NRI पंजाबियों की समस्याओं पर सरकार का फोकस, लुधियाना में मंत्री रवजोत सिंह ने सुनीं शिकायतें; जमीन विवाद और प्रशासनिक मुद्दे रहे प्रमुख

NRI पंजाबियों की समस्याओं पर सरकार का फोकस, लुधियाना में मंत्री रवजोत सिंह ने सुनीं शिकायतें; जमीन विवाद और प्रशासनिक मुद्दे रहे प्रमुख

लुधियाना: विदेशों में बसे पंजाबियों की समस्याओं और शिकायतों के समाधान को लेकर पंजाब सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में लुधियाना में आयोजित एनआरआई मिलनी कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री रवजोत सिंह पहुंचे और विदेशों में रहने वाले पंजाबियों की समस्याएं सुनीं। कार्यक्रम में करीब 40 से 50 एनआरआई शामिल हुए, जिन्होंने जमीन विवाद, पारिवारिक मामलों, प्रशासनिक परेशानियों और कानूनी मामलों से जुड़ी अपनी शिकायतें मंत्री के सामने रखीं।

मंत्री ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि एनआरआई से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि विदेशों में रहने वाले पंजाबियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी शिकायतों का समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में शिकायतें जमीन से जुड़े विवादों को लेकर सामने आईं। कई एनआरआई ने बताया कि वे वर्षों से अपनी संपत्ति और पारिवारिक मामलों को लेकर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझे हुए हैं। उनका कहना था कि विदेशों में रहने के कारण उनके लिए बार-बार पंजाब आकर मामलों की पैरवी करना मुश्किल होता है, जिससे परेशानियां और बढ़ जाती हैं।

मंत्री रवजोत सिंह ने कहा कि एनआरआई पंजाब की अर्थव्यवस्था और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले पंजाबियों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनकी संपत्ति, अधिकारों और शिकायतों की सुनवाई के लिए सरकार पूरी तरह गंभीर है।

कार्यक्रम में पुलिस प्रशासन, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मौके पर ही कई शिकायतों की जानकारी ली और उन्हें दर्ज किया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मामलों की समीक्षा कर जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पंजाब की ओर से भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनता से जुड़ी शिकायतों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खासकर एनआरआई मामलों को लेकर प्रशासन को संवेदनशील रवैया अपनाने की जरूरत है क्योंकि कई प्रवासी लंबे समय बाद अपनी समस्याएं लेकर राज्य में आते हैं।

एनआरआई मिलनी के दौरान कुछ प्रवासियों ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। उनका आरोप था कि कई बार गंभीर मामलों को निचले स्तर के अधिकारियों के पास भेज दिया जाता है, जहां पर्याप्त निगरानी नहीं होने के कारण समाधान में देरी होती है।

एक एनआरआई ने बताया कि जमीन विवाद को लेकर वह लंबे समय से अदालतों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई कानूनी प्रक्रियाओं के बावजूद मामला पूरी तरह हल नहीं हो पाया है। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में एक मजबूत निगरानी व्यवस्था की जरूरत है, ताकि प्रवासियों की शिकायतों को समय पर ट्रैक किया जा सके और उन्हें उचित समाधान मिल सके।

एनआरआई प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की कि प्रवासियों से जुड़े मामलों के लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक शिकायत की समय सीमा तय होनी चाहिए और उसकी प्रगति की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए। इससे प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही बढ़ेगी और लोगों को राहत मिलेगी।

कार्यक्रम में मौजूद एनआरआई लोगों ने यह भी कहा कि विदेशों में रहने वाले पंजाबियों को अक्सर संपत्ति, पारिवारिक विवाद और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मामलों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों के लिए अलग से प्रभावी व्यवस्था तैयार की जाए ताकि प्रवासी पंजाबियों का भरोसा मजबूत हो सके।

मंत्री रवजोत सिंह ने आश्वासन दिया कि सरकार एनआरआई समुदाय की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केवल शिकायतें सुनना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनका समाधान सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों को जवाबदेह बनाया जाएगा।

इस दौरान मंत्री ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का बल प्रयोग उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।

रवजोत सिंह ने कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ समझने की जरूरत है। परीक्षा व्यवस्था या अन्य शैक्षणिक विषयों को लेकर यदि छात्रों की कोई मांग है तो सरकार और संबंधित संस्थानों को उनके साथ बातचीत कर समाधान तलाशना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है। ऐसे मामलों में प्रशासन को संयम और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए ताकि किसी भी पक्ष को नुकसान न पहुंचे।

किसानों के मुद्दों पर भी कैबिनेट मंत्री ने अपनी बात रखी। किसानों के आंदोलनों और भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़े फैसले किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत के जरिए ही संभव है और सभी पक्षों को एक-दूसरे की चिंताओं को समझना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने केंद्र और संबंधित पक्षों से अपील की कि किसानों से जुड़े मुद्दों पर संवाद बनाए रखा जाए और सहमति के रास्ते तलाशे जाएं।

लुधियाना में आयोजित एनआरआई मिलनी कार्यक्रम के माध्यम से सरकार ने प्रवासी पंजाबियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की कोशिश की। कार्यक्रम में सामने आई शिकायतों से यह स्पष्ट हुआ कि जमीन विवाद, पारिवारिक मामले और प्रशासनिक देरी अभी भी एनआरआई समुदाय के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।

सरकार की ओर से अब इन मामलों की समीक्षा और समाधान की प्रक्रिया तेज करने की बात कही गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतों पर गंभीरता से काम किया जाए और प्रवासियों को समय पर राहत मिले।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी एनआरआई मिलनी कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पंजाब के लाखों लोग विदेशों में रहते हैं और राज्य के सामाजिक तथा आर्थिक विकास में उनका बड़ा योगदान है। ऐसे में सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह प्रवासी समुदाय के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करे।

लुधियाना में हुए इस कार्यक्रम के बाद अब उम्मीद है कि एनआरआई शिकायतों के निपटारे के लिए प्रशासनिक स्तर पर नई पहल देखने को मिल सकती है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रवासी पंजाबियों की समस्याओं को सीधे सुना जाएगा और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।