छह दिन बाद भी नहीं हुआ परविंदर सिंह झोटा का अंतिम संस्कार, सीबीआइ जांच की मांग पर अड़ा परिवार; विधायकों के घरों के बाहर प्रदर्शन करेगी संघर्ष कमेटी
मानसा। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हत्या के छह दिन बाद भी रविवार तक झोटा के शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। परिवार और समर्थक मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) से जांच करवाने की मांग पर अड़े हुए हैं। 13 अक्टूबर को हुई हत्या के बाद से ही परिवार और समर्थकों की ओर से शहर के तिकोनी चौक पर धरना दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 अक्टूबर को मानसा पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करने का कार्यक्रम घोषित किया है। शाह ने सामाजिक माध्यम एक्स पर पोस्ट डालकर पंजाब में नशे की समस्या और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने पंजाब को नशे के गर्त में धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आई तो नशे के कारोबार में शामिल लोगों को चुन-चुनकर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
शाह ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। उन्होंने जानकारी दी कि मंगलवार को वह मानसा, संगरूर और गुरदासपुर में ऐसे पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे, जो नशे से जुड़ी घटनाओं या इसके खिलाफ आवाज उठाने के कारण प्रभावित हुए हैं। गृह मंत्री के इस कार्यक्रम से पंजाब में नशे के मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने की संभावना है।
मानसा में झोटा परिवार से मुलाकात करेंगे शाह
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उनके परिवार और समर्थकों की ओर से लगातार न्याय की मांग की जा रही है। धरनास्थल पर जुटे लोग मामले की जांच सीबीआइ से करवाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि हत्या की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब अमित शाह के मानसा पहुंचने से इस मामले को राष्ट्रीय राजनीतिक स्तर पर भी प्रमुखता मिलने की संभावना है। गृह मंत्री की ओर से पीड़ित परिवार से मुलाकात किए जाने का कार्यक्रम ऐसे समय में तय हुआ है, जब धरना लगातार जारी है और अंतिम संस्कार को लेकर भी गतिरोध बना हुआ है।
शाह ने अपनी पोस्ट में पंजाब में नशे के कारोबार को लेकर राज्य सरकार पर आरोप लगाए हैं। भाजपा की ओर से नशामुक्त पंजाब का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। इस दौरे के दौरान गृह मंत्री नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के परिवारों से बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे।
हालांकि, झोटा हत्याकांड में परिवार की प्रमुख मांग सीबीआइ जांच की है। ऐसे में गृह मंत्री की मुलाकात के दौरान इस मांग को लेकर क्या रुख सामने आता है, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी। फिलहाल, परिवार और समर्थकों ने धरना समाप्त करने या अंतिम संस्कार को लेकर किसी सहमति की जानकारी नहीं दी है।
संगरूर में गुलजार के परिवार से भी मिलेंगे
अमित शाह अपने पंजाब दौरे के दौरान संगरूर में गुलजार के परिवार से भी मुलाकात करेंगे। गुलजार ने नशे के खिलाफ आवाज उठाई थी और धमकी मिलने से आहत होकर आत्महत्या कर ली थी। उनके परिवार से मुलाकात के जरिए नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने आएगा।
शाह का यह दौरा पिछले 20 दिनों के भीतर पंजाब का दूसरा दौरा होगा। इससे पहले वह 30 सितंबर को जालंधर आए थे। अब मानसा, संगरूर और गुरदासपुर में पीड़ित परिवारों से मुलाकात के कार्यक्रम को भाजपा की पंजाब में नशे के मुद्दे पर सक्रियता बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय रही है। विपक्षी दल राज्य सरकार पर नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पाने के आरोप लगाते रहे हैं। वहीं, नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर उठने वाले सवाल इस बहस को और गंभीर बना रहे हैं।
झोटा की हत्या के बाद परिवार और समर्थकों की ओर से न्याय की मांग के साथ-साथ मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से करवाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में गृह मंत्री के दौरे से इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा और तेज हो सकती है।
19 अक्टूबर को विधायकों के घरों के बाहर प्रदर्शन
सीबीआइ जांच की मांग को लेकर संघर्ष कमेटी ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। कमेटी की ओर से 19 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक राज्यभर में विधायकों के घरों के बाहर प्रदर्शन करने का कार्यक्रम तय किया गया है। इसके जरिए सरकार और जनप्रतिनिधियों पर मामले में कार्रवाई के लिए दबाव बनाने की कोशिश की जाएगी।
