मालबेला ग्रुप के सेक्टर-82 स्थित कार्यालय में दो दिन तक चली पड़ताल, औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन से लेकर जमीनों की खरीद-फरोख्त और कंपनियों के निवेश की जांच
मोहाली। पंजाब में औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर पूर्व उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के खिलाफ चल रही जांच अब नए कारोबारी ठिकानों तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए मोहाली के सेक्टर-82 स्थित मालबेला ग्रैंड के कार्यालय में भी पड़ताल की है। जांच एजेंसी की इस कार्रवाई को औद्योगिक जमीनों के आवंटन, निजी रियल एस्टेट कारोबार और विभिन्न कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मालबेला ग्रुप के कार्यालय में ईडी की कार्रवाई लगातार दो दिनों तक चली। इस दौरान अधिकारियों ने जमीनों की खरीद-फरोख्त, संपत्तियों में किए गए निवेश, कारोबारी समझौतों और विभिन्न कंपनियों के वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित कारोबार में निवेश के लिए धन किन स्रोतों से आया और जमीनों के सौदों में किस प्रकार भुगतान किया गया। इसके साथ ही कंपनियों के बीच हुए लेनदेन और उनके कारोबारी संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
इस जांच का अहम पहलू औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन और निजी रियल एस्टेट कारोबार के बीच संभावित संबंधों का पता लगाना है। ईडी यह समझने की कोशिश कर रही है कि औद्योगिक जमीनों के आवंटन से जुड़े मामलों में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद क्या किसी अन्य कारोबारी गतिविधि में निवेश किया गया था। हालांकि, अभी तक इस संबंध में किसी तरह की अनियमितता या मालबेला ग्रुप की संलिप्तता आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुई है।
जमीनों के सौदों और कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, मालबेला ग्रुप से जुड़े कार्यालय में जांच के दौरान अधिकारियों ने संपत्तियों के मालिकाना हक, जमीनों की खरीद-बिक्री से संबंधित समझौतों और निवेश के रिकॉर्ड पर विशेष ध्यान दिया। इसके अलावा विभिन्न कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी जुटाई गई। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि जमीनों के सौदों में शामिल कंपनियों के वित्तीय स्रोत क्या थे और उनके बीच धन का लेनदेन किस कारोबारी आधार पर हुआ।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जमीनों के स्वामित्व और उनके हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज हैं। किसी संपत्ति की खरीद के लिए भुगतान किसने किया, निवेश की रकम कहां से आई और बाद में संपत्ति का मालिकाना हक किसके पास पहुंचा, इन सभी पहलुओं को जांच के दायरे में रखा गया है। इसके साथ ही संबंधित कंपनियों के खातों और कारोबारी गतिविधियों के बीच संभावित तालमेल की भी जांच की जा रही है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कार्रवाई के दौरान कुछ दस्तावेज अपने कब्जे में लिए जाने की सूचना है। हालांकि, ईडी की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कितने दस्तावेज कब्जे में लिए गए और उनमें किस प्रकार की जानकारी सामने आई है।
सुंदर शाम अरोड़ा से जुड़े कारोबारी संपर्क भी जांच के दायरे में
पूर्व उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा से जुड़े मामले में जांच एजेंसी अब केवल औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन तक सीमित नहीं रहना चाहती। जमीनों के कारोबार, कंपनियों में निवेश और संपत्तियों के स्वामित्व से जुड़े पहलुओं की पड़ताल के जरिए एजेंसी पूरे वित्तीय नेटवर्क को समझने का प्रयास कर रही है।
इसी क्रम में अरोड़ा और संबंधित कारोबारियों के बीच संभावित व्यावसायिक संबंधों की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों के बीच किसी प्रकार का वित्तीय या कारोबारी लेनदेन हुआ था या नहीं। हालांकि, केवल जांच के दायरे में आने से किसी व्यक्ति या कंपनी की संलिप्तता साबित नहीं होती। इस मामले में भी अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
होशियारपुर से मोहाली तक ईडी की कार्रवाई
इससे पहले ईडी ने सोमवार तड़के सुंदर शाम अरोड़ा के होशियारपुर स्थित आवास और उनके बेटे प्रतीक अरोड़ा से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई शुरू की थी। इस कार्रवाई के बाद जांच का दायरा मोहाली तक पहुंचने से मामले में नए कारोबारी पहलुओं की चर्चा शुरू हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (पीएसआईईसी) के औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन और उनके मालिकाना हक में कथित अनियमितताओं से जुड़ी जांच का हिस्सा है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि औद्योगिक जमीनों के आवंटन की प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया था या नहीं और संबंधित संपत्तियों के हस्तांतरण में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी हुई थी या नहीं।
औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन से जुड़े मामलों में जमीन की कीमत, आवंटन की शर्तें, पात्रता और मालिकाना हक का हस्तांतरण महत्वपूर्ण पहलू होते हैं। जांच एजेंसी इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए संबंधित रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि औद्योगिक जमीनों से जुड़े सौदों के बाद संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों की संपत्तियों में किस प्रकार बदलाव हुआ।
निजी कारोबार और औद्योगिक जमीनों के बीच कड़ियां तलाश रही एजेंसी
मोहाली के सेक्टर-82 स्थित कार्यालय में हुई कार्रवाई से संकेत मिलता है कि ईडी अब इस मामले में कारोबारी लेनदेन की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है। एजेंसी का फोकस केवल प्लॉट आवंटन के समय अपनाई गई प्रक्रिया पर नहीं, बल्कि उसके बाद जमीनों और संपत्तियों से जुड़े निवेश पर भी है।
जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड में दर्ज लेनदेन और जमीनों के वास्तविक सौदों के बीच कितना तालमेल है। यदि किसी संपत्ति की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत को लेकर कोई सवाल सामने आता है तो एजेंसी संबंधित वित्तीय दस्तावेजों और कारोबारी समझौतों के आधार पर उसकी जांच कर सकती है।
फिलहाल ईडी की ओर से मालबेला ग्रुप के कार्यालय में हुई कार्रवाई, दस्तावेजों की जब्ती और जांच में सामने आए तथ्यों को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। न ही किसी कारोबारी समूह या व्यक्ति के खिलाफ इस कार्रवाई के आधार पर अनियमितता साबित होने की जानकारी सामने आई है।
जांच के अगले चरण पर टिकी नजरें
सुंदर शाम अरोड़ा से जुड़े मामले में होशियारपुर से लेकर मोहाली तक हुई कार्रवाई के बाद अब जांच के अगले चरण को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि अधिकारियों की ओर से जुटाए गए दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का आपस में मिलान किया जाएगा। इसके आधार पर संबंधित कंपनियों, संपत्तियों और व्यक्तियों के बीच कारोबारी संबंधों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास होगा।
जांच का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन में कथित अनियमितताओं और उनसे जुड़े संभावित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को सामने लाना है। आने वाले दिनों में दस्तावेजों की पड़ताल और वित्तीय लेनदेन के विश्लेषण से इस मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में ईडी की अगली कार्रवाई और जांच एजेंसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।




