युवाओं में तेजी से बढ़ रहा ‘साइलेंट हाई ब्लड प्रेशर’, डॉक्टरों ने दी चेतावनी- छोटी लापरवाही भी बन सकती है जानलेवा

युवाओं में तेजी से बढ़ रहा ‘साइलेंट हाई ब्लड प्रेशर’, डॉक्टरों ने दी चेतावनी- छोटी लापरवाही भी बन सकती है जानलेवा

एक समय था जब हाई ब्लड प्रेशर को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। देशभर के अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे युवा मरीज सामने आ रहे हैं, जिनकी उम्र 25 से 40 वर्ष के बीच है और उन्हें हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है। चिंता की बात यह है कि इनमें से अधिकांश लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि उनका रक्तचाप सामान्य से अधिक बना हुआ है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे “साइलेंट किलर” भी कहते हैं, क्योंकि यह बिना किसी स्पष्ट संकेत के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को लगातार नुकसान पहुंचाता रहता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, घंटों तक बैठे रहकर काम करना, बढ़ता मानसिक दबाव, जंक फूड और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने युवाओं में इस बीमारी का खतरा पहले से कहीं अधिक बढ़ा दिया है। कई मामलों में मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब उन्हें हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) 2023-24 के अनुसार, भारत में 15 वर्ष से अधिक आयु की बड़ी आबादी हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित है। आंकड़े बताते हैं कि करीब 19.4 प्रतिशत महिलाएं और 22.1 प्रतिशत पुरुष या तो इस बीमारी से पीड़ित हैं या फिर इसके नियंत्रण के लिए नियमित रूप से दवाएं ले रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, महानगरों और अन्य शहरी इलाकों में इसकी दर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कहीं ज्यादा देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण बदलती जीवनशैली और कम शारीरिक सक्रियता माना जा रहा है।

कार्डियोलॉजिस्टों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती चरण में मरीज को कोई विशेष परेशानी महसूस नहीं होती। सिरदर्द, चक्कर या कमजोरी जैसे लक्षण भी हर मरीज में दिखाई नहीं देते। ऐसे में व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है, जबकि अंदर ही अंदर उसका हृदय, मस्तिष्क और किडनी लगातार प्रभावित हो रहे होते हैं।

इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट लंग्स डिजीजेज रिसर्च सेंटर के चेयरमैन डॉ. राहुल चंदोला के अनुसार, आजकल बड़ी संख्या में युवाओं का बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किसी सामान्य स्वास्थ्य जांच, ऑपरेशन से पहले की मेडिकल जांच या फिर किसी इमरजेंसी के दौरान सामने आता है। उनका कहना है कि अस्पताल में ली गई एक बार की ब्लड प्रेशर रीडिंग पूरी स्थिति को नहीं बताती। असली जानकारी तब मिलती है, जब व्यक्ति का ब्लड प्रेशर कई दिनों या हफ्तों तक लगातार मॉनिटर किया जाए।

उन्होंने बताया कि अब ऐसी आधुनिक होम मॉनिटरिंग तकनीक उपलब्ध है, जिसमें मरीज के घर पर लिए गए ब्लड प्रेशर के आंकड़े सीधे डॉक्टरों तक पहुंच जाते हैं। इससे उन लोगों की पहचान भी संभव हो जाती है, जिनका अस्पताल में ब्लड प्रेशर सामान्य दिखता है लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में लगातार बढ़ा रहता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में मास्क्ड हाइपरटेंशन कहा जाता है और यदि समय रहते इसका पता न चले तो यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के इंडियाबी अध्ययन में भी यह सामने आया है कि देश में एक चौथाई से अधिक लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें अपनी बीमारी की जानकारी तक नहीं है। अध्ययन में मोटापा, मधुमेह, शहरी जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और अत्यधिक नमक के सेवन को प्रमुख जोखिम कारकों के रूप में चिन्हित किया गया है।

कुछ वर्ष पहले तक 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में हाई ब्लड प्रेशर के मामले अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते थे। हालांकि अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और लगभग हर दिन युवा मरीज इस समस्या के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। उनका मानना है कि लंबे समय तक ऑफिस में बैठकर काम करना, समय पर भोजन न करना, प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, नींद की कमी और लगातार तनाव इस बढ़ते खतरे के प्रमुख कारण हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, यदि हाई ब्लड प्रेशर लंबे समय तक नियंत्रित न किया जाए तो यह शरीर की धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। इससे हृदय को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता, मस्तिष्क की रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं और किडनी की कार्यक्षमता भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। यही कारण है कि लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर और क्रॉनिक किडनी डिजीज जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम कई गुना बढ़ा देता है।

विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर देते हैं कि केवल दवा ही पर्याप्त समाधान नहीं है। यदि जीवनशैली में आवश्यक बदलाव नहीं किए जाएं तो ब्लड प्रेशर को लंबे समय तक नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है। इसलिए नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, तनाव पर नियंत्रण और पर्याप्त नींद को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि हर व्यक्ति को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट तक मध्यम स्तर का शारीरिक व्यायाम करना चाहिए। तेज चाल से पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या हल्की दौड़ जैसी गतिविधियां ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मददगार साबित हो सकती हैं। इसके साथ ही शरीर का वजन संतुलित रखना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि मोटापा हाई ब्लड प्रेशर के सबसे बड़े कारणों में शामिल है।

खानपान में सुधार भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि भोजन में नमक की मात्रा कम रखें और ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज तथा पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें। प्रोसेस्ड फूड, पैकेटबंद स्नैक्स, फास्ट फूड और अधिक तेल-मसाले वाले भोजन का सेवन सीमित करना चाहिए, क्योंकि इनमें अक्सर सोडियम की मात्रा अधिक होती है

तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाना, शराब का सेवन सीमित करना, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और मानसिक तनाव को नियंत्रित रखना भी रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद भी हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है, क्योंकि लगातार नींद की कमी रक्तचाप बढ़ने का खतरा बढ़ा सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि आईसीएमआर की अगुवाई में चल रहे एक अध्ययन में पाया गया है कि अधिकांश भारतीय प्रतिदिन विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित पांच ग्राम की सीमा से अधिक नमक का सेवन कर रहे हैं। यह आदत भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर और उससे जुड़ी बीमारियों के मामलों में वृद्धि का बड़ा कारण बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर जांचते रहें और शुरुआती स्तर पर ही आवश्यक कदम उठा लें, तो हर वर्ष होने वाले हजारों हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी रोग के मामलों को रोका जा सकता है। इसलिए युवाओं को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि हाई ब्लड प्रेशर केवल बुजुर्गों की बीमारी है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में हर आयु वर्ग के लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ आदतें अपनाना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।