सीएम भगवंत मान ने पानी के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा, राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी का दावा; करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने की भी उठी मांग
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायकों की आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों और सुरक्षाकर्मियों के साथ बहस तथा धक्कामुक्की हुई। विवाद उस समय बढ़ा, जब कांग्रेस नेता अपने विधायक सुखपाल सिंह खैहरा को भी सदन के भीतर ले जाने पर अड़े रहे। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बताया कि विधानसभा अध्यक्ष ने खैहरा को सदन की कार्यवाही से निलंबित किया हुआ है, इसलिए उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस विधायक दल सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुआ। विपक्ष की ओर से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक डॉ. नछत्तर पाल ही सदन में मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी में पानी के अधिकारों, करतारपुर साहिब कॉरिडोर, महिलाओं के सम्मान और कल्याणकारी योजनाओं सहित विभिन्न मुद्दों से जुड़े आठ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष ने पंजाब के लिए महत्वपूर्ण पानी के मुद्दे पर सदन से बाहर रहना उचित समझा। विशेष सत्र के अंतिम दिन राजनीतिक टकराव के बीच राज्य के जल अधिकारों और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार ने अपने प्रस्तावों के माध्यम से केंद्र के समक्ष मांगें रखीं।
खैहरा को सदन में ले जाने पर बढ़ा विवाद
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। कांग्रेस नेता चाहते थे कि विधायक सुखपाल सिंह खैहरा भी सदन में जाएं, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने निलंबन का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। इसी बात को लेकर बहस हुई और धक्कामुक्की की स्थिति पैदा हो गई।
कांग्रेस विधायकों की ओर से खैहरा को सदन में ले जाने की कोशिश के बीच आप विधायकों और सुरक्षा कर्मियों के साथ उनकी तकरार हुई। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल ने सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। विपक्ष की ओर से केवल बसपा विधायक डॉ. नछत्तर पाल सदन में मौजूद रहे।
कांग्रेस विधायक दल की अनुपस्थिति के बावजूद सदन में प्रस्तावों पर कार्यवाही जारी रही। आठ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाए और कहा कि पानी का मुद्दा पंजाब के हितों से जुड़ा है, ऐसे में विपक्ष को सदन में उपस्थित रहकर अपना पक्ष रखना चाहिए था।
पानी के मुद्दे पर पांच प्रस्ताव, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने पानी से संबंधित पांच प्रस्ताव सदन में पेश किए। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य पंजाब के जल संसाधनों पर राज्य के अधिकारों को मजबूत करना, दूसरे क्षेत्रों को दिए जा रहे पानी के बदले आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना और पानी के बेहतर इस्तेमाल के लिए जरूरी परियोजनाओं को आगे बढ़ाना था।
प्रस्तावों में राजस्थान से पंजाब को पानी की कीमत और रॉयल्टी दिलाने की मांग शामिल रही। सरकार ने यह भी आग्रह किया कि भविष्य में पानी की आपूर्ति के बदले नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि पंजाब को उसके जल संसाधनों के उपयोग का आर्थिक लाभ मिल सके।
इसके अलावा पाकिस्तान की ओर जा रहे पानी का अधिकतम उपयोग करने के लिए उझ बहुउद्देशीय परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की मांग उठाई गई। सरकार का मानना है कि परियोजना के विकास से पानी के भंडारण और पंजाब की सिंचाई सहित अन्य जरूरतों के लिए उसके उपयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
यमुना नदी के पानी पर पंजाब के दावे को लेकर भी प्रस्ताव पेश किया गया। इसमें केंद्र सरकार से पंजाब की शिकायत पर निर्णय लेने और जल विवाद के समाधान के लिए वाटर डिस्प्यूट ट्रिब्यूनल गठित करने की मांग की गई।
अन्य प्रस्तावों में नहरी जल व्यवस्था, हेडवर्क्स के रखरखाव और नियंत्रण से जुड़े अधिकार पंजाब को सौंपने तथा डैम सेफ्टी एक्ट और बांधों से संबंधित अधिकारों के मुद्दे शामिल रहे। इन प्रस्तावों के माध्यम से सरकार ने जल प्रबंधन और बांधों से जुड़ी व्यवस्थाओं में पंजाब की भूमिका को मजबूत करने की मांग की।
राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी का दावा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजस्थान को दिए जा रहे पानी के मुद्दे पर कहा कि राजस्थान वर्ष 1960 तक पंजाब को रॉयल्टी देता था, लेकिन अब पंजाब से पानी लेकर अपने उद्योगों में उसका इस्तेमाल कर रहा है और उससे आर्थिक लाभ कमा रहा है।
मान ने दावा किया कि पंजाब का राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी का हक बनता है। उन्होंने कहा कि राज्य को अपने जल संसाधनों के बदले उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, पंजाब खुद पानी की कमी से जूझ रहा है, ऐसे में उसके हिस्से के पानी का इस्तेमाल दूसरे क्षेत्रों में होने और इसके बदले भुगतान नहीं मिलने का मुद्दा महत्वपूर्ण है।
सरकार का तर्क है कि पानी की आपूर्ति के बदले भुगतान की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए और भविष्य में नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर सदन में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया।
हालांकि, राजस्थान से रॉयल्टी के रूप में 1.44 लाख करोड़ रुपये मिलने का दावा मुख्यमंत्री का राजनीतिक और वित्तीय दावा है। इस राशि की देयता और भुगतान का निर्धारण संबंधित जल समझौतों, कानूनी प्रावधानों और सक्षम प्राधिकरणों के निर्णयों के आधार पर ही हो सकेगा।
