पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है। मान ने कहा कि जब भी किसी राज्य में चुनाव नजदीक आते हैं, विपक्ष के प्रमुख नेताओं को जांच और गिरफ्तारी के जरिए निशाना बनाने की कोशिश शुरू हो जाती है। उन्होंने इस तरह की राजनीति को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में भारतीय जनता पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत नहीं कर पा रही है और इसी वजह से आम आदमी पार्टी के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। ईडी की कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस मामले को आधार बनाया जा रहा है, उससे जुड़े समय में जैन पहले से ही जेल में थे। मान ने उम्मीद जताई कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और अदालत से उन्हें न्याय मिलेगा।
भगवंत मान ने केंद्रीय एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में एक ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें चुनाव से कुछ महीने पहले विपक्षी दलों के बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है। इसके बाद लंबे समय तक जांच चलती रहती है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए नहीं होना चाहिए।
मान ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं संजय सिंह और मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनावों से पहले विपक्षी नेताओं को कानूनी कार्रवाई के नाम पर अलग-थलग करने की कोशिश लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए अलग-अलग स्तरों पर दबाव बनाया जा रहा है।
ईडी की ओर से भेजे गए पत्रों और उनमें लगाए गए आरोपों पर भी मुख्यमंत्री ने सवाल उठाए। उनका कहना था कि केंद्रीय एजेंसी की ओर से कई बार पत्र भेजे जाते हैं, लेकिन उनमें लगाए गए आरोपों को लेकर पर्याप्त सच्चाई सामने नहीं आती। मान ने कहा कि विपक्षी दलों के पास राजनीतिक रूप से अपनी बात रखने और जनता के बीच जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी को अपनी ईमानदारी साबित करने के लिए किसी राजनीतिक दल या नेता से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है।
दरअसल, ईडी ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को पत्र भेजकर निजी व्यक्ति नितिन गोहल और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने का आधार बताया है। एजेंसी के अनुसार, धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे भ्रष्टाचार और अन्य कानूनों के तहत संज्ञेय अपराध होने की आशंका सामने आती है। ईडी ने इसी आधार पर पंजाब पुलिस से आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम उठाने को कहा है।
एजेंसी की जांच में नितिन गोहल की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ईडी का दावा है कि गोहल ने मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी राजबीर घुम्मण के साथ अपने संपर्कों का कथित तौर पर इस्तेमाल सरकारी कामकाज को प्रभावित करने के लिए किया। जांच एजेंसी के मुताबिक, सरकारी विभागों में तबादलों, तैनातियों और अन्य सुविधाओं से जुड़े मामलों में कथित तौर पर बिचौलिये के रूप में काम किया गया।
ईडी ने अपनी जांच में यह भी आरोप लगाया है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए सरकारी फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई। एजेंसी के अनुसार, इन गतिविधियों से लगभग दो करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित आय सामने आई है। इन आरोपों के आधार पर पंजाब पुलिस से प्राथमिकी दर्ज करने और मामले में आगे की कार्रवाई करने की मांग की गई है।
हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ईडी के आरोपों को राजनीतिक नजरिए से देखा है। उनका कहना है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई को चुनावी राजनीति से अलग करके देखा जाना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोप अदालत में साबित होने तक उसे दोषी नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधियों को दबाने के बजाय जांच एजेंसियों को कानून के मुताबिक स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए।
पंजाब सरकार की ओर से अब ईडी के पत्र और उसमें दिए गए तथ्यों का कानूनी परीक्षण किया जा रहा है। सरकार यह तय करेगी कि मामले में आगे किस तरह की कार्रवाई की जानी है। दूसरी ओर, ईडी के आरोपों के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के मुद्दों पर राजनीति करती रहेगी और चुनाव के समय किसी भी तरह के दबाव का सामना करने के लिए तैयार है। मान के मुताबिक, लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है और राजनीतिक दलों को जांच एजेंसियों के बजाय जनता की अदालत में अपना पक्ष रखना चाहिए।
ईडी की कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री और भाजपा के बीच बढ़ती बयानबाजी आने वाले समय में पंजाब की राजनीति को और गरमा सकती है। एक ओर जांच एजेंसी अपने आरोपों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं मुख्यमंत्री इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। अब इस मामले में पंजाब पुलिस की कार्रवाई और अदालत में होने वाली आगे की कार्यवाही पर सभी की नजर रहेगी।




