पनबस-पीआरटीसी कर्मचारियों की मांगों पर सरकार का बड़ा फैसला, 15 अक्टूबर तक समाधान के निर्देश

पनबस-पीआरटीसी कर्मचारियों की मांगों पर सरकार का बड़ा फैसला, 15 अक्टूबर तक समाधान के निर्देश

पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी में लंबे समय से ठेके पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की मांगों को लेकर सोमवार को सरकार और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच अहम बैठक हुई। वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने कर्मचारियों की जायज मांगों का समयबद्ध तरीके से समाधान करने के लिए 15 अक्टूबर की समय-सीमा तय की है।

बैठक में सबसे अहम मुद्दा लंबे समय से ठेका व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने का रहा। सरकार की ओर से विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में जरूरी प्रक्रिया तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में यह भी तय किया गया कि आउटसोर्स और कांट्रैक्ट कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाकर उनके समाधान के लिए अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग वर्मा, सचिव परिवहन और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों की मांगें सरकार के सामने रखीं।

10 दिन में तैयार होगी नियमितीकरण से जुड़ी प्रक्रिया

बैठक में ठेका कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर सरकार की ओर से महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए। यूनियन प्रतिनिधियों के अनुसार, वर्ष 2026 की नीति के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों को कांट्रैक्ट व्यवस्था में शामिल करने की प्रक्रिया को अगले 10 दिनों के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा उन कर्मचारियों का मामला भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया, जो पिछले 10 से 15 वर्षों से लगातार परिवहन विभाग की सेवाओं में ठेके के आधार पर काम कर रहे हैं। यूनियन की ओर से लंबे समय से मांग की जा रही है कि इतने लंबे समय से विभाग को सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए और उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

मंत्री की ओर से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऐसे कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित पूरी फाइल तैयार कर आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए। इस प्रक्रिया को भी 10 दिनों के भीतर आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि जोड़ने की मांग

कर्मचारियों की एक अन्य प्रमुख मांग उनकी सेवा अवधि को लेकर है। यूनियन ने मांग रखी कि कर्मचारियों ने जिस तारीख से विभाग में सेवाएं शुरू की हैं, उनकी सेवा अवधि की गणना उसी समय से की जाए।

कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि कई कर्मचारी लंबे समय से विभाग के लिए लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन अलग-अलग प्रकार की नियुक्ति और अनुबंध व्यवस्था के कारण उनकी सेवा अवधि का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाता। बैठक में इस मुद्दे पर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

सरकार की ओर से कर्मचारियों से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और सेवा संबंधी जानकारी को एकत्र करने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत परिवहन विभाग को सभी कांट्रैक्ट कर्मचारियों का पूरा डाटा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

बर्खास्त कर्मचारियों के मामलों की होगी समीक्षा

बैठक में उन कर्मचारियों का मुद्दा भी उठाया गया, जिनकी सेवाएं विभागीय कार्रवाई के बाद समाप्त कर दी गई हैं। यूनियन ने ऐसे मामलों की दोबारा समीक्षा करने की मांग की।

मंत्री ने सचिव परिवहन को निर्देश दिया कि जिन कर्मचारियों के मामलों में पुनर्विचार की गुंजाइश है, उनकी फाइलों की जांच की जाए। पात्र पाए जाने वाले कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लेने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।

इसके लिए संबंधित अधिकारियों को 15 दिन के भीतर प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे लंबे समय से अपनी सेवाएं बहाल होने की उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है।

बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक जल्द बुलाने के निर्देश

कुछ मांगें ऐसी हैं जिन पर विभागीय स्तर पर फैसला लेने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मंजूरी जरूरी है। इसे देखते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग वर्मा को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक जल्द बुलाने के निर्देश दिए हैं।

सरकार का उद्देश्य है कि कर्मचारियों की ऐसी मांगें जो बोर्ड की मंजूरी के कारण लंबित हैं, उन्हें जल्द से जल्द निर्णय के स्तर तक पहुंचाया जाए। इसके लिए विभाग को मामलों की प्राथमिकता तय करके कार्रवाई करने को कहा गया है।

मंत्री ने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और प्रत्येक मामले की समयबद्ध समीक्षा की जाए।

खतरनाक श्रेणी का लाभ देने की मांग

पनबस और पीआरटीसी के ठेका कर्मचारियों ने बैठक में नई नीति से जुड़े कुछ प्रावधानों को भी उनके लिए लागू करने की मांग रखी। यूनियन ने परिवहन विभाग के कर्मचारियों को नई नीति के तहत खतरनाक श्रेणी का लाभ देने की मांग की।

कर्मचारियों का कहना है कि परिवहन सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को कई तरह की जोखिमपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। बस संचालन, तकनीकी कार्य और सड़क पर लंबे समय तक ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों को कई प्रकार के जोखिम उठाने पड़ते हैं। ऐसे में उन्हें संबंधित श्रेणी के तहत मिलने वाले लाभ दिए जाने चाहिए।

