पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने लंबित महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सरकारी कर्मचारियों के समर्थन में पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपने लाइव संवाद कार्यक्रम ‘वडिंग विद वॉरियर्स’ के चौथे सत्र में वडिंग ने कहा कि सरकारी कर्मचारी अपने लिए किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि लंबे समय से लंबित अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
राजा वडिंग ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ता कर्मचारियों की इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं और जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिलता, तब तक उनका समर्थन जारी रहेगा। उन्होंने कर्मचारियों से संघर्ष जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों को आखिरकार सफलता मिलती है।
वडिंग ने अपने संबोधन में कहा कि कर्मचारियों की मांगों को नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को उनके साथ बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य का प्रशासनिक ढांचा सरकारी कर्मचारियों के दम पर चलता है और सरकार के लिए कर्मचारियों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना संभव नहीं होगा।
उन्होंने कर्मचारियों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हैं, वही अंततः जीत हासिल करते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी और उनके मुद्दों को राजनीतिक तथा सार्वजनिक मंचों पर लगातार उठाती रहेगी।
पुरानी पेंशन योजना को लेकर पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए वडिंग ने सवाल किया कि यदि सरकार की वास्तव में ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने की मंशा नहीं थी तो इसके संबंध में अधिसूचना जारी करने की जरूरत ही क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कर्मचारियों से किए गए वादों को पूरा करने के बजाय उन्हें लगातार इंतजार कराया है।
वडिंग ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों के साथ टकराव का रास्ता अपनाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब का सरकारी तंत्र कर्मचारियों के सहयोग के बिना प्रभावी ढंग से नहीं चल सकता। उनके मुताबिक कर्मचारियों को नाराज करने से प्रशासनिक कामकाज पर सीधा असर पड़ेगा और इसका खामियाजा आम जनता को भी भुगतना पड़ सकता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार पर कर्मचारियों को आंदोलन से पीछे हटाने के लिए दबाव बनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई की चेतावनी देकर कर्मचारियों को डराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन वे अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को सीधे चुनौती देते हुए वडिंग ने कहा कि यदि सरकार को कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी है तो वह करके देख ले। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की कार्रवाई सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकती है और मौजूदा सरकार अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही सत्ता से बाहर हो सकती है।
वडिंग ने 2022 के विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों ने आम आदमी पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब वही कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन कर्मचारियों के समर्थन से सरकार सत्ता में आई, उनकी मांगों को पूरा करने में सरकार को परेशानी क्यों हो रही है।
अपने संवाद के दौरान राजा वडिंग ने पंजाब सरकार की आर्थिक नीतियों और वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ कर्मचारियों के लंबित बकाये और विभिन्न वित्तीय लाभों का भुगतान नहीं कर रही है, वहीं दूसरी ओर अन्य मदों में बड़ी रकम खर्च की जा रही है।
वडिंग ने दावा किया कि सरकारी कर्मचारियों से जुड़े लगभग 14,000 करोड़ रुपये के बकाये और विभिन्न लाभों का भुगतान लंबित है। उन्होंने सरकार द्वारा लिए जा रहे कर्ज और सलाहकारों पर कथित तौर पर किए जा रहे खर्च को लेकर भी सवाल उठाया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने करीब 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है और इसी दौरान सलाहकारों को कथित तौर पर लगभग 341 करोड़ रुपये दिए गए। उन्होंने सरकार से वित्तीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने की मांग करते हुए पूछा कि जब राज्य के कर्मचारियों के वित्तीय लाभ लंबित हैं तो दूसरी मदों में इतनी बड़ी रकम खर्च करने का औचित्य क्या है।
वडिंग ने पंजाब पर बढ़ते कर्ज को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में राज्य पर करीब 2.85 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर लगभग 4.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बढ़ते कर्ज के बावजूद राज्य की वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा।
कांग्रेस नेता ने सरकार के विकास संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मालवा नहर के निर्माण, नए मेडिकल कॉलेजों तथा स्कूलों और कॉलेजों से संबंधित घोषणाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन इनमें से कई वादे अब भी पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाए हैं।
वडिंग ने कहा कि पंजाब की जनता को घोषणाओं के बजाय वास्तविक परिणाम चाहिए। उन्होंने सरकार से पूछा कि जिन योजनाओं और परियोजनाओं को लेकर बड़े दावे किए गए थे, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है और आम लोगों को उनका लाभ कब तक मिलेगा।
उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी सरकार के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। वडिंग ने कहा कि कांग्रेस को जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाते हुए पंजाब में एक स्थिर और जवाबदेह सरकार के लिए संघर्ष करना होगा।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि सरकार के खिलाफ लड़ाई केवल राजनीतिक सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि पंजाब के हितों और लोगों के अधिकारों के लिए होनी चाहिए। कर्मचारियों, किसानों, युवाओं और अन्य वर्गों से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच ले जाना कांग्रेस की प्राथमिकता होनी चाहिए।
अपने संबोधन के दौरान वडिंग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भी जमकर सराहना की। उन्होंने राहुल गांधी को भारत और पंजाब की राजनीति में नई उम्मीद बताया। वडिंग ने कहा कि तमाम राजनीतिक और व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद राहुल गांधी लगातार संघर्ष करते रहे हैं और उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में भी अपनी लड़ाई जारी रखी।
उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से राहुल गांधी के संघर्ष से प्रेरणा लेने की अपील की। वडिंग के मुताबिक राजनीतिक परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, कार्यकर्ताओं को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और जनता से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाते रहना चाहिए।
राजा वडिंग ने कहा कि पंजाब में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार मेहनत की जरूरत है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आम लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने और सरकार की नीतियों तथा कामकाज से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया।
कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर वडिंग का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी कर्मचारी लंबित डीए बकाये और पुरानी पेंशन योजना सहित विभिन्न मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर उठाते हुए मान सरकार की कर्मचारी नीति और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।
वडिंग के बयान से साफ है कि कांग्रेस आने वाले दिनों में कर्मचारियों के मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में है। पार्टी इसे कर्मचारियों के अधिकारों के साथ-साथ सरकार की कथित वित्तीय प्राथमिकताओं और चुनावी वादों के बीच अंतर के मुद्दे से जोड़ रही है।
राजा वडिंग ने अंत में कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों की आवाज दबने नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है और जब तक कर्मचारियों को उनका अधिकार नहीं मिलता, तब तक पार्टी उनके संघर्ष को समर्थन देती रहेगी। साथ ही उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पंजाब में राजनीतिक बदलाव के लिए लगातार संघर्ष करते रहने का आह्वान किया।