उझ परियोजना से पंजाब में पानी के इस्तेमाल पर जोर
पानी से जुड़े प्रस्तावों में उझ बहुउद्देशीय परियोजना को प्राथमिकता से पूरा करने की मांग भी महत्वपूर्ण रही। सरकार का कहना है कि रावी नदी के रास्ते पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी का अधिकतम इस्तेमाल करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास जरूरी है।
उझ सहित जम्मू-कश्मीर से निकलने वाली कुछ नदियों का पानी माधोपुर हेडवर्क्स के नीचे रावी नदी में मिलता है। पंजाब के पास इस पानी को पर्याप्त मात्रा में संग्रहित करने के लिए जरूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण उसका पूरा उपयोग नहीं हो पाता।
सदन में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि उझ परियोजना को प्राथमिकता दी जाए, ताकि पानी के भंडारण और उसके इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ाई जा सकें। परियोजना से पंजाब में सिंचाई तथा अन्य जरूरतों के लिए जल उपलब्धता बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही नहरी जल व्यवस्था, हेडवर्क्स के रखरखाव और नियंत्रण संबंधी अधिकारों का मुद्दा भी उठाया गया। सरकार चाहती है कि इन व्यवस्थाओं में पंजाब को अधिक अधिकार मिले, जिससे राज्य अपने जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर सके।
यमुना के पानी पर कानूनी विकल्प अपनाने की तैयारी
यमुना नदी के पानी पर पंजाब के अधिकार का मामला भी सदन में उठाया गया। सरकार ने केंद्र से पंजाब की ओर से दायर शिकायत पर जल्द निर्णय लेने और जल विवाद के समाधान के लिए ट्रिब्यूनल गठित करने की मांग की।
प्रस्ताव में कहा गया कि यदि केंद्र सरकार इस मामले में निर्णय नहीं लेती, तो पंजाब को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने पर विचार करना चाहिए। इस मांग के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट किया कि पानी के बंटवारे से संबंधित विवादों को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
पंजाब के लिए जल अधिकारों का मुद्दा कृषि, पेयजल और राज्य की भविष्य की जरूरतों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार की ओर से पारित प्रस्तावों पर केंद्र की प्रतिक्रिया और संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे की दिशा तय करेगी।
करतारपुर साहिब कॉरिडोर दोबारा खोलने का प्रस्ताव
सदन में करतारपुर साहिब कॉरिडोर को श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोलने की मांग भी उठाई गई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि कॉरिडोर पहले लंबे समय तक खुला रहा और उस दौरान कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई।
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के दोनों ओर के लोग एक-दूसरे के प्रति मोहब्बत रखते हैं और श्रद्धालु करतारपुर साहिब के दर्शन करने के लिए अरदास करते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार से संपर्क किया गया है।
करतारपुर साहिब कॉरिडोर सिख श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है। इसके दोबारा खुलने से श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर में दर्शन करने का अवसर मिल सकेगा। हालांकि, कॉरिडोर के संचालन का निर्णय सुरक्षा व्यवस्था, भारत-पाकिस्तान के बीच समन्वय और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।
महिलाओं और अन्य वर्गों की योजनाएं जारी रखने का प्रस्ताव
विशेष सत्र के दौरान मावां-धीयां सत्कार योजना, मुफ्त बिजली, सेहत योजना और अन्य जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को जारी रखने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसमें इन योजनाओं के लिए पंजाब के बजट में आवश्यक प्रावधान करने की मांग रखी गई।
सरकार की ओर से इन योजनाओं को महिलाओं, किसानों और आम लोगों को राहत देने वाली पहलों के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रस्ताव में मौजूदा कल्याणकारी व्यवस्थाओं को जारी रखने और उनके लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट में पंजाब के विधायकों में से दो सदस्यों को नामित करने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को देने से संबंधित प्रस्ताव भी पारित किया गया। इस प्रस्ताव के जरिए विश्वविद्यालय की सीनेट में पंजाब के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी से जुड़ा मुद्दा उठाया गया।
विपक्ष की गैरमौजूदगी के बीच पारित हुए आठ प्रस्ताव
विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन सदन के बाहर राजनीतिक टकराव और भीतर जल अधिकारों पर चर्चा प्रमुख रही। खैहरा को सदन में प्रवेश देने को लेकर हुए विवाद के बाद कांग्रेस विधायक दल कार्यवाही में शामिल नहीं हुआ। बसपा विधायक डॉ. नछत्तर पाल की मौजूदगी में आठ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पानी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विपक्ष को सदन में उपस्थित रहना चाहिए था। वहीं, सरकार ने राजस्थान से पानी की कीमत और रॉयल्टी, उझ परियोजना, यमुना के पानी, करतारपुर साहिब कॉरिडोर और जनकल्याणकारी योजनाओं सहित कई मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किए।
अब इन प्रस्तावों के आधार पर केंद्र सरकार से की गई मांगों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। राजस्थान से रॉयल्टी, यमुना के पानी और बांधों तथा नहरी व्यवस्था से जुड़े अधिकारों के मामलों में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे की दिशा तय करेगी। वहीं, करतारपुर साहिब कॉरिडोर को दोबारा खोलने की मांग पर भी केंद्र और संबंधित पक्षों के निर्णय का इंतजार रहेगा।




