फोर्टिस अस्पताल के बाहर भाजपा नेता ने पंजाब सरकार से मांगा स्पष्टीकरण, कहा- मरीजों को पहले से स्पष्ट हो कि किन अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज
मोहाली। पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत जारी किए जा रहे स्वास्थ्य कार्डों को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सवाल खड़े किए हैं। सोमवार को मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल पहुंचे बिट्टू ने अस्पताल के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए दावा किया कि योजना के कार्ड लेकर इलाज के लिए पहुंच रहे कुछ मरीजों को अस्पताल में उपचार की सुविधा नहीं मिल रही है।
बिट्टू ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री भगवंत मान स्वयं इसी अस्पताल में इलाज करा सकते हैं तो आम लोगों को जारी किए गए स्वास्थ्य कार्ड यहां क्यों स्वीकार नहीं किए जा रहे। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना का बड़े स्तर पर प्रचार किया जा रहा है और लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए कार्ड जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में जरूरत के समय यदि मरीज को संबंधित अस्पताल में इलाज नहीं मिलता तो योजना की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, फोर्टिस अस्पताल में कार्ड स्वीकार नहीं किए जाने को लेकर बिट्टू की ओर से लगाए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया।
लुधियाना समेत कई शहरों से मरीज आने का दावा
बिट्टू ने दावा किया कि फोर्टिस अस्पताल में पंजाब के अलग-अलग शहरों से मरीज उपचार के लिए पहुंचे थे। इनमें लुधियाना समेत अन्य शहरों के मरीज भी शामिल थे। उनके मुताबिक, इन मरीजों के पास मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के कार्ड मौजूद थे, लेकिन अस्पताल में उन कार्डों के आधार पर इलाज नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि किसी मरीज को यदि सरकार की स्वास्थ्य योजना का कार्ड मिलता है तो वह यह उम्मीद करता है कि बीमारी की स्थिति में उसे योजना के तहत निर्धारित अस्पताल में उपचार की सुविधा मिलेगी। मरीज इसी भरोसे पर दूसरे शहर से बड़े अस्पताल तक पहुंचता है। यदि वहां कार्ड स्वीकार नहीं किया जाता तो उसके सामने तत्काल इलाज और भुगतान दोनों की समस्या खड़ी हो जाती है।
भाजपा नेता ने कहा कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरत से जुड़ी योजना में ऐसी स्थिति मरीजों के लिए गंभीर परेशानी पैदा कर सकती है। उनके मुताबिक, मरीज और उसके परिवार को यह पहले से पता होना चाहिए कि कार्ड किन अस्पतालों में मान्य है और किन अस्पतालों में योजना के तहत इलाज उपलब्ध नहीं है।
सरकार बताए- किन अस्पतालों में मान्य हैं कार्ड
बिट्टू ने पंजाब सरकार से योजना के तहत उपचार उपलब्ध कराने वाले अस्पतालों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को सार्वजनिक रूप से यह जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के लाभार्थी किन अस्पतालों में कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं।
उनका कहना था कि यदि किसी अस्पताल में योजना का कार्ड स्वीकार नहीं किया जाता तो इसकी जानकारी मरीजों को पहले से मिलनी चाहिए। इससे मरीज बिना जानकारी के एक शहर से दूसरे शहर में इलाज के लिए जाने और बाद में अस्पताल पहुंचकर परेशानी का सामना करने से बच सकते हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य योजना से जुड़े नियमों और अस्पतालों की सूची को लेकर स्पष्टता जरूरी है। यदि किसी अस्पताल का योजना के तहत सूचीबद्ध होना या उससे बाहर होना किसी निर्धारित प्रक्रिया पर निर्भर करता है तो सरकार को इसकी जानकारी भी लोगों तक पहुंचानी चाहिए।
बड़े निजी अस्पतालों को लेकर भी उठाया सवाल
भाजपा नेता ने दावा किया कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के कार्डों को लेकर समस्या केवल फोर्टिस अस्पताल तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब के कई अन्य बड़े अस्पतालों में भी इन कार्डों से इलाज नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
बिट्टू ने सरकार से पूछा कि यदि राज्य के प्रमुख अस्पतालों में योजना के लाभार्थियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है तो फिर स्वास्थ्य कार्ड जारी करने का उद्देश्य किस तरह पूरा होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बारे में स्पष्ट आंकड़े और जानकारी सामने रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी स्वास्थ्य योजना की सफलता का आकलन केवल कार्ड जारी करने या लाभार्थियों की संख्या बताने से नहीं किया जा सकता। वास्तविक स्थिति यह है कि जब किसी व्यक्ति को गंभीर बीमारी या उपचार की आवश्यकता हो तो उसे योजना के तहत समय पर और निर्धारित सुविधा के अनुसार इलाज मिलना चाहिए।
प्रचार से आगे बढ़कर उपचार की सुविधा सुनिश्चित करने की मांग
बिट्टू ने कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं का प्रचार करना सरकार की जिम्मेदारी का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा जब मरीज अस्पताल पहुंचने पर इलाज हासिल कर सके।
उन्होंने कहा कि यदि लोगों को कार्ड दिए जा रहे हैं और सरकार योजना को लेकर बड़े स्तर पर जानकारी दे रही है, तो उसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संबंधित अस्पतालों में योजना की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू हो। मरीजों को कागजी प्रक्रिया, अस्पतालों की सूची या भुगतान संबंधी नियमों को लेकर अंतिम समय पर परेशान नहीं होना चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा कि बीमारी की स्थिति में परिवार पहले ही मानसिक तनाव में होता है। यदि इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने के बाद कार्ड स्वीकार नहीं किया जाता तो मरीज और उसके परिजनों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है।
