किसान को प्रयोगशाला न बनाएं; CM मान बोले- पहले खुद परीक्षण करें फिर दें सलाह

किसान को प्रयोगशाला न बनाएं; CM मान बोले- पहले खुद परीक्षण करें फिर दें सलाह

लुधियाना: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कृषि वैज्ञानिकों और शोध संस्थानों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि किसानों की खेती को प्रयोगशाला नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी नई फसल किस्म, बीज, कृषि तकनीक या दवा को किसानों तक पहुंचाने से पहले उसका पूरी तरह वैज्ञानिक परीक्षण किया जाना चाहिए। यदि किसी नई तकनीक का पर्याप्त परीक्षण नहीं हुआ है और उसे सीधे किसानों के खेतों में लागू कर दिया जाता है, तो उसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (Punjab Agricultural University – PAU) में आयोजित किसान मेले को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शोधकर्ताओं और किसानों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि पंजाब का किसान हमेशा नई तकनीक अपनाने के लिए तैयार रहता है, लेकिन उसके विश्वास को बनाए रखना भी वैज्ञानिक संस्थानों और सरकार की जिम्मेदारी है। किसानों को ऐसी तकनीक ही उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जिसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा पहले से पूरी तरह जांची जा चुकी हो।

नई तकनीक पर पहले वैज्ञानिक करें परीक्षण

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि कृषि अनुसंधान का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, उत्पादन में सुधार करना और खेती को अधिक टिकाऊ बनाना है। लेकिन यदि किसी नई तकनीक या बीज का परीक्षण अधूरा हो और उसे सीधे किसानों के खेतों में लागू कर दिया जाए, तो इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि किसी भी नई किस्म, उर्वरक, कीटनाशक या खेती की नई पद्धति को पहले विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्रों और परीक्षण खेतों में पर्याप्त समय तक परखा जाए। जब उसके परिणाम पूरी तरह संतोषजनक हों, तभी उसे किसानों के बीच प्रचारित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और शोध संस्थानों की विश्वसनीयता तभी बनी रहेगी, जब किसानों को दी जाने वाली सलाह पूरी तरह प्रमाणित और व्यावहारिक होगी।

किसानों की शिकायतों का किया उल्लेख

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि कई किसान लगातार यह शिकायत करते रहे हैं कि उनके खेतों में नई तकनीकों या बीजों का सीधे परीक्षण किया जाता है। कई बार अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि किसान अपनी मेहनत, समय और पूंजी लगाकर खेती करता है। ऐसे में यदि किसी नई तकनीक के कारण उसकी फसल खराब हो जाए, तो उसका सीधा असर उसके पूरे परिवार की आय पर पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिकों को यह समझना होगा कि खेती केवल एक प्रयोग नहीं बल्कि किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है। इसलिए किसी भी नई तकनीक को किसानों तक पहुंचाने से पहले उसकी पूरी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होनी चाहिए।

बीज खराब होने का उदाहरण देकर जताई नाराजगी

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संबोधन में एक उदाहरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कुछ किसानों ने कृषि विश्वविद्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए बीजों की बुवाई की थी। लेकिन बाद में उन फसलों में कीट लग गया और किसानों की पूरी फसल प्रभावित हो गई।

जब प्रभावित किसान अपनी शिकायत लेकर विश्वविद्यालय पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि विश्वविद्यालय के परीक्षण खेतों में लगी फसल भी उसी समस्या से प्रभावित हुई है।

इस पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि केवल यह कह देना पर्याप्त नहीं है कि विश्वविद्यालय की फसल भी खराब हुई है। यदि किसी तकनीक या बीज से किसानों को नुकसान हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों से बचने के लिए शोध और परीक्षण की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत तथा पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।

जवाबदेही तय करने की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कृषि अनुसंधान से जुड़े संस्थानों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। यदि किसी बीज, तकनीक या कृषि उत्पाद की सिफारिश की जाती है और बाद में उससे किसानों को नुकसान होता है, तो संबंधित एजेंसियों और संस्थानों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसानों का विश्वास जीतना सरकार और वैज्ञानिक संस्थानों दोनों की जिम्मेदारी है। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह पर भरोसा करके नई तकनीक अपनाता है, तो उसके परिणामों के प्रति भी जवाबदेही होनी चाहिए।

बदल रही है खेती की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। आज आधुनिक मशीनरी, ड्रोन तकनीक, सटीक सिंचाई प्रणाली, उन्नत बीज, डिजिटल कृषि सेवाएं और वैज्ञानिक खेती जैसी नई अवधारणाएं तेजी से विकसित हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि पंजाब को कृषि क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। लेकिन यह बदलाव वैज्ञानिक प्रमाणों और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर ही होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई तकनीक का उद्देश्य किसानों का उत्पादन बढ़ाना, लागत कम करना और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना होना चाहिए।

किसानों को दिन में बिजली देने की योजना

भगवंत मान ने कहा कि राज्य सरकार खेती को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में भी सरकार लगातार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिन में बिजली मिलने से किसानों को रात के समय खेतों में जाने की आवश्यकता कम होगी। इससे उनकी सुरक्षा भी बढ़ेगी और सिंचाई कार्य अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि नियमित बिजली आपूर्ति से खेती की लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।

कृषि विश्वविद्यालय को मिलेगा और मजबूत आधार

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान लंबे समय से किसानों को नई जानकारी, उन्नत बीज, आधुनिक खेती के तरीके और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराता रहा है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रयोगशालाएं, आधुनिक अनुसंधान सुविधाएं और उन्नत कृषि अनुसंधान केंद्र विकसित किए जाएंगे, ताकि वैज्ञानिक बेहतर गुणवत्ता वाला शोध कर सकें और किसानों तक अधिक उपयोगी तकनीक पहुंचाई जा सके।

डिजिटल माध्यम से भी किसानों तक पहुंचेगी जानकारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में डिजिटल तकनीक के माध्यम से किसानों तक कृषि संबंधी जानकारी तेजी से पहुंचाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि अब किसानों को नई किस्मों के बीज, उर्वरकों के सही उपयोग, कीट प्रबंधन, मौसम आधारित सलाह, आधुनिक खेती की तकनीकों और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन माध्यमों से भी उपलब्ध कराई जा रही है।

इससे किसानों को बार-बार संस्थानों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी और वे घर बैठे विशेषज्ञों की सलाह प्राप्त कर सकेंगे।

कृषि अनुसंधान और किसानों के बीच मजबूत हो तालमेल

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि अनुसंधान तभी सफल माना जाएगा, जब उसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। इसके लिए वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विभाग और किसानों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि किसानों के अनुभवों को भी शोध प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। खेतों में आने वाली वास्तविक समस्याओं को समझकर यदि अनुसंधान किया जाएगा तो उसका लाभ अधिक प्रभावी तरीके से किसानों तक पहुंचेगा।

उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों के साथ नियमित संवाद बढ़ाने, खेतों का दौरा करने और उनकी समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने की अपील की।

किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि करना है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, बाजार तक बेहतर पहुंच और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार तभी सफल होंगे, जब किसान उन पर विश्वास करेंगे। इसलिए प्रत्येक नई तकनीक को किसानों तक पहुंचाने से पहले उसकी गुणवत्ता, प्रभावशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि वैज्ञानिक संस्थान, सरकार और किसान मिलकर काम करें तो पंजाब एक बार फिर कृषि क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकता है।

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