संघर्ष कमेटी का कहना है कि झोटा हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। परिवार और समर्थक इस मामले को केवल एक हत्या की घटना के रूप में नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़े सवाल के तौर पर भी उठा रहे हैं।
तिकोनी चौक पर जारी धरने के कारण यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। छह दिन बीतने के बाद भी अंतिम संस्कार नहीं होने और प्रदर्शनकारियों की मांगें पूरी नहीं होने से प्रशासन के सामने भी स्थिति का समाधान निकालने की चुनौती बनी हुई है।
विधायकों के आवासों के बाहर प्रस्तावित प्रदर्शन से आंदोलन का दायरा बढ़ने की संभावना है। संघर्ष कमेटी के इस कदम का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करना और सरकार से स्पष्ट जवाब मांगना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन या सरकार की ओर से कोई नई पहल की जाती है या नहीं।
घायल कुलविंदर सिंह का निजी अस्पताल में होगा इलाज
झोटा हत्याकांड से जुड़ी घटना में घायल हुए एंटी ड्रग टास्क फोर्स के सदस्य कुलविंदर सिंह के इलाज को लेकर भी सरकार ने पहल की है। कुलविंदर सिंह की टांग में गोली लगी थी। उन्हें पहले मानसा के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां से बाद में बेहतर इलाज के लिए बठिंडा के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, सरकार ने कुलविंदर सिंह को निजी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए मना लिया है। अब उनका उपचार बठिंडा के निजी अस्पताल में होगा और इसका पूरा खर्च पंजाब सरकार उठाएगी। घायल सदस्य के उपचार की व्यवस्था को लेकर सरकार की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब झोटा हत्याकांड के बाद धरना लगातार जारी है।
कुलविंदर सिंह की चोट और उपचार का मामला भी इस घटना से जुड़े घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। उनके इलाज की व्यवस्था होने के बावजूद सीबीआइ जांच की मांग को लेकर परिवार और समर्थकों का रुख नहीं बदला है। आंदोलनकारी मामले की जांच और अन्य मांगों पर ठोस निर्णय चाहते हैं।
बब्बू मान और सिमरनजीत सिंह मान धरनास्थल पर पहुंचे
झोटा के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए सोमवार को पंजाबी गायक बब्बू मान और सिमरनजीत सिंह मान धरनास्थल पर पहुंचे। दोनों ने परिवार से मुलाकात की और उनके दुख में शामिल हुए। उनकी मौजूदगी से धरनास्थल पर जारी आंदोलन को सामाजिक स्तर पर भी ध्यान मिला।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद स्थानीय लोगों, समर्थकों और विभिन्न वर्गों के लोगों की ओर से परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की जा रही है। धरने के दौरान सीबीआइ जांच की मांग प्रमुखता से उठाई जा रही है। परिवार और समर्थकों का कहना है कि मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सोमवार को बब्बू मान और सिमरनजीत सिंह मान की मौजूदगी ने यह भी संकेत दिया कि मामला केवल राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी इस पर चर्चा हो रही है। हालांकि, धरना समाप्त करने और अंतिम संस्कार को लेकर अभी कोई अंतिम सहमति सामने नहीं आई है।
नशे के मुद्दे पर भाजपा और आप आमने-सामने
झोटा हत्याकांड के बाद पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान, अपराध और कानून-व्यवस्था का मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। भाजपा ने इस मामले को उठाते हुए आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है। अमित शाह ने नशे के कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया है।
दूसरी ओर, परिवार और समर्थकों की तत्काल मांग मामले की जांच सीबीआइ से करवाने की है। उनके लिए सबसे अहम सवाल यह है कि हत्या की निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित होगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, मानसा में धरना जारी है, अंतिम संस्कार को लेकर गतिरोध बना हुआ है और संघर्ष कमेटी ने राज्यभर में प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया है। 20 अक्टूबर को अमित शाह की पीड़ित परिवार से प्रस्तावित मुलाकात के दौरान इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर सभी की नजर रहेगी। यह दौरा पंजाब में नशे के मुद्दे पर राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है, जबकि परिवार की नजर न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग पूरी होने पर टिकी है।




