस भेजे जा रहे हैं और संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है।

12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिकी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने उस समय आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अदालत ने राज्य सरकार को जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा था।

इस प्रकार, प्राथमिकी पर रोक नहीं लगने और जांच जारी रहने के बीच अदालत के अंतरिम निर्देशों का पालन भी महत्वपूर्ण है। मामले में आगे की कार्रवाई इन्हीं कानूनी सीमाओं और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की जानी है।

तबादलों और नियुक्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल

सीबीआई की जांच में सरकारी अधिकारियों के तबादलों और नियुक्तियों से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आरोपों के अनुसार, कुछ प्रशासनिक निर्णयों और सरकारी पदों पर नियुक्तियों को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर धन के लेनदेन की आशंका है। एजेंसी इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड, फाइलों और अन्य उपलब्ध सामग्री की पड़ताल कर रही है।

जांच के दायरे में नीतिगत फैसलों और सरकारी टेंडरों को प्रभावित करने के कथित प्रयास भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा प्रशासनिक मंजूरियों, लाइसेंस जारी करने और जमीन से जुड़े मामलों में कथित हस्तक्षेप के आरोपों की भी जांच की जा रही है।

इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण दस्तावेजों, संबंधित व्यक्तियों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी निर्णय लेने की प्रक्रिया में किसी प्रकार का अनुचित प्रभाव या आर्थिक लेनदेन हुआ था या नहीं।

व्हाट्सएप चैट और दस्तावेजों की भी जांच

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने आरोपों के समर्थन में व्हाट्सएप चैट और अन्य सामग्री का हवाला दिया था। इन सामग्रियों में सामने आए तथ्यों की जांच और उनकी प्रासंगिकता का आकलन भी मामले की आगे की कार्यवाही में महत्वपूर्ण हो सकता है।

किसी भी डिजिटल बातचीत या दस्तावेज को अपने आप में अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। उसकी प्रामाणिकता, संदर्भ और अन्य साक्ष्यों के साथ उसका संबंध जांच के दौरान स्थापित किया जाना आवश्यक होता है। इसी तरह, कथित लेनदेन और सरकारी निर्णयों के बीच संबंध की पुष्टि भी जांच के निष्कर्षों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकेगी।

सीबीआई इस मामले में पंजाब और चंडीगढ़ के कई स्थानों पर तलाशी भी ले चुकी है। इन स्थानों में मुख्यमंत्री का कैंप कार्यालय भी शामिल है। तलाशी के दौरान जुटाई गई सामग्री और सरकारी रिकॉर्ड की जांच के आधार पर एजेंसी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

जांच के निष्कर्षों पर टिकी आगे की कार्रवाई

सीबीआई की मौजूदा कार्रवाई में पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और विभिन्न व्यक्तियों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। राजवीर घुम्मन से दोबारा पूछताछ और उनके छह करीबियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद मामले में आगे की जांच पर नजर बनी हुई है।

अब यह देखना होगा कि पूछताछ के दौरान सामने आने वाली जानकारी और रिकॉर्ड की पड़ताल से जांच एजेंसी को क्या तथ्य मिलते हैं। पांच दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के हाई कोर्ट के निर्देश के मद्देनजर जांच की प्रगति और उसके निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल, वरिष्ठ अधिवक्ता जीपी घुम्मन ने जांच में सहयोग करने की बात कही है। वहीं, सीबीआई मामले में कथित भ्रष्टाचार, सरकारी नियुक्तियों और तबादलों, टेंडरों तथा प्रशासनिक फैसलों से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच के निष्कर्षों और अदालत में होने वाली आगे की कार्यवाही से ही स्पष्ट होगा।