2011 के आंकड़ों से तय आरक्षण पर उठे सवाल, वार्ड-32 के पार्षद हाईकोर्ट जाने की तैयारी में
चंडीगढ़। नगर निगम चुनाव के लिए वार्डों के आरक्षण को लेकर जारी किए गए ड्राॅ के बाद विवाद गहराने लगा है। वार्डों को आरक्षित करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया गया है, लेकिन बीते करीब डेढ़ दशक में शहर की जनसंख्या के साथ-साथ वार्डों की सामाजिक और भौगोलिक संरचना में भी बड़ा बदलाव आया है। कई बस्तियां हट चुकी हैं, हजारों परिवारों का पुनर्वास दूसरी जगह किया जा चुका है और इसके चलते अनुसूचित जाति की आबादी का वितरण भी बदल गया है। ऐसे में पुराने आंकड़ों के आधार पर मौजूदा वार्डों का आरक्षण…