इसके साथ ही यूनियन ने तीन वर्ष की निर्धारित सेवा से जुड़े प्रावधानों को भी परिवहन विभाग के कर्मचारियों पर लागू करने की मांग रखी है। इस मामले पर भी सरकार की ओर से विभागीय स्तर पर विचार करने की बात कही गई है।

15 अक्टूबर को फिर आमने-सामने होंगे सरकार और कर्मचारी

बैठक में सरकार की ओर से कर्मचारियों की मांगों को लेकर सकारात्मक रुख सामने आने के बाद 15 अक्टूबर को दोबारा बैठक करने का फैसला किया गया है। इसी तारीख तक कर्मचारियों की जायज मांगों पर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

सरकार के इस आश्वासन के बाद पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने फिलहाल अपने धरने और प्रदर्शन 15 अक्टूबर तक स्थगित करने का फैसला लिया है। यूनियन का कहना है कि सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के आधार पर कर्मचारियों को उम्मीद है कि लंबित मांगों पर इस बार ठोस फैसला होगा।

हालांकि कर्मचारियों के लिए अगली बैठक महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि नियमितीकरण और सेवा संबंधी मांगों पर वास्तविक प्रगति का आकलन उसी समय किया जाएगा।

ठेका व्यवस्था में लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारी

पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी में लंबे समय से बड़ी संख्या में कर्मचारी अलग-अलग श्रेणियों में ठेके और आउटसोर्स व्यवस्था के तहत सेवाएं दे रहे हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से विभाग में काम करने के बावजूद उनकी नौकरी की स्थिरता और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।

कर्मचारी संगठनों की ओर से समय-समय पर नियमितीकरण, समान काम के लिए उचित वेतन, सेवा सुरक्षा और अन्य लाभों की मांग उठाई जाती रही है। सोमवार की बैठक में भी इन्हीं मुद्दों को प्रमुखता से रखा गया।

सरकार की ओर से अब कर्मचारियों का पूरा डाटा तैयार करने का निर्देश दिए जाने से विभाग के पास ठेका और आउटसोर्स व्यवस्था में काम कर रहे कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार होने की उम्मीद है। इसके आधार पर आगे की नीति और निर्णय प्रक्रिया को गति मिल सकती है।

सरकारी आइटीआइ कर्मचारियों की मांगों पर भी चर्चा

बैठक के दौरान सरकारी आइटीआइ में कार्यरत ठेका कर्मचारियों और कांट्रैक्ट इंस्ट्रक्टरों की मांगों पर भी चर्चा हुई। इन कर्मचारियों ने सेवा सुरक्षा, मेहनताने और वेतन बढ़ोतरी समेत कई मुद्दे सरकार के सामने रखे।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में 58 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा का मुद्दा शामिल है। उनका कहना है कि लंबे समय से तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को रोजगार की स्थिरता मिलनी चाहिए, ताकि वे बिना किसी अनिश्चितता के अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।

इसके अलावा उचित मेहनताने और वेतन में बढ़ोतरी की मांग भी रखी गई। कांट्रैक्ट इंस्ट्रक्टरों ने सरकार से कहा कि उनके कार्य और जिम्मेदारियों को देखते हुए वेतनमान में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए।

वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजने के निर्देश

सरकार ने तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कांट्रैक्ट इंस्ट्रक्टरों की वेतन बढ़ोतरी के संबंध में औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर जल्द वित्त विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं।

तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक मुनीश कुमार को इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रस्ताव वित्त विभाग के पास पहुंचने के बाद कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी से संबंधित निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

इससे आइटीआइ में काम कर रहे कांट्रैक्ट इंस्ट्रक्टरों को भी सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जगी है।

सरकार के लिए भी अहम है परिवहन व्यवस्था

पंजाब में रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इन संस्थानों में कर्मचारियों की भूमिका सीधे बस संचालन और यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं से जुड़ी है। ऐसे में कर्मचारियों से जुड़े विवादों का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ सकता है।

इसी कारण सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच नियमित संवाद और लंबित मांगों का समाधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 15 अक्टूबर तक समाधान का लक्ष्य तय किए जाने और उस दिन दोबारा बैठक निर्धारित होने से फिलहाल टकराव की स्थिति टल गई है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार द्वारा तय समय-सीमा के भीतर नियमितीकरण, सेवा अवधि, बहाली और अन्य मांगों को लेकर कितनी प्रगति होती है। यदि तय समय में ठोस निर्णय लिए जाते हैं तो इससे लंबे समय से संघर्ष कर रहे कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। वहीं यदि प्रमुख मांगें फिर लंबित रहती हैं तो कर्मचारी संगठन दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।