मुख्यमंत्री के इलाज का हवाला देकर सवाल
बिट्टू ने अपने बयान में मुख्यमंत्री भगवंत मान के इसी अस्पताल में इलाज कराने का उल्लेख करते हुए सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री को इस अस्पताल में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकती है तो आम लोगों को जारी स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से यहां इलाज की सुविधा क्यों नहीं मिल रही।
उन्होंने इस सवाल के जरिए सरकारी स्वास्थ्य योजना और बड़े निजी अस्पतालों के बीच व्यवस्था को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। उनके मुताबिक, सरकार को यह बताना चाहिए कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत किस तरह अस्पतालों को जोड़ा गया है और लाभार्थियों के उपचार के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और आम नागरिक के लिए चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था को लेकर अलग-अलग मानक होने का सवाल नहीं उठना चाहिए। यदि कोई योजना आम लोगों के लिए बनाई गई है तो उसके तहत निर्धारित अस्पतालों में लाभार्थियों को वास्तविक सुविधा मिलनी चाहिए।
दूर-दराज से आने वाले मरीजों की परेशानी
बिट्टू ने कहा कि स्वास्थ्य योजना के लाभार्थी अक्सर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से बड़े अस्पतालों का रुख करते हैं। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को कई बार अपने शहर से बाहर जाना पड़ता है। ऐसे में स्वास्थ्य कार्ड उनके लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि मरीज अपने कार्ड के भरोसे दूसरे शहर के अस्पताल तक पहुंचता है और वहां उसे पता चलता है कि कार्ड मान्य नहीं है, तो परिवार के सामने तत्काल इलाज की व्यवस्था करना चुनौती बन जाता है।
ऐसी स्थिति में मरीज को या तो निजी तौर पर उपचार का खर्च उठाना पड़ सकता है या फिर उसे दूसरे अस्पताल की तलाश करनी पड़ सकती है। इससे समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। इसलिए योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों और उपलब्ध उपचार की जानकारी पहले से सार्वजनिक होना जरूरी है।
अस्पतालों की सूची और नियम स्पष्ट करने की मांग
भाजपा नेता ने सरकार से मांग की कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत शामिल अस्पतालों की अद्यतन सूची सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि किन बीमारियों और प्रक्रियाओं के लिए किस अस्पताल में योजना का लाभ लिया जा सकता है।
उनका कहना है कि केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि राज्य के लोगों को स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। लाभार्थी को यह जानकारी भी होनी चाहिए कि कार्ड का उपयोग कहां और किस प्रक्रिया के लिए किया जा सकता है।
बिट्टू ने कहा कि यदि किसी अस्पताल के साथ योजना को लेकर अनुबंध, भुगतान या अन्य प्रशासनिक कारणों से कोई समस्या है तो सरकार को उसकी जानकारी भी सामने रखनी चाहिए। इससे मरीजों को गलत उम्मीद के आधार पर अस्पताल जाने से बचाया जा सकेगा।
योजना की जमीनी स्थिति पर जवाब मांगा
बिट्टू ने पंजाब सरकार से मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना की जमीनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की किसी भी पहल का अंतिम उद्देश्य मरीज को समय पर इलाज उपलब्ध कराना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कार्ड लोगों के लिए तभी उपयोगी है जब बीमारी के समय अस्पताल में उसे स्वीकार किया जाए और लाभार्थी को योजना के नियमों के अनुसार उपचार मिल सके। यदि कार्ड होने के बावजूद मरीज को इलाज के लिए निजी भुगतान करना पड़े तो योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठेंगे।
उन्होंने सरकार से मांग की कि फोर्टिस समेत पंजाब के बड़े अस्पतालों में योजना के कार्ड स्वीकार किए जाने की स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही यदि किसी अस्पताल में कार्ड से इलाज उपलब्ध नहीं है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जाए।
सरकार के जवाब पर रहेगी नजर
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना को लेकर भाजपा नेता की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद अब सरकार और संबंधित अस्पताल प्रशासन के स्पष्टीकरण पर नजर रहेगी। बिट्टू ने जहां मरीजों की शिकायतों का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं, वहीं इन दावों की वास्तविक स्थिति संबंधित अस्पतालों और सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी से स्पष्ट होगी।
स्वास्थ्य योजना से जुड़े किसी भी विवाद में यह महत्वपूर्ण होगा कि लाभार्थियों को योजना के तहत उपलब्ध अस्पतालों, उपचार प्रक्रियाओं और पात्रता संबंधी नियमों की स्पष्ट जानकारी मिले। इससे मरीजों को इलाज के समय अनिश्चितता से बचाया जा सकता है।
बिट्टू ने अंत में कहा कि सरकार को केवल स्वास्थ्य कार्ड जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कार्ड धारक मरीज को जरूरत के समय वास्तविक उपचार सुविधा भी मिले। उनके मुताबिक, स्वास्थ्य सुरक्षा का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब योजना का लाभ कागजों से निकलकर अस्पतालों तक और वहां से मरीज तक पहुंचे